(श्री राजेन्‍द्र यादव, श्री तेजेन्‍द्र शर्मा औरसंचालन करते हुए श्री अजित राय)

पत्रकार संघ को पुरस्कार संघ न बनाया जाये (साहित्यकार श्री कृष्णल बलदेव वैद ने अखिल भारतीय सांस्कृ्तिक पत्रकार संघ को आशीर्वाद देते समय सख्त ताकीद की)
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प्रख्यात कथाकार श्री तेजेन्द्र- शर्मा का कहानी पाठ
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(श्री अशोक वाजपेयी, श्री राजेन्‍द्र वाजपेयी और श्री तेजेन्‍द्र शर्मा)

नई दिल्ली- - अखिल भारतीय सांस्कृतिक पत्रकार संघ, नई दिल्ली द्वारा आयोजित मित्र संवाद व कहानी पाठ 25 सितम्बर 2008 की संध्या को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संचालक अजित राय ने इस पहली बैठक में पत्रकार संघ की रूपरेखा सामने रखते समय यह भी घोषणा की कि संघ की ओर से वर्ष में दो सांस्कृ तिक संवाददाताओं को पुरस्कृत किया जाया करेगा। पत्रकार संघ की स्थापना में प्रख्यात मीडिया कर्मियों का सहयोग झलक रहा था। सभागार में सांस्कृरतिक पत्रकारिता से जुड़े विद्वत्जनों की संख्यां सर्वाधिक रही।

श्री तेजेन्द्रं शर्मा के कहानी पाठ ने तो समां ही बांध दिया। उनकी कब्र का मुनाफा कहानी वास्तव में लीक से हटकर कहानी है जिसने अपनी रोमांचक करवटों से श्रोताओं को भरपूर आनंद से सराबोर कर दिया। श्री शर्मा कहानी पाठ के गुणी व्योक्तित्व है, यह कहानी कहते वक्तत उनके संवादों के अनुरूप स्वकर को आरोह और अवरोह से प्रकट हो रहा था। उनकी कहानी पाठ की सभी वक्ताओं ने भूरि भूरि प्रशंसा की।

श्री तेजेन्द्रर शर्मा एक चर्चित कथाकार होने के साथ ही, दूरदर्शन के शांति धारावाहिक के लिए लेखन कर चुके हैं तथा अन्नू् कपूर निर्देशित फिल्मह अभय में नाना पाटेकर के साथ अभिनय भी कर चुके हैं। वे हिंदी साहित्य के एकमात्र अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मान'अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान' प्रदान करने वाली संस्थार 'कथा यू.के.' के महासचिव हैं। अनेक पुरस्का रों से सम्मातनित श्री शर्मा अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेरलनों में भी सहभागी रह चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि साक्षात्कार के संपादक हरि भटनागर ने इंडिया टुडे के एक सर्वे में कब्र का मुनाफा को पिछले साठ साल में प्रकाशित बीस महत्व पूर्ण कहानियों में स्थान दिया है। श्री असगर वजाहत के वक्तव्य से कहानी पर आरंभ हुआ संवाद सांस्कृतिक पत्रकारिता के विस्तृथत फलक पर घूम गया। श्री राजेन्द्र यादव ने पत्रकार संघ की स्थापना को सांस्कृतिक पत्रकारिता की दिशा में एक महत्वरपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि आज समाचारों में नामों की चिंता रहती है कि किन किनके नाम आ रहे हैं। दोस्तों और दारू के बीच बैठकर समाचार बनाते हैं। ऐसे समाचार मिलना मुश्किल हो गया जिन पर विश्वाहस किया जा सके। सांस्कृ तिक समाचारों के क्षेत्र में एक खास तरह की अराजकता छाई हुई है।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री अशोक वाजपेयी ने सांस्कृ्तिक पत्रकारिता की वर्तमान दशा पर अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि अधिकांश लोग निस्साकर बातें ही कहते हैं । एकाध चमकदार बातें तो राजेन्द्र यादव भी कह ही जाते हैं। सांस्कृतिक संवाददाता ध्यान से सुनते नहीं हैं और जब वे समाचार लिखते हैं तो राजेन्द्र यादव ने चाहे स्त्री विमर्श या दलित संबंधी एक भी बात न कही हो पर जब वे समाचार बनाते हैं तो इसका जिक्र कर ही देते हैं। सांस्कृतिक संवाददाता दूध के धुले नहीं हैं। सांस्कृतिक समीक्षा एक तकनीकी मामला है। अधिकतर वक्ताओं की इस बात पर सहमति थी कि पत्रकार संघ द्वारा सांस्कृतिक संवाददाताओं के प्रशिक्षण की शुरूआत अवश्य की जानी चाहिये। जिससे सांस्कृतिक पत्रकारिता की एक विश्वसनीय छवि बन सके।

अपने वक्त्व्यि में श्री कृष्णी बलदेव वैद ने चुटकी लेते हुए कहा कि पत्रकार संघ को पुरस्कार संघ न बनाया जाना ही हितकर रहेगा। कम से कम शुरू में तो पुरस्कारों को देने से दूर ही रहा जाये। श्री कुंवर नारायण का कहना था कि सांस्कृतिक साहित्यिक कवरेज को अच्छी तरह किया जाए। इसकी रिपोर्टिंग प्रशिक्षित पत्रकारों से ही होनी चाहिए। सर्वश्री के. बिक्रम सिंह, नासिरा शर्मा, देवेन्द्रष राज अंकुर, डॉ. कमल कुमार, अशोक चक्रधर, विजय कुमार मल्होफत्रा, मंजीत ठाकुर, अशोक मिश्र,गीताश्री, उषा पाहवा, चंदीदत्त शुक्ल , राकेश पांडेय, विमलेश सांदलान, शरद शर्मा, जयंती, सुधीर सक्सेेना, रमेश शर्मा, अजय नावरिया, अरूण कुमार जैमिनी, आलोक श्रीवास्तदव, राकेश पांडेय, अनिल जोशी, रूपसिंह चंदेल, अविनाश वाचस्पयति, अरूण माहेश्व,री, महेश भारद्वाज, अनुज अग्रवाल, पायल शर्मा इत्यादि की उपस्थिति ने समारोह को एक गरिमा प्रदान की। समारोह में खूब ठहाके लगे और इसने एक स्तारीय कवि सम्मेलन का सा लुत्फ प्रदान किया।... अंत में अमर उजाला के श्री शरद शर्मा ने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। पर अंत तक यह रहस्य सुलझ न सका कि नामवर सिंह कहीं हवा में ही अटके रहे या दिल्ली के ट्रैफिक में उलझे रहे क्योंकि यह बतलाया गया था कि वे कहीं बाहर हैं और हवाई जहाज से इस समारोह में दिल्ली् पहुंच रहे हैं...

10 comments:

  1. अविनाश जी,
    इतनी सुंदर खबरें पढने को मिले तो मेरे जैसा भी ख़बर पढ़ सकता है. आपने बहुत अच्छा प्रस्तुत किया है. हार्दिक बधाई.

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  2. पंकज सक्सेना27 सितंबर 2008 को 8:55 pm

    साहित्य शिल्पी का आभार इस साहित्यिक गतिविधि की रिपोर्ट के प्रस्तुतिकरण के लिये..

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  3. साहित्यिक गतिविधियों की बहुत अच्छी जानकारी अविनाश जी नें दी है। तस्वीरों से लगता है जैसे माहौल जीवंत हो गया।

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  4. i had heard og kavitapaath what is kahani paath. good coverage.

    alok kataria

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  5. साहित्यिक गतिविधियों की रिपोर्ट चित्रों के साथ पढना अच्छा लगा। तेजिन्दर जी की कहानिया वैसे भी मुझे प्रिय हैं।

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  6. अविनाश जी के आलेख अपने आप में परिपूर्ण होते हैं।

    तेजिन्दर जी से एक बार मेरी फोन पर वार्ता हुई थी और उन्होंने बहुत प्रभावित किया था। उनका हिन्दी तथा साहित्य के प्रति समर्पण स्तुत्य है।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

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  7. अविनाश जी,

    सुंदर खबरें..

    सुंदर प्रस्तुतिकरण

    हार्दिक बधाई

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  8. साहित्यक गतिविधियों पर सचित्र विस्तृत लेख के लिए अविनाश जी का आभार. हिन्दी को विश्व की भाषा बनाने के लिए इस प्रकार की गतिविधियाँ बहुत आवश्यक हैं.

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  9. आलेख के लिये आभार, वाचस्पति जी! पर वो नामवरसिंह जी का पता तो लगाइये कि अभी तक हवा में हैं या जमीन पर आ गये हैं :)

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  10. बहुत अच्छी जानकारियाँ देने के लिये साहित्य शिल्पी को बहुत बहुत बधाई

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