नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है [आलेख] - कृष्ण कुमार यादव

भारतीय संस्कृति में उत्सवों और त्यौहारों का आदि काल से ही महत्व रहा है। हर संस्कार को एक उत्सव का रूप देकर उसकी सामाजिक स्वीकार्यता को स्थ...

गाँव में अफसर [कविता] - अशोक कुमार पाण्डेय

उस तरह नहीं आता गाँव में अफसर जैसे आती है बिटिया हुलसकर ससुराल से या नई दुल्हन लाँघते आशंकाओं के पहाड़ उस तरह तो बिल्कुल नहीं जैसे हाट...

'युग पुरूष' [कविता] - श्रीकांत मिश्र 'कांत'

'युग पुरूष' …. तातश्री ! भीष्म पितामह ...!! यही नाम ... मान देकर , बंदी बना दिया युग ने.... कालजयी अपराजेय.. ब्रह्मचारी ....

मर्द नहीं रोते [कहानी] - सूरज प्रकाश

रामदत्‍त जी को ऑटो वाले ने संध्‍या आश्रम के गेट पर ही छोड़ दिया है। उनकी अटैची नीचे जमीन पर रखी है और वे सामने आश्रम की तरफ देखते हुए सोच ...

डॉ. कुँवर बेचैन के साथ एक शाम [मुलाकात] - साहित्य शिल्पी की विशेष प्रस्तुति

साहित्य शिल्पी समूह बहुत समय से प्रयासरत था कि कुँवर बैचैन जी से समय मिल सके और उनसे उनकी ही बात हो। क्रिसमस की संध्या को जैसे सेंटाक्लाज ने...

बहर और छंद [उर्दू ग़ज़ल बनाम हिंदी ग़ज़ल - २] - प्राण शर्मा

जिस काव्य में वर्ण और मात्रा की गणना के अनुसार विराम, तुक आदि के नियम हों, वह छंद है। काव्य के लिए छंद उतना ही अनिवार्य है जितना भवन के न...

किसी तपते सफ़र को भीगती सी शाम दे जाऊं [ग़ज़ल] - प्रवीण पंडित

किसी तपते सफ़र को भीगती सी शाम दे जाऊं किसी आधी -अधूरी बात को अंजाम दे जाऊं मेरी तस्वीर भी रख ले वो अपनी शामो- सुबहों मे किसी अपने को, ...

सुमित्रानंदन पंत – जीवन एवं रचना संसार [पुण्यतिथि पर विशेष] – राजीव रंजन प्रसाद

छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में एक, सुमित्रानंदन पंत का साहित्य को योगदान अविस्मरणीय है। आपका जन्म 20 मई 1900 को अल्मोड़ा ज़िले के कौ...

राष्ट्रकवि दिनकर की जन्म शताब्दी पर कानपुर में संगोष्ठी का आयोजन [साहित्य समाचार] - अनुराग, सचिव, मेधाश्रम संस्था

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ के जन्म शताब्दी वर्ष पर मेधाश्रम संस्था के तत्वाधान में ‘‘राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाधर्मिता के विविध आयाम‘‘ प...

अरुण का गुनाह [लघुकथा] - रचना श्रीवास्तव

आज की सुबह कुछ अलग सी थी या फ़िर मुझे ही एसा लग रहा था मालूम नही .पूरे घर में अजीब सा सन्नाटा था एसा कल से था जब से मैने अरुण स...

अम्बा का संताप [कविता] - मोहिन्दर कुमार

अम्बा काशी नरेश की तीन पुत्रियों में से एक थी जो मन ही मन मार्तिकावत के राजा साल्वाराज को अपना पति मान चुकी थी. देवव्रत (भीष्म) ने जो कि रा...

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