आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए
मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए
रोशनी के लिए, इन अंधेरों में अब कुछ नही तो मिरा दिल जला दीजिए
चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं
तन्हा-तन्हा सा यूँ रास्ता दीजिए
गर मुहब्बत ज़माने में है इक खता
आप मुझको भी कोई सज़ा दीजिए
चाँद मेरे दुखों को समझा कभी चाँदनी अब तो उसकी बुझा दीजिए
हंसते हंसते जो इक पल में गुमसुम हुई राज़ "श्रद्धा" गमों का बता दीजिए

26 comments:

  1. मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए

    चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं
    तन्हा-तन्हा सा यूँ रास्ता दीजिए

    चाँद मेरे दुखों को न समझा कभी
    चाँदनी अब तो उसकी बुझा दीजिए

    गज़ल बहुत अच्छी है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही उम्दा गज़ल.....
    "तालियाँ"...

    उत्तर देंहटाएं
  3. पंकज सक्सेना24 सितंबर 2008 को 7:37 am

    जबरदस्त गज़ल है। तनेजा जी के साथ साथ मेरी भी "तालियाँ"

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह ... वाह ... वाह ...
    वाह ... वाह ... वाह ...

    वाह ... वाह ... वाह ...
    वाह ... वाह ... वाह ...

    वाह ... वाह ... वाह ...
    वाह ... वाह ... वाह ...

    वाह ... वाह ... वाह ...
    वाह ... वाह ... वाह ...

    वाह ... वाह ... वाह ...
    वाह ... वाह ... वाह ...

    ग़ज़ल की खूबसूरती, एक एक शब्‍द के बेहतर चयन की दाद के लिए इसके अतिरिक्‍त और कोई शब्‍द नहीं मिल रहे हैं।

    श्रद्धा की इस ग़ज़ल के आगे बाकी सब कुछ फीका है जबकि मुझे मीठा खाना मना है।
    वाह ... वाह ... वाह ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी गज़ल पर दाद देने वालों में मैं भी सम्मिलित हूँ

    मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए

    यह शेर बहुत अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए
    "wah, what a thought, appreciable"

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही अच्छी गज़ल है... बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  8. श्रद्धा जी,

    धमाकेदार शुरुआत की है आपने इस बेहतरीन गजल से जिसके एक एक लफ़्ज को आपने खूबसूरती से पिरोया है.. आने वाली रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी.

    उत्तर देंहटाएं
  9. श्रद्धा जी,

    कोमल भावनाओं के ग़ज़ल से बेहतर कहीं और अभिव्यक्त करना कठिन है। आपकी भावनाओं तथा शब्दों पर पकड अच्छी है, आपका प्रस्तुतिकरण इसका गवाह है। कुछ शेर मन ही में रह गये जैसे:

    मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए

    चाँद मेरे दुखों को न समझा कभी
    चाँदनी अब तो उसकी बुझा दीजिए

    और आखिरी शेर श्रेष्ठतम उपसंहार है:

    हंसते हंसते जो इक पल में गुमसुम हुई
    राज़ "श्रद्धा" गमों का बता दीजिए

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. चाँद मेरे दुखों को न समझा कभी
    चाँदनी अब तो उसकी बुझा दीजिए

    बहुत खूब ..बहुत बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  11. एक बेहतरीन ग़ज़ल देने के लिए श्रद्धा जी आप को बधाई...मेरी दिली दाद कबूल फरमाएं...हर शेर नायाब है.
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत बढ़िया गज़ल है श्रद्धा जी.

    "मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए"

    सबसे अच्छा शेर लगा.
    बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  13. श्रद्धा जी !

    हर तरह से ग़ज़ल की खूबसूरती बरक़रार।
    सिर्फ़ पढ़ा ही नहीं , गुनगुना भी रहा हूं।

    प्रवीण पंडित

    उत्तर देंहटाएं
  14. आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए
    मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए

    सुभानाल्लाह.....बहुत खूब....

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत खूब जी.. हम तो पहले भी कह चुके है..

    उत्तर देंहटाएं
  16. आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए
    मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए

    मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए

    रोशनी के लिए, इन अंधेरों में अब
    कुछ नही तो मिरा दिल जला दीजिए

    बेहतरीन...बेहद उम्दा...

    उत्तर देंहटाएं
  17. चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं
    तन्हा-तन्हा सा यूँ रास्ता दीजिए...

    umda hai.. ghalib ka ek sher hai..
    "ham vahaa.N hai.n jahaa.N se ham ko bhii
    kuchh hamaarii Khabar nahii.n aatii "
    isi sher ka theek ultaa pratibimb maine aap ke is sher mein mahsoos kiya..
    sundar..

    उत्तर देंहटाएं
  18. मैने पहने है कपड़े धुले आज फिर
    तोहमते अब नई कुछ लगा दीजिए

    चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं
    तन्हा-तन्हा सा यूँ रास्ता दीजिए

    चाँद मेरे दुखों को न समझा कभी
    चाँदनी अब तो उसकी बुझा दीजिए


    श्रद्धा जी,
    बहुत सुनदार लिखा है। बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  19. आपकी गजल वाकई... दिल को छू जाती है...
    बहुत उम्दा किस्म के शेरों के लिये आपकी बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत उम्दा, क्या बात है!आनन्द आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  21. चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूं
    तन्हा-तन्हा सा यूँ रास्ता दीजिए

    वाह ......

    हंसते हंसते जो इक पल में गुमसुम हुई
    राज़ "श्रद्धा" गमों का बता दीजिए

    वाह ..... वाह ...


    खूबसूरत ग़ज़ल ...


    बधाई
    श्रद्धा जी ..

    उत्तर देंहटाएं
  22. श्रद्धा जी! अब कुछ और कहना बाकी रह गया है क्या? :)
    सुंदर गज़ल पढ़ाने के लिये आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  23. बढिया गज़ल है।
    gtalk पर पहले हीं बधाईयाँ दे चुका हूँ।

    फिर से बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  24. मैंने पहने हैं कपड़े, धुले आज फिर ;
    तोहमतें अब नयी कुछ लगा दीजिये !

    रौशनी के लिए, इन अंधेरों में अब ;
    कुछ नहीं तो मेरा दिल जला दीजिये !

    चाप क़दमों की अपनी मैं पहचान लूं ;
    आईने से यूँ मुझको मिला दीजिये !

    shraddha jee mere vichaar se aapki ab tak kee sabse sunder rachna ......

    उत्तर देंहटाएं

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