14 comments:

  1. पंकज सक्सेना28 सितंबर 2008 को 9:01 pm

    दस सिर वाला रावण भी मरा था यह आतंकवाद क्या कभी मारा जा सकेगा?

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  2. पंकज जी का प्रश्न बहुत लोगों के मानस से उठता रहता है. अच्छी अभिव्यक्ति है!

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  3. आतंकवाद को तो
    सिर्फ आतंकवादी
    ही मार सकते हैं

    बाकी तो उनके
    बमों से मरने
    के लिए देख
    लो विवश हैं

    हम तो सिर्फ
    पुतला ही मार
    पा रहे हैं

    असली रावण
    अब भी हर
    जगह सीना
    ताने खड़ा है
    एक नहीं
    अनेक रूप हैं
    इसके।

    आतंकवाद भी
    एक रावण ही है
    रावण के दस
    सिर थे सिर्फ
    इनके एक सिर
    में रखा दिमाग
    भी खराब है।

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  4. जबरदस्त कार्टून है। आपकी इस समसामयिक अभिव्यक्ति में गहरायी है।

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  5. पंकज सक्सेना29 सितंबर 2008 को 8:10 am

    अभिषेक जी आपके कार्टून याद रह जाने वाले हैं। रावण से आपकी तुलना बिलकुल सही है।

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  6. अभिषेक जी,

    आपके कार्टूनों का मैं हमेशा से ही कायल रहा हूँ। यह कार्टून न केवल सामयिक है अपितु व्यवस्था को भी परोक्ष में कटघरे में खडा करता है जिसके पास कोई राम नहीं है।

    इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकारें।


    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत खूब..
    सामयिक विषय पर हास्य प्रहार. एक बात समझ में नहीं आती सब लोग खूराफ़ाती मांईड को मास्टर मांईड क्यों कहते हैं :)

    उत्तर देंहटाएं
  8. आतंकवाद की जितनी भर्तशना की जाये कम है.... बहुत ही सुंदर कार्टून.... बधाई

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  9. vaakiiii kabile tarif hai
    kya combination hai ravan k sath
    keep it up

    उत्तर देंहटाएं
  10. अति उत्तम..

    बहुत ही अर्थपूर्ण कार्टून है, और हाँ, रावण मरा और ये आतंकवाद भी मरेगा।

    इसी विश्वास के साथ इतने उम्दा कार्टून के लिए बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं

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