11 comments:

  1. हा हा हा . अभिषेक जी बहुत अच्छे. आजकल ऐसे ही फल मिल्राहे हैं. एक सुंदर कल्पना के लिए बधाई.

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  2. कहते हैं कि "अभिषेक जी" का है अंदाज-ए-बयाँ और।

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  3. इन्‍हें कीर्तिश की
    नैनो कार में
    दिखा देते सवार

    फिर जो मिलता
    फल वो होता
    निराला

    नैनो में उठाने
    को सीताफल
    ही पाते।

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  4. चलिये कुछ तो ’फल’ मिल ही जाते हैं न! ये भी न मिलें तो भी आप इन नक्षत्रों और ज्योतिषियों का क्या बिगाड़ लेंगे?

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  5. ज्योतिष और उसके फल को अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।

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  6. बड़ी पीढा मुस्कुराते हुए बयान हुई ... खूबसूरत ... बधाई स्वीकार करो दोस्त | :-)

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  7. अधिक बडा फ़ल मिलने पर भी कई कठिनाईयां हैं.. कटोरे में नहीं समायेगा.. सीताफ़ल..
    जीवन में भाग्य से ज्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिलता.. इस क्रूर सच है

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  8. अभिषेक जी को सुंदर चित्रण के लिए बधाई!

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