"सुन री, अगले हफ्ते से बजाज सेंटर में चाइनीज और ओरिएंटल कुकरी की क्लासेस शुरू हो रही है। बहुत मन कर रहा हैं मेरा ओरिएंटल खाना बनाना सीखने का लेकिन जाऊं कैसे?

"क्यों, क्या परेशानी है?"

"परेशानी सिर्फ इतनी सी है मेरी बिल्लो रानी कि ये क्लासेस पूरे चालीस दिन की हैं और सवेरे दस से तीन बजे तक चलने वाली हैं। अब इस शौक को पूरा करने के लिए डेढ़ महीने की छुट्टी लेना कोई बहुत बड़ी समझदारी की बात तो नहीं होगी ना।"

"हम तेरी मुफ्त की छुट्टी का इंतजाम कर दें तो बता क्या ईनाम देगी।"

" सच . . . तू जो कहे . . . जहाँ तू कहे शानदार पार्टी मेरी तरफ से। बता कैसे मिलेगी मुझे छुट्टी?"

"मिलेगी बाबा . . . . जरा धैर्य से। पहले मेरे दो तीन सवालों के जवाब दे। कितने बच्चे हैं तेरे?"

"एक ही तो है केतन . . . . क्यों?"

"कोई सवाल नहीं। अच्छा ये बता ओर बच्चा तो नहीं पैदा करना है तुझे?"

"अभी तक तो सोचा नहीं। हां भी और नहीं भी।"

"कोई बात नहीं। ऐसा कर, कल ही तू जा कर अपना एडमिशन करवा लेना।"

" दैट्स ग्रेट। लेकिन छुट्टी।"

"छुट्टी मिलेगी आपको एमटीपी का एक लैटर दे कर। पूरे पैंतालीस दिन की। दो बार ली जा सकती है। मिसकैरिज के लिए कोई सबूत थोड़े ही चाहिये।"

"अरे वाह, मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था। मैं कल ही अपनी गायनॉक से बात करती हूँ।" 

"सिर्फ अपने लिए नहीं, मेरे लिए भी बात करना। मैं भी . . . ।"

"यू टू ब्रूटस।"
***** 

19 comments:

  1. सूरजप्रकाश जी गहरा व्यंग्य है। होता है आम तौर पर सरकारी दफ्तरों में। सुविधा का एसे भी लाभ उठाया जाता है।
    लघुकथा कहने का आपका अंदाज बेहतरीन है।

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  2. आज की मानसिकता पर चोट करती हुई कहानी

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  3. पंकज सक्सेना20 जनवरी 2009 को 8:06 am

    "छुट्टी मिलेगी आपको एमटीपी का एक लैटर दे कर। पूरे पैंतालीस दिन की। दो बार ली जा सकती है। मिसकैरिज के लिए कोई सबूत थोड़े ही चाहिये।"

    :) सूरज जी आप तो लोगों को आईडिया दे रहे हैं।

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  4. सूरज जी आपमें सादगी से बडी बात कहने की जो कला है उसे कोटि कोटि नमन।

    उत्तर देंहटाएं
  5. surajji ne sarkaaree vyavastha per gaharee chot kee hai. sarkaar suvidha detee hai taaki ghar aur naukaree mein taartamya bana rahe. per yadi kisiki niyat hi bigad jaaey tow aur woh tedha chalne lage in suvidhaaoN ko lekar tow kya keejiyega? zindagi ke ek yeh bhee pahaloo hai.

    badhai surajji ko,ki wey in ghatnaaoN per bhee nazar rakhate haiN.sahityashilpi ka shukriya ki wey Hindi ko sahi mayanoN mein aage badha rahe hain, bina kisi taam jhaam ke aur shor sharabe ke.

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  6. मधु जी की बात से मैं सहमत हूँ। यह एक तरह का भ्रष्टाचार ही तो है। सूरज जी की कहानी नें गंभीर चोट की है। सूरज जी के पास दिव्यदृष्टि है।

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  7. बहुत अच्छी लघुकहानी है। सच्चाई भी है। बधाई।

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  8. प्रशंसनीय कहानी है। एसे दृष्टिकोण पर जहाँ निगाह कम जाती है।

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  9. सूरज जी नें लघुकथाओं की श्रंखला जो साहित्य शिल्पी पर प्रकाशित की है उसके लिये उन्हे धन्यवाद। बडी बात संक्षेप में कहने की कला है आपमें। यह कहानी सिक्के के उस पहलू को दिखाती है जो पलटा हुआ है।

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  10. बहुत सही चित्रण किया है आपने यथार्थ का.बहुत ही प्रभावी लघुकथा है.. सटीक व्यंग्य साधा आपने !

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  11. suraj ji

    jabardasht presentation .. maan gaye ji aapko , finally " you too brutas ne chaar chaand laga diye aapki rachna mein ..

    meri dil se badhai sweekaren..

    aapka

    vijay

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  12. लोग जैसे चलते हैं

    वैसा ही व्‍यंग्‍यकार कहते हैं
    सरकार सहती है

    सरकार रहती है

    असरदार या

    बेअसर

    जी सर।

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  13. लघुकथा में अच्छा व्यंग्य है।

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  14. हमारी तरफ एक बात कही जाती है कि एक मारूंगा उल्टे हाथ का... मतलब कि बहुत तेज गति से मारे जाने वाला थप्पड या चांटा... मुझे तो इस कहानी को पढकर बिलकुल ऐसा लगा कि सूरज प्रकाश जी ने व्यवस्था के मुंह पर मुल्टे हाथ का जड दिया है...

    छप गई दिल पर, इसे कहते हैं कहानी... जो एक बार पढी जाये और याद हो जाये, दुबार पढने की जरूरत न पडे बल्कि बार सुनाने का मन करे... मौका पडते ही कथाकार के ही अंदाज में कोई भी कहानी को किसी के भी आगे सुना डाले...

    उत्तम रचना के लिये अभिवादन और आभार स्वीकार करें...

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  15. अग्रज सूरजप्रकाश जी को जब भी पढ़ता हूँ ....... एक नयी सीख मिलती है. न्यूनतम शब्दों में बहुत बड़ी बात ..... व्यंग्यातिरेक और सबक भी दुरुपयोग करने वाले और उसे रोकने वाले दोनों को. प्रणाम

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  16. BHAI SURAJ PRAKASH JEE,
    AESA JADOO TO BADEE
    KATHA MEIN PAIDA NAHIN HOTA HAI.
    AAPKEE LAGHUKATHA DIL-O-DIMAAG
    PAR CHHAA GAYEE HAI.AB SAUNF,
    ILAAYCHEE AUR DAALCHINEE SE BANEE
    GARMAGARM CHAAYE KAA MAZAA AAYEGAA.

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  17. सुविधाओं का किस तरह से दुरूपयोग किया जाता है और मनुष्य की मानसिकता कहाँ तक जा सकती है इस पर कडा प्रहार करती रचना के लिए बधाई

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