खामोशी तीन तरह की होती है.
एक वो जिसमें होने वाली
बातों का तक़ाज़ा होता है.
जैसे दूर से एहसास हो जाता है
पटरी पे कान रखने से,
कि रेल गाड़ी आने वाली है.
और एक वो जिसमें,
हो चुकी बातें गूँजती रहती हैं.
जैसे जागके ऊंघती सहेर के कानों में,
रात का गुम्मा गूँजता है.
लेकिन हो चुकी और होने वाली बातों के
बीच की भी एक खामोशी पलती है!
कभी सिफ़र सी लगती है.. और कभी सफ़र.....

20 comments:

  1. बहुत अच्छा लगा खामोशी के तीनों पहलू को पढकर। बधाई।

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  2. हो चुकी और होने वाली बातों के
    बीच की भी एक खामोशी पलती है!
    कभी सिफ़र सी लगती है.. और कभी सफ़र.....

    बहुत ही खूबसूरती से बयान किया है खामोशी को
    तीसरी खामोशी का अंदाजे बयाँ लाजवाब है

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  3. लेकिन हो चुकी और होने वाली बातों के
    बीच की भी एक खामोशी पलती है!
    कभी सिफ़र सी लगती है.. और कभी सफ़र.....

    वाह उपासना जी, बस मन को छू लिया आपकी कविता नें।

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  4. गूढ दार्शनिकता लिये कविता.. बधाई

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  5. पंकज सक्सेना15 दिसंबर 2008 को 2:33 pm

    गहन चिंतन और अच्छा ऑब्जरवेशन।

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  6. कविता बहुत अच्छी है। खामोशी पर बहुत अच्छी व्याख्या है आपकी कविता।

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  7. बहुत बढिया!!खामोशी पर बहुत अच्छी व्याख्या है।

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  8. आपके विचार स्वागत योग्य है पर विचार को कविता की शक्ल देने के लिये जो शिल्प चाहिये वो गढने मे यह कविता असफ़ल है। आशा है बुरा नही मानेन्गी।

    और सफ़ल कविताओं के लिये शुभकामनाये

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  9. उपासना जी,आपने इतनी खामोशी से खामोशी के सभी पहलुओं का वर्णन किया है कि अपनी ज़ुबाँ तो कुछ कहने से पहले ही खामोश हो गई।


    अच्छा लिखा है आपने...बधाई स्वीकार करें

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  10. बजा फ़रमाया आपने उपासना जी. ख़ामोशी, ख़ामोशी और ख़ामोशी. सुन्दर कविता के लिये बधाई.

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  11. हो चुकी और होने वाली बातों के
    बीच की भी एक खामोशी पलती है!
    कभी सिफ़र सी लगती है.. और कभी सफ़र.....


    बहुत ही खूबसूरत ....

    बधाई!

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  12. बहोत ही खूब लिखा है आपने ढेरो बधाई आपको

    अर्श

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  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  14. लेकिन हो चुकी और होने वाली बातों के
    बीच की भी एक खामोशी पलती है!
    कभी सिफ़र सी लगती है..
    लाजवाब!

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  15. उपासना जी! सच कहूँ तो मुझे आपकी कवितां से ज़्यादा आपके दार्शनिक विचारों ने प्रभावित किया. और जब प्रस्तुतिकरण भी इतना अच्छा हो तो बात ही क्या है! बधाई स्वीकारें!

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  16. apne phalsephana andaaz meiN khamoshi ko ek nayi tamheed bakhshi hai aapne...
    kavita mei jitni saadgi hai, utni hi asardaar hai...
    badhaaee !!
    ---MUFLIS---

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  17. aap sabhi ka bohot shukriya..
    sujhaavon par amal zaroor hoga... aur badhaai mujhe nahi aa p sabhi ko .. jo mujh apripakva kavyatri ko itni pranshansaa ka paatra banaya hai aap sabhi.. dhanyawaad... :)

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  18. अनोखे अंदाज में अपनी बात कहने की आपकी अदा हमेशा हीं असरकारी होती है।
    बधाई स्वीकारें।
    -तन्हा

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