लोग मिलते हैं सवालों की तरह
जैसे बिन चाबी के तालों की तरह

भूख में लम्हात को खाया गया
सख्त रोटी के निवालों की तरह

घर अगर घर ही रहें तो ठीक है
क्यों बनाते हो शिवालों की तरह

दीप सा किरदार तो पैदा करो
लोग चाहेंगे उजालों की तरह

ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
याद आओगे मिसालों की तरह
***** 

15 comments:

  1. दीप सा किरदार तो पैदा करो
    लोग चाहेंगे उजालों की तरह

    ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
    याद आओगे मिसालों की तरह
    बहुत खूब...प्रेरणा देती आपकी गज़ल पसन्द आई

    उत्तर देंहटाएं
  2. ham insan to bnana chahte hee nahi, sidhe bhagwan ho jana chahte hain. magar bhagwan to ban nahi pate insan bhee nahi rahte. narayan narayan

    उत्तर देंहटाएं
  3. भूख में लम्हात को खाया गया
    सख्त रोटी के निवालों की तरह

    Very nice.

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी ग़ज़ल है।

    लोग मिलते हैं सवालों की तरह
    जैसे बिन चाबी के तालों की तरह

    भूख में लम्हात को खाया गया
    सख्त रोटी के निवालों की तरह

    ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
    याद आओगे मिसालों की तरह

    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. पंकज सक्सेना17 दिसंबर 2008 को 8:33 am

    दीप सा किरदार तो पैदा करो
    लोग चाहेंगे उजालों की तरह

    दीपक जी बहुत अच्छी लगी आपकी यह ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी गज़ल है दीपक जी, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. निहायत खूबसूरत ख्यालों का मुजाहिरा किया है दीपक जी आपने इस गजल की मार्फ़त..पढ कर बहुत अच्छा लगा

    उत्तर देंहटाएं
  8. घर अगर घर ही रहें तो ठीक है
    क्यों बनाते हो शिवालों की तरह
    "लाजवाब अभिव्यक्ति"

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी गजल है। भाव पक्ष सशक्त है।

    भूख में लम्हात को खाया गया
    सख्त रोटी के निवालों की तरह

    दीप सा किरदार तो पैदा करो
    लोग चाहेंगे उजालों की तरह

    उत्तर देंहटाएं
  10. भूख में लम्हात को खाया गया
    सख्त रोटी के निवालों की तरह
    बहुत सुंदर.रंजन जी मतला एक बार चेक कर लें कहीं ग़ल्त तो नही टाईप हुआ.

    उत्तर देंहटाएं
  11. लोग मिलते हैं सवालों की तरह
    दीपक जी आप की ग़ज़ल के इस मिसरे से जगजीत जी की गायी ग़ज़ल" लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह" याद आ गयी...बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने...बधाई...
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत अच्छी गज़ल है भाई। बधाईयाँ …ख़ूब…वाह वाह

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी गजल है।

    ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
    याद आओगे मिसालों की तरह

    बहुत खूब... बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  14. दीप सा किरदार तो पैदा करो
    लोग चाहेंगे उजालों की तरह

    बहुत खूब...
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत अच्छी गजल है।

    ख़ुद को तुम इन्सान तो साबित करो
    याद आओगे मिसालों की तरह

    बहुत खूब... बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget