भारत कोलेज के स्टूडेंट्स की एक मीटिंग में शांतिस्वरूप और धीरज में एक सवाल पर मतभेद पैदा हो गया। दोनों में खूब तू-तू,मैं-मैं हुई। देखते ही देखते दोनों का मतभेद क्रोध में बदला और क्रोध दुश्मनी में। शांतिस्वरूप में शान्ति गम हो गयी और धीरज में धीरज खो गया। गुस्से में डूबे दोनों ने अपना-अपना ग्रुप बना लिया। धीरज के खून के प्यासे शांतिस्वरूप की नींदें नदारद हो गईं, आधी-आधी रात तक वो सोचता कि कब धीरज कहीं पर अकेला मिले और कब वो उसे गले से दबोच कर और उसे मार-मार कर हड्डी-पसली एक कर दे। शांतिस्वरूप के खून का प्यासा धीरज की नींदें भी नदारद हो गईं। आधी-आधी रात तक वो भी सोचता कि कब शांतिस्वरूप कहीं पर अकेला मिले और कब वो उसकी गर्दन दबोच कर और मार-मार कर कीमा बना दे उसका। 

आखिर एक दिन शांतिस्वरूप और धीरज का आमना-सामना हो ही गया गिरधर पान वाले की दूकान पर। दोनों ही पान-सिगरेट खरीदने आए थे। दोनों के साथी साथ-साथ थे। धीरज को देखते ही शांतिस्वरूप का चेहरा लाल-पीला हो गया। शांतिस्वरूप को देखते ही धीरज का चेहरा भी तमतमा उठा। वो शेर की तरह गरजा-

"आज तू बच कर घर नहीं जा सकता है" 
धीरज के साथिओं ने उसकी आवाज़ में आवाज़ मिलाई। तमतमाते शांतिस्वरूप ने भी नाग की तरह फुफकारा -

"मैं नहीं धीरज,आज तू बचकर घर नहीं जा सकता है" 
शांतिस्वरूप के साथिओं ने भी उसकी आवाज़ में आवाज़ मिलाई। 

"अगर तूने माँ का दूध पीया है तो मुझ पर हाथ उठा कर दिखा" ये धीरज की ललकार थी।

"अगर तूने माँ का दूध पीया है तो मुझ पर हाथ उठा कर दिखा"ये जवाब में शांतिस्वरूप की ललकार थी।
जोश में धीरज और शांतिस्वरूप के दायें हाथ उठे लेकिन उठे के उठ ही रह गए। दोनों ने अपनी-अपनी माँ का दूध नहीं पीया था।
***** 

17 comments:

  1. पंकज सक्सेना18 नवंबर 2008 को 7:25 am

    "दोनों ने अपनी-अपनी माँ का दूध नहीं पीया था।" ळडकपने पर सुन्दर लघुकथा।

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  2. लगता है, जोश में होश भी होता है। अलग हट कर संदर्भ लिया है आपने। अच्छा लगा इसे पढना।

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  3. आनंद आया पढ कर। प्राण जी बधाई।

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  4. जो गरजते हैँ...वो बरसते नहीं....


    पढना अच्छा लगा

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  5. You have made my day. Very nice short story.

    Alok Kataria

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  6. ये जुमला कई बार सुना है पर इस तरह प्रयुक्त होते नहीँ पढा
    समय बदला है और इन्सान भी - प्राण भाई साहब की लिखी
    ये लघु कथा अच्छी लगी -
    - लावण्या

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  7. कागज के शेरों को बहुत मजेदार ढंग से प्रस्तुत किया है आपने।

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  8. आनंद आया ...

    अच्छा लगा पढ कर।....

    बधाई।

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  9. जोश में धीरज और शांतिस्वरूप के दायें हाथ उठे लेकिन उठे के उठ ही रह गए। दोनों ने अपनी-अपनी माँ का दूध नहीं पीया था।

    " very interetsing story to read, climax of story is fantastic.."

    Regards

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  10. जोश, होश(या फिर बुज्दिली) का अच्छा संगम।
    अच्छी लगी लघुकथा।
    बधाई स्वीकारें\

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  11. अच्छी चुटकी ली है आपने :)

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  12. अच्छे गरजे--।

    प्रवीण पंडित

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  13. बहुत सुंदर लघुकथा। अंत तक रोचकता बनी रही और कथा के अंत में तो आनंद
    आ गया।

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  14. ऐसी कमाल की लघु कथा सिर्फ़ और सिर्फ़ आप ही लिख सकते हैं...नमन आप की लेखनी को...बार बार..
    नीरज

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  15. माटी के शेर थे दोनों... मां का दूध पीने का प्रशन ही नहीं .. सुन्दर प्रस्तुति

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