आपकी याद
आती है,
जैसे हल्के से ..
मध्धम सी रोशनी में
मेरी ज़िंदगानी,
मुस्काती है -

और आपके रंगीन
तसव्वुर के
दीदार से
मेरी शामें,
झिलमिलातीं हैं!

बादेसबा इठला के,
कोई धुन,
गुनगुनाती है ~~
और न जाने कैसे,
बेइन्तहा कलियाँ,
फूल बन के,
मुस्कुराती हैं!

20 comments:

  1. कोमल कविता है, बहुत पसंद आयी।

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  2. कविता अगर निर्वैयक्तिक होकर साधारणीकृत हो जाये जिसमें जन की आवाज़ लक्षित किया जा सके तो कहेंगे कि कविता का भविष्य उज्जवल है।तभी तो एकांत श्रीवास्तव अपनी एक कविता में कहते हैं-
    “वे रास्ते महान हैं जो पत्थरों से भरे हैं
    मगर जो हमें सूरजमुखी के खेतों तक ले जाते हैं
    वह सांस महान है
    जिसमें जनपद की महक है
    वह हृदय खरबों गुना महान
    जिसमें जनता के दु:ख हैं।”

    उत्तर देंहटाएं
  3. Vaah! Vaah!! Lavanya jee.

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  4. और न जाने कैसे,
    बेइन्तहा कलियाँ,
    फूल बन के,
    मुस्कुराती हैं!

    सुन्दर दृश्य उपस्थित करती मन को छू जाने वाली कविता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. याद का आना और उनसे मन का मुस्कुराना बहुत सुन्दरता से आपके शब्दों से बयान हुआ है। बहुत अच्छी कविता है।

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  6. और न जाने कैसे,
    बेइन्तहा कलियाँ,
    फूल बन के,
    मुस्कुराती हैं!
    " sunder najuk si bhavnayen.."

    regards

    उत्तर देंहटाएं
  7. ये कलियां ये फ़ूल ये गुलशन यूंही मुस्कराते रहें और हमें बढिया बढिया रचनायें पढने को मिलती रहें.. मन के कोमल भावों का सुन्दर चित्रण

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत अच्छी रचना है... खास कर यह पंक्तिया वाह वाह कहने को आमादा करती हैं

    बादेसबा इठला के,
    कोई धुन,
    गुनगुनाती है ~~
    और न जाने कैसे,
    बेइन्तहा कलियाँ,
    फूल बन के,
    मुस्कुराती हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  9. URDU MEIN EK SHABD HAI--"AAMAD"
    YANI BHAV APNE-AAP FOOTNAA.LAVANYA
    JEE KEE YE KAVITA BHEE AAMAD KEE
    TARAH HAI.

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  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  11. बहुत अच्छी कविता है लावण्या जी, याद रह जाये जो...बहुत बधाई।

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  12. पंकज सक्सेना12 दिसंबर 2008 को 5:57 pm

    जैसे हल्के से ..
    मध्धम सी रोशनी में
    मेरी ज़िंदगानी,
    मुस्काती है -

    क्या बात है, वाह!!

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  13. बहुत अच्छी कविता, लेकिन आप के ब्लॉग का कलेवर... माशा अल्लाह!!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. लावण्य दी, बहुत अच्छा लगा पढ़ कर। सुंदर। सकारात्मक, positive सोच। मुझे भी याद कर के रोने धोने पर ज़्यादा भरोसा नहीं। हाँ ऐसा नहीं कि लिखते नहीं हम ऐसा, मेरा एक पुराना शेर याद आ गया-

    उसके जाने पर भला रोयें कभी क्यों जो मुझे
    ज़िंदगी भर के लिये यादें सुहानी दे गया

    उत्तर देंहटाएं
  15. --"AAMAD" ( from Pran bhai sahab )

    “वे रास्ते महान हैं जो पत्थरों से भरे हैं
    मगर जो हमें सूरजमुखी के खेतों तक ले जाते हैं
    वह सांस महान है
    जिसमें जनपद की महक है
    वह हृदय खरबों गुना महान
    जिसमें जनता के दु:ख हैं।”
    ( from Sushil ji )

    &

    उसके जाने पर भला रोयें कभी क्यों जो मुझे
    ज़िंदगी भर के लिये यादें सुहानी दे गया
    ( from Manoshi )
    + many lovely words from every one, i humbly thank each one of you ,
    ***************************
    आप सभी का शुक्रिया
    जो इतनी सुँदर
    प्रतिक्रिया लिख दीँ :)
    स स्नेह,
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  16. बादेसबा इठला के,
    कोई धुन,
    गुनगुनाती है ~~
    और न जाने कैसे,
    बेइन्तहा कलियाँ,
    फूल बन के,
    मुस्कुराती हैं!

    मन के भावों को दर्शाती सुंदर कविता

    उत्तर देंहटाएं

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