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अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा

हरे पेड़ों पे चलती आरियों को रोकलो वरना
नयी नस्लों को खमियाजा़ यक़ीनन भोगना होगा

परिन्दों को मुंडेरों पर जरा तुम चहचहाने दो
स्वयं उड़ जायेंगें जब बिल्लियों से सामना होगा

दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

तुम्हारी राजशाही से हमारी गोदड़ी अच्छी
फ़कीरों का यह अन्दाज़ तुमको मानना होगा

कहीं मज़हब की मीनारें कहीं नस्लों की दीवारें
के इनसे दूर हट के मौदगिल कुछ सोचना होगा

*****

28 comments:

  1. अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
    के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा

    दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    कहीं मज़हब की मीनारें कहीं नस्लों की दीवारें
    के इनसे दूर हट के मौदगिल कुछ सोचना होगा

    बहुत अच्छी गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  2. दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    इन पंक्तियों का जवाब नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. पंकज सक्सेना8 अक्तूबर 2008 को 8:23 am

    एक एक शेर मैदगिल जी के अनुभवों से निकला है। बहुत अच्छी प्रस्तुति है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    गज़ल की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। बहुत गहरी रचना है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
    के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा
    .....
    दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    इन पंक्तियों का जवाब नहीं।बहुत अच्छी प्रस्तुति है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा
    " very impresive words with a deep meaning'

    regards

    उत्तर देंहटाएं
  7. गज़ल का प्रत्येक शेर लाजवाब है. बहुत बढ़िया गजल.
    बधाई मौदगिल जी.

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  8. हरे पेड़ों पे चलती आरियों को रोकलो वरना
    नयी नस्लों को खमियाजा़ यक़ीनन भोगना होगा
    यकीकन अब भी नहीं चेते तो खामियाजा भोगना ही होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  9. योगेन्द्र जी की गज़ल बहुत ही लाजबाब होती है.... बहुत भावपूर्ण गजल... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. पं दिनेशराय द्विवेदी जी से सहमत। अच्छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  11. पं दिनेशराय द्विवेदी जी से सहमत। अच्छी रचना।

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  12. aache vichar aachi prastuti

    ---------Anupama

    उत्तर देंहटाएं
  13. अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
    के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा

    हरे पेड़ों पे चलती आरियों को रोकलो वरना
    नयी नस्लों को खमियाजा़ यक़ीनन भोगना होगा

    परिन्दों को मुंडेरों पर जरा तुम चहचहाने दो
    स्वयं उड़वाह! बहुत बढ़िया. यही ज़िन्दगी का मूल मंत्र है. जायेंगें जब बिल्लियों से सामना होगा

    उत्तर देंहटाएं
  14. आदरणीय मौदगिल साहब की लेखनी का कोई भी कायल हो सकता है। न केवल उनकी विधा पर गहरी पकड है अपितु भावाभिव्यक्ति के भी वे सुन्दर चितेरे हैं। इसी गज़ल के ये शेर विशेष पसंद आये..

    हरे पेड़ों पे चलती आरियों को रोकलो वरना
    नयी नस्लों को खमियाजा़ यक़ीनन भोगना होगा

    दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    कहीं मज़हब की मीनारें कहीं नस्लों की दीवारें
    के इनसे दूर हट के मौदगिल कुछ सोचना होगा

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  15. मौदगिल जी,

    सहज शब्दों में गहरी बात कह दी आपने.. यकीनन इस समाज को अपनी सोच बदलनी होगी और लीक से हट कर सोचना होगा

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  16. परिन्दों को मुंडेरों पर जरा तुम चहचहाने दो
    स्वयं उड़ जायेंगें जब बिल्लियों से सामना होगा|

    ये शेर काफ़ी जमा | निदा फाजली साहब का भी एक शेर है इस तर्ज़ पर |
    बच्चो के छोटे हाथों को , चाँद सितारे छूने दो ,
    चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे |
    सुंदर ग़ज़ल | इस की बेहर क्या है ? जानना चाहूंगा | :-)

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  17. कहीं मज़हब की मीनारें कहीं नस्लों की दीवारें
    के इनसे दूर हट के मौदगिल कुछ सोचना होगा

    बहुत सही फरमाया मौदगिल जी आपने।

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  18. अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
    के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा

    sir bahut sunder

    regards

    उत्तर देंहटाएं
  19. Maudgil jee kee gazal padhee.
    Naye vichaar aur nayee bhanayen
    hain.Achchhe gazl ke liye
    aapko aur Maudgil jee ko dheron
    badhaaeean.

    उत्तर देंहटाएं
  20. अगर चाहोगे तुम जीना तो मरना सीखना होगा
    के मिट्टी के खिलौनों में भी जीवन फूंकना होगा


    दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा


    बहुत अच्छी गज़ल

    मौदगिल जी ,
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  21. एक शेर याद आ गया --
    आंधिया ही अब करेंगी हर दीये का फैसला
    जिस दिये में जान होगी वो दिया रह जायेगा।

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  22. राजीव रंजन व उनके साथियों के सद्प्रयासों से संचालित यह ब्लागपत्रिका बेहद स्तरीय एवं अनुकरणीय बनती जा रही है. दिनबदिन नये सोपान जुड़ रहे हैं निश्चित ही आप सभी बधाई के पात्र हैं.
    साथ ही मैं अपने समस्त पाठकों, शुभचिंतकों एवं टिप्पणीदाताऒं का भी आभारी हूं. आप पाठकों में कुछ नये मित्र हैं. उनकी जानकारी के लिये कि वे मुझे या मेरी अन्य गजलों को पढ़ना चाहें तो उनका निम्न लिंक पर स्वागत है-
    yogindermoudgil.blogspot.com
    राजीव भाई मैं चूंकि हरियाणा का हूं तो एक बात और बताता हूं कि हरियाणवी जैसी लठमार बोली में भी मैंने गज़लें कहीं हैं आप उनका आनन्द इस लिंक पर ले सकते हैं
    haryanaexpress.blogspot.com
    शेष शुभ अन्यथा न लें पुन बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  23. दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान था सबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    वाह ... बहुत खूब लिखा है आपने
    बरबस ही मुँह से वाह निकलती है..!

    उत्तर देंहटाएं
  24. दुल्हन की लाश देखी तो यही अनुमान थासबका
    के जलते वक्त भी हाथों में इस के आईना होगा

    सच मे , ग़ज़ल दर्द भी है और खूबसूरती भी।
    यह शे'र आईना है दोनो का।

    प्रवीण पंडित

    उत्तर देंहटाएं

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