कोलकाता। हरिवंश राय बच्चन के जन्मशती समारोह के अन्तर्गत संसद परिवार की ओर से आयोजित संगीतमय कार्यक्रम बच्चन का मधुकाव्य शहर के काव्यानुरागी श्रोताओं के लिए यादगार अनुष्ठान बन गया। खचाखच भरे सभागार में लोगों ने मधुशाला एंव अन्यान्य रचनाओं के माध्यम से भरपूर ज्ञानरंजन किया। हाला, प्याला, साकी और मधुशाला रुपी प्रतीकों के माध्यम से कवि के राष्ट्रदर्शन, भक्ति, श्रृंगार, वेदना व ऋतु सम्बन्धी रूबाइयों का प्रस्तुतीकरण विभिन्न रागों में किया गया। जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

इसके अलावा बच्चनजी की सुप्रसिद्ध कविताएं इस पार-उस पार एवं पथभ्रष्ट की आवृति की गई। मधुकाव्य से सम्बन्धित रोचक संस्मरण एवं बच्चन जी के जीवन से सम्बद्ध प्रेरक घटनाओं का भी जिक्र किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन, संयोजन संस्था के कर्मसचिव श्रीराम चमडिय़ा ने किया। काव्यपाठ आदि में अंशग्रहण किया सर्वश्री काशीप्रसाद खेरिया, गोविन्द फतेहपुरिया, श्यामसुन्दर बगडिय़ा, श्रीराम चमडिय़ा, राजगोपाल सुरेका, महेश लोधा, विजय झुनझुनवाला, विश्वनाथ केडिया, राजीव माहेश्वरी, प्रमोद शाह, केशव बिन्नानी, चंद्रशेखर लाखोटिया एवं श्रीमती डा. तारा दुगड़, चित्रा नेवटिया, नीता सिंघवी एवं विद्या भण्डारी ने।
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7 comments:

  1. साहित्य समाचारों से अवगत कराने का यह प्रयास सराहनीय है। जमाना हो गया जब साहित्यिक गतिविधियाँ भी समाचार हुआ कराते थे। यह प्रयास जारी रखें।

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  2. आयोजनकर्ताओं को बधाई। जानकारी के लिये प्रकाश जी को साधुवाद।

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  3. धन्यवाद प्रकाश जी इस समाचार के लिये।

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  4. विशिष्ट जानकारी के लिये प्रकाश जी का धन्यवाद

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  5. अच्छा आयोजन और अच्छी रिपोर्ट।

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  6. बंधुओं,
    बधाई के पत्र तो सहित्यशिल्पी और आप सुधि साहित्यानुरागी जन हैं. वरना इस आर्थिक युग में साहित्यिक समचोरों की सुध कौन लेता है. कोलकाता में हिन्दी जगत उतना ही सक्रिय है, जितना आपके शहर में. कुछ संस्थाएं यहाँ सचमुच अच्छा काम कर रही हैं. उनकी गतिविधियों के समाचार निरंतर भेजता रहूँगा.
    आपका भाई,
    प्रकाश चंडालिया

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  7. निश्चय ही प्रशंसनीय प्रस्तुति। इधर कोई ख़्याल नहीं देता आजकल ।

    आपने अच्छा किया।
    प्रवीण पंडित

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