सफल हो कर तुम दिखलाओ [कविता] - रितु रंजन

अडचने तो आती हैं राह में आगे बढ कर दिखलाओ गलत राह पर अगर चलोगे काँटे ही होंगे राहों में फूल अगर तुमको पाना है सच्चाई से राह बनाओ अपनी...

शहीद हूँ मैं [कविता पोस्टर] - विजय कुमार सपत्ति/ सुमेधा

आतंकवाद का मुकाबला कैसे हो? बशीर साहब की पंक्तियाँ याद आती हैं:- लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।...

गांधी मार्ग से स्विस मार्ग पर [व्यंग्य] - आलोक पुराणिक

उन्होने बताया कि हमें गांधीजी के मार्ग पर चलना चाहिए, और खुद जेनेवा जाने वाले मार्ग पर चले गये। स्विटजरलैंड में सुना है, उनके स्विस खाते हैं...

महात्मा गाँधी [कविता] - कृष्ण कुमार यादव

महात्मा गाँधी सत्य और अहिंसा की मूर्ति जिनके सत्याग्रह ने साम्राज्यवाद को भी मात दी जिसने भारत की मिट्टी से एक तूफान पैदा किया जिसन...

देवता [कविता] - डॉ. नंदन

देवता ! यह तुम्हारा अद्भुत दीप्तिमान मुखमंडल लकदक वेशभूषा अस्त्र-शस्त्रों से सज्जित तुम्हारे इस जादुई रूप का आकर्षण भयानक है जो निठ...

लोग तो कुछ भी कहते हैं [काव्य-पाठ, स्वर- हरीश भीमानी] - देवमणि पांडेय

यद्यपि किसी काव्य-कृति को पढ़ना अपने आप में आनंददायक होता है, पर यह आनंद तब और भी बढ़ जाता है जब उस रचना को किसी के प्रभावशाली स्वर में सु...

यही है दर्द मेरा, लोग मुझको कब समझते हैं [ग़ज़ल] - दीपक गुप्ता

यही है दर्द मेरा, लोग मुझको कब समझते हैं मैं शातिर हूँ नहीं इतना कि, जितना सब समझते हैं ज़माने को समझने में हमारी उम्र गुजरी है मियां, ...

मैं बाज़ार में ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहा हूँ - महेश भट्ट [सिने निर्माता/निर्देशक महेश भट्ट से बातचीत] - मधु अरोडा

महेश जी, आज तक पत्रकार आपसे आपकी फ़िल्मों, इंडस्ट्री में चल रही गॉसिप या फिर किसी विवाद के बारे में पूछते रहे हैं। मेरा सवाल सबसे हटकर है। ...

गणतंत्र दिवस परेड में झाँकियों की जरूरत अब नहीं है [व्यंग्य] - अविनाश वाचस्पति

इस बार परेड में दिल्‍ली की झाँकी नहीं थी पर दिल्‍ली में झाँकियों की कमी नहीं है। सरकार वैसे भी फालतू में ही दिल्ली की अलग से एक झाँकी निकाल...

कमलेश्वर जी पीछे छोड़ गये अपनी रचनात्मक बेचैनी [पुण्यतिथि पर विशेष] - कृष्ण कुमार यादव

अजीब दिन थे/ नीम के झरते हुए फूलों के दिन/ कनेर में आती पीली कलियों के दिन/ न बीतने वाली दोपहरियों के दिन/ और फिर एक के बाद एक लगातार बीतते ...

प्रेरणा उत्सव [नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर साहित्य शिल्पी द्वारा आयोजित विचार/काव्य गोष्ठी तथा कार्टून प्रदर्शनी] – एक रिपोर्ट

साहित्य शिल्पी नें अंतरजाल पर अपनी सशक्त दस्तक दी है। यह भी सत्य है कि कंप्यूटर के की-बोर्ड की पहँच भले ही विश्वव्यापी हो, या कि देश के पूरब...

क्रिया के प्रयोग संबंधी दोष [ग़ज़ल : शिल्प और संरचना] - प्राण शर्मा

सहायक क्रिया का प्रयोग उन्नीस सौ सत्तावन या अट्ठावन की बात है कि हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार और ग़ज़लकार स्वगीर्य शंभुनाथ 'शेष' से ...

संसद पर हमला [ गणतंत्र दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - साहित्य शिल्पी द्वारा आयोजित प्रेरणा उत्सव में कार्टून प्रदर्शनी। [नीरज गुप्ता के कार्टून]

गणतंत्र दिवस ठहर कर सोचने का दिन भी है। आखिर जिस आजादी की हमने परिकल्पना की थी क्या वह सही मायनों में आ सकी है? क्या आज हम उसी जनता का जनता ...

जनतंत्र [गणतंत्र दिवस पर कवितायें] - डॉ. महेन्द्र भटनागर

-1- जनतंत्र के उद्घोष से गुंजित दिशाएँ! आज जन-जन अंग शासन का, बढ़ गया है मोल जीवन का, स्वाधीनता के प्रति समर्पित भावनाएँ! अब नहीं ...

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