चाँद के चकले पर लबों की बेलन डाले,
बेलते नूर हैं हमे, सेकने को उजाले ।

उफ़क को घोंटकर
सिंदुर
पोर-पोर में
सी रखा है!
धोकर धूप को,
तलकर
हाय!
अधर ने तेरे चखा है!!

फलक को चूमकर
तारे
गढे हैं
तेरे ओठों ने!
हजारों आयतें,
रूबाईयाँ
आह!
इन लबों ने लखा है!!

सूरज को पीसकर,दिए इनको निवाले,
बेलते नूर हैं हम, सेकने को उजाले ।

18 comments:

  1. बहुत ही उम्दा रचना.

    आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

    उत्तर देंहटाएं
  2. .बहुत सुंदर लगी आपकी यह रचना ..दीपावली की बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. फलक को चूमकर
    तारे
    गढे हैं
    तेरे ओठों ने!
    हजारों आयतें,
    रूबाईयाँ
    आह!
    इन लबों ने लखा है!!
    " kmaal kmaal kmaal bemeesal, bhut hee sunder"

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  4. उफ़क को घोंटकर
    सिंदुर
    पोर-पोर में
    सी रखा है!


    बहुत सुंदर रचना ...

    दीपावली की
    हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी कविता, शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर रचना! बधाई स्वीकारें!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी कविता लिखी है. लब-ए-महबूब का ज़िक्र तो वैसे भी शायरी का एक अहम हिस्सा है. आभार पढ़वाने का!

    उत्तर देंहटाएं
  8. पंकज सक्सेना25 अक्तूबर 2008 को 7:47 pm

    नये उपमान है, अच्छा लगा पढना।

    उत्तर देंहटाएं
  9. एकदम नूतन संग्याएं।
    पढ़कर भी अच्छा लगा , और महसूस करके भी।

    प्रवीण पंडित

    उत्तर देंहटाएं
  10. तन्हा जी,
    सुंदर उपमाओं से सजी रचना ... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  11. थोड़े भारी शब्द है पर अच्छा लिखा है
    brijesh शर्मा
    दीपावली मुबारक

    उत्तर देंहटाएं
  12. कठिन शब्दों का अगर मतलब भी आम पाठकों के लिए दिया जाता तो इस बेहतरीन रचना का मज़ा दुगना नहीं बल्कि चौगुना हो जाता।

    उत्तर देंहटाएं
  13. उपमा ही उपमा में पूरी कविता, समझने में श्रम तो लगा किंतु कविता अच्छी है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. तनहा जी,
    आपकी एक और अच्छी कविता की बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  15. तनहा जी,

    शब्द चित्र बखूबी खीचा है आपने, लेकिन कविता दुरूह अवश्य है। कविता को एक ही बार पढ कर काव्यरस नही लिया जा सकता अपितु इसे ध्यान पूर्वक बिम्बों की श्रंखला में डूब कर पढना आवश्यक है।

    कविता उत्कृष्ट है, एक कवि के तौर पर यह आपके श्रेष्ठ में से एक है।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  16. उपमाओ का परिवहन शब्द भाव भार से दबे दबे हैं ।सुंदर प्रयास ।छगनलाल गर्ग।

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget