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कुरूप होने से पहले
जो हो गया था मैला
मौसम की धूल का
न रहे दाग पहला

वसुंधरा अपने
दामन को धो रही है
लोग कहते है
बारिश हो रही है

*****

तपती हुई प्रकृति
गर्मी से झुलस कर
सावन के आते ही
वसुधा पे उतर कर

बादल की मशक लेकर
तन-मन को धो रही है
लोग कहते है
बारिश हो रही है

*****

चांद और बदली
में हो गयी खटपट
रूठी हुई बदतिया
सूरज से करके घूंघट

सिसकियाँ
भर-भर के रो रही है
लोग कहते है
बारिश हो रही है

*****

17 comments:

  1. बारिश के तीनों ही रंग बेमिसाल हैं। कमाल की क्षणिकायें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पंकज सक्सेना29 अक्तूबर 2008 को 1:04 pm

    वसुंधरा अपने
    दामन को धो रही है
    लोग कहते है
    बारिश हो रही है

    बादल की मशक लेकर
    तन-मन को धो रही है
    लोग कहते है
    बारिश हो रही है

    सिसकियाँ भर-भर के रो रही है
    लोग कहते है
    बारिश हो रही है

    एक से बढ कर एक।

    उत्तर देंहटाएं
  3. चांद और बदली
    में हो गयी खटपट
    रूठी हुई बदतिया
    सूरज से करके घूंघट

    सिसकियाँ भर-भर के रो रही है
    लोग कहते है
    बारिश हो रही है.....
    बहुत बढिया .. समा बाँध दिया साहब .. ये क्षणिकाएं ना पढ़ते तो हम भी बस ये ही समझते रहते कि बारिश हो रही है | बड़ी ही सरल भाषा में लिखी हुई सशक्त रचना | ह्रदय में उतर रही है | :-)

    उत्तर देंहटाएं
  4. तीन अलग अलग
    सोपान

    मंजिल एक चल दे

    छाता तान।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वर्षा को क्षणिकाओं में पिरोया है लाजबाब!

    उत्तर देंहटाएं
  6. अनोखे बिम्बों से सजी बारिश का यह रूप हमें बहुत भाया

    उत्तर देंहटाएं
  7. अति सुन्दर..

    एक से बढकर एक पंक्तियाँ....क्या कहने...

    उत्तर देंहटाएं
  8. तपती हुई प्रकृति
    गर्मी से झुलस कर
    सावन के आते ही
    वसुधा पे उतर कर
    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति. धन्यवाद्.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बारिश का हर रंग पसंद आया। बधाई।

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  10. Nice poems on barish. Thanks.

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  11. तीनों ही दृश्य जीवंत हैं। बहुत ही अच्छी क्षणिकायें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. चंदन जी आपकी क्षणिकायें बहुत पसंद आयीं। गहरी गहरी बातें कम शब्दों में कह दीं आपनें।

    उत्तर देंहटाएं
  13. पवन जी,

    क्षणिकायें बहुत सी पढी हैं लेकिन यह अंदाज पसंद आया। तीनो एक दूसरे से जुदा भी और तीनों ही एक दूसरे से जुडी हुई भी। अच्छी प्रस्तुति।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपको क्षणिकाएं पसंद आएं
    आपका मन हर्षाएं
    आपसे वादा है
    थोड़ा नहीं ज्‍यादा है
    हम अपना प्रयास जारी रख सकेंगे
    अगर आपकी टिप्‍पणियों का स्‍वाद ऐसे ही चखते रहेंगे
    आप ही तो हो, हमारे लेखन की प्रेरणा
    कोई 'प्रेरणा' बुरा न माने‍, अन्‍यथा न ले।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बादल की मशक लेकर
    तन-मन को धो रही है
    लोग कहते है
    बारिश हो रही है
    bahut achha likha hai.

    उत्तर देंहटाएं
  16. इस बारिश का मज़ा अनूठा है,अलग
    अलग रंग मे ।

    प्रवीण पंडित

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत अच्छी कविता
    -jalaj गुप्ता

    उत्तर देंहटाएं

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