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उन सब ने खंडित कर डाला जिन पर था विश्वास मियां क्या अपनों कोधर के चाटे क्या अपनों की आस मियां इस बस्ती से आते-जाते नाक पे कपड़ा रख लेन...

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वह दिसम्बर की कड़कड़ाती सर्दियों की रात थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उस समय मैं बी0ए0 कर रहा था कि अचानक दिल्ली से आए मेरे एक मित्र कमरे ...

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मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिये फूल बन्जर में उगाना सीखिये खिड़कियों से झांकना बेकार है बारिशों में भीग जाना सीखिये आंधियां जब दे र...

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श्री राम की आराधना और वंदना तो आपने अनेकों कंठों से तथा अनेकानेकों शब्दों में सुनी होगी किंतु राम की ऊर्जा और अर्धांगिनी माँ सीता की वंदन...

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कुरूप होने से पहले जो हो गया था मैला मौसम की धूल का न रहे दाग पहला वसुंधरा अपने दामन को धो रही है लोग कहते है बारिश हो रही है ...

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गौरतलब है कि 2007 तक अलादीन किसी भी आम मध्यवर्गीय तरह विवाहित हो चुका था, और किसी भी आम मध्यवर्गीय की तरफ मर्सीडीज टाइप के ख्वाब देखने लगा...

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मनुष्य स्वभाव से ही आनन्द-प्रिय, शुभाकांक्षी एवं प्रकाशोन्मुख प्राणी है। वह सदा प्रसन्न तथा स्वस्थ रहना चाहता है। किन्तु अपनी अज्ञानतावश अ...

दीपावली पर कुछ कवितायें - प्रवीण पंडित, ब्रिजेश शर्मा व  श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'

दिवाली गिफ़्ट एक्सप्रैस मोनू को ग्रीटिंग भेजूँगा नीनू को ई--मेल अपने सारे फ़्रेंड्स को दूँगा गिफ़्ट में एक-एक रेल रेल में डिब्...

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जीवन की अँधियारी रात हो उजारी ! धरती पर धरो चरण तिमिर-तमहारी परम व्योमचारी! चरण धरो, दीपंकर, जाए कट तिमिर-पाश! दिशि-दिशि में चरण धूल...

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मैं कुछ दिनों तनहाई चाहती हूँ हर बन्धन से बिदाई चाहती हूँ... कई ख़्वाब खेले पलकों पर फिसले और खाक़ हो गये बीते थे तेरे आगोश में वो ...

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उस दफ्तर में ज्वाइन करते ही मुझे वहाँ के सब तौर तरीके बता दिए गये थे। मसलन एक हजार से पाँच हजार रूपये तक के मामलों में कितना लेना होता ह...

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उजालों की जानिब कहाँ जिन्दगी है दहकती सुबह ,खौलता आसमाँ है चलो ढूँढ़ते हैं गमों का बहाना बहुत देर से रोशनी का समाँ है । बहुत चाँदनी ...

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सूरज चाचा आते हैं रोज सवेरा लाते हैं किरणों को फैलाते हैं दुनियाँ को चमकाते हैं अंधियारा दूर भगाते हैं धरती को जीवन देते हैं उर्जा का स्त्...

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जैसा कि हम पहले कह चुके हैं, हिन्दी साहित्य के विकास-क्रम की पहली अवस्था हमें सिद्ध और नाथ योगियों की 'बानी' के रूप में नज़र आती है...

तेरे लब [कविता] – विश्वदीपक तनहा

चाँद के चकले पर लबों की बेलन डाले, बेलते नूर हैं हमे, सेकने को उजाले । उफ़क को घोंटकर सिंदुर पोर-पोर में सी रखा है! धोकर धूप को, ...

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बचपन से लिखी गयी कविताओं को काव्य-संग्रह रूप में छपवाने का मालती का बहुत मन था। इस विषय में उसने कई प्रकाशकों से संपर्क भी किया, किन्तु ...

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कौवे ने कोयल से पूछा-हम दोनों तन के काले हैं फिर जग तुझ पर क्यों मरता है मुझसे नफरत क्यों करता है कोयल बोली-सुन ऐ कौवे, बेहद शोर मचाता...

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कभी देखो समाज को बच्चे की निगाहों से पल भर में रोना पल भर में खिलखिलाना। अरे! आज लड़ाई हो गई शाम को दोनों गले मिल रहे हैं एक दूसरे...

साहित्य  शिल्पी अंतर्जाल पर प्रस्तुत करता है पहला संगीत अलबम – अनहद गीत [रीना कपिल का संगीत संयोजन]

संगीत और बच्चे दोनों ही ईश्वर की सर्वोत्तम रचना हैं। साहित्य शिल्पी प्रस्तुत करता है “जी.बी.एन विद्यालय 21-डी, फरीदाबाद” से सौजन्य से अंतर...

नार्वे में लेखक गोष्‍ठी [साहित्य समाचार] - अविनाश वाचस्पति

दिनांक 18 अक्‍टूबर 2008 को 'स्तिक इन्‍नोम' पाइतवेत सेन्‍टर, ओस्‍लो में भारत से पधारे विश्‍वप्रसिद्ध संस्‍था 'ग्‍लोबल मार्च अगें...

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“सुनो जी, अपनी मुन्नी अब खड़ी होकर चलने की कोशिश करने लगी है।” पत्नी ने सोयी हुई बेटी को प्यार करते हुए मुझे बताया। “पर, अभी तो यह क...

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जरासंध की जंघाओं से दो फांक हो कर जुडते हैं इस तरह टुकडे अस्तित्व के जैसे कि छोटी नदिया गंगा में मिल गयी हो चाहो तो जाँच कर लो अब मिल...

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सबसे दिल का हाल न कहना लोग तो कुछ भी कहतें हैं जो कुछ गुज़रे ख़ुद पर सहना लोग तो कुछ भी कहतें हैं हो सकता है इससे दिल का बोझ ज़रा कम ह...

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मानव कौल, उन चंद युवा नाट्यकर्मीयों में से एक है जो नाटक को जीवन का अंग मानते है। जो नाटक के अलावा अपना कोई आस्तित्व ही नहीं मानते जिनके ल...

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घर की बोझ नहीं होती हैं बेटियाँ बल्कि ढोती हैं घर का सारा बोझ वे हैं तो सलामत हैं आपके कुर्ते के सारे बटन बची है उसकी धवलता उनके ...

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आपकी साहित्य साधना कब और कैसे आरम्भ हुई और उसके लिए प्रेरणा आपको कहाँ से मिली? घर में लिखने पढ़ने का माहौल था। उससे कहाँ बचा जा सकता था।...

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

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आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
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