है नमन उनको की जो यशकाय को अमरत्व देकर
इस जगत के शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं
है नमन उनको की जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये हैं
है नमन उस देहरी को जिस पर तुम खेले कन्हैया
घर तुम्हारे परम तप की राजधानी हो गये हैं
है नमन उनको की जिनके सामने बौना हिमालय ....

हमने भेजे हैं सिकन्दर सिर झुकाए मात खाऐ
हमसे भिडते हैं हैं वो जिनका मन धरा से भर गया है
नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी
सिंह के दांतों से गिनती सीखने वालों के आगे
शीश देने की कला में क्या गजब है क्या नया है
जूझना यमराज से आदत पुरानी है हमारी
उत्तरों की खोज में फिर एक नचिकेता गया है

है नमन उनको की जिनकी अग्नि से हारा प्रभंजन
काल कऔतुक जिनके आगे पानी पानी हो गये हैं
है नमन उनको की जिनके सामने बोना हिमालय
जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये हैं
लिख चुकी है विधि तुम्हारी वीरता के पुण्य लेखे
विजय के उदघोष, गीता के कथन तुमको नमन है
राखियों की प्रतीक्षा , सिन्दूरदानों की व्यथाऒं
देशहित प्रतिबद्ध यौवन कै सपन तुमको नमन है
बहन के विश्वास भाई के सखा कुल के सहारे
पिता के व्रत के फलित माँ के नयन तुमको नमन है

है नमन उनको की जिनको काल पाकर हुआ पावन
शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गये हैं
कंचनी तन, चन्दनी मन , आह, आँसू , प्यार ,सपने,
राष्ट्र के हित कर चले सब कुछ हवन तुमको नमन है
है नमन उनको की जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये
***** 

13 comments:

  1. कंचनी तन, चन्दनी मन , आह, आँसू , प्यार ,सपने,
    राष्ट्र के हित कर चले सब कुछ हवन तुमको नमन है
    है नमन उनको की जिनके सामने बौना हिमालय
    जो धरा पर गिर पडे पर आसमानी हो गये

    बहुत खूब। डॉ. साहब की इस मूड की रचना से पहली बार परिचय हुआ। बहुत गंभीर व उच्च कोटि की कविता है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ऐसे सोद्देश्‍य और अर्थपूर्ण गीत
    मंच पर जमते हैं तो
    फिर कवि मंच के सुखद
    भविष्‍य को दुख नहीं दे सकता कोई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. देशभक्ति से परिपूर्ण ओजस्वी कविता के लिए कुमार विश्वास जी को धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. Desh bhakti se aotprot aesi kavita
    Dr Kumar vishwas ki pahli baar padhne ko mili
    unka ye roop bahut pasand aaya

    उत्तर देंहटाएं
  5. डॉ कुमार विश्वास को पढ़ना और सुनना, दोनों ही अद्भुत है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. देशप्रेम से ओतप्रोत कविता को गणतंत्र दिवस के मौके पर पढना काफी अच्‍छा लगा....आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही बेहतरीन कविता.. कुमार भाई, महेंन्द्रगढ़ के कविसम्मेलन में आपसे सुनी भी थी.... बेहतरीन........ दुबई यात्रा के लिये अग्रिम शुभकामनाएं..

    उत्तर देंहटाएं
  8. हमने भेजे हैं सिकन्दर सिर झुकाए मात खाऐ
    हमसे भिडते हैं हैं वो जिनका मन धरा से भर गया है
    नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी
    सिंह के दांतों से गिनती सीखने वालों के आगे
    शीश देने की कला में क्या गजब है क्या नया है
    जूझना यमराज से आदत पुरानी है हमारी
    उत्तरों की खोज में फिर एक नचिकेता गया
    बहुत अच्छा लिखा है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. है नमन उनको की जो यशकाय को अमरत्व देकर
    इस जगत के शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं

    नमन मेरा भी।
    बहुत अच्छी कविता।

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  10. अच्छी रचना है डॉ. विश्वास। बधाई स्वीकार करें।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही अच्छी कविता लिखी है आपने डॉ. कुमार विश्वासजी इस कविता के लिए तह दिल से धन्यवाद् 👏

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही अच्छी कविता लिखी है आपने डॉ. कुमार विश्वासजी इस कविता के लिए तह दिल से धन्यवाद् 👏

    उत्तर देंहटाएं

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