9 comments:

  1. मजे आ गए |
    गोबर लगा जूता दे मारा है |
    मरते रहें ये इसी लायक हैं |

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  2. पंकज सक्सेना22 दिसंबर 2008 को 8:29 am

    समीक्षक की समीक्षा कर दी आपनें।

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  3. जी बहुत खूब... आजकल एडवर्टाईजमेंट का जमाना है मगर वो भी कहां सस्ती है... सब कुछ बिकता है मगर दाम अलग अलग हैं..

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  4. kya baat hai guruji , maza aa gaya . dekh kar hi hamne netao ko juta maar diya hai

    aapko bahut badhai ..

    vijay
    poemsofvijay.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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