समय ! धीरे धीरे चल ! [कविता] - लावण्या शाह
कितने हैं बाकी काम अभी,
कुछ तुझको भी है ध्यान ?
सब तुझसे बंध कर चलते हैं
उन्हें भी याद कर , नादान!
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
जो बिछडे साथी हैं उनका भी
कर लिहाज धर बाँह सभी,
भूखे, प्यासे मानव दल का,
बनना होगा विश्वास अभी -
ओ समय ! धीरे धीरे चल!
ना व्यर्थ गँवाना अपने को,
शोर शराबे भरी गलियों में,
जहाँ सिर्फ,खुमारी, रंगरेली हो,
क्या उनसे ही हो बात सभी ?
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
तेरे लिये, जलाये आशा दीप,
राह तकें राजा रंक, यही रीत!
तज पुरानी गाथाओं के इतिहास,
रच आज कोई नव शौर्यगान!
ओ समय ! धीरे धीरे चल!
इस पृथ्वी पट पर तू है,
भूत, भविष्य, का ज्ञाता,
सँवार रे, नये बरस को,
हो सुखमय, ये जग सारा!
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
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तेरे लिये, जलाये आशा दीप,
राह तकें राजा रंक, यही रीत!
तज पुरानी गाथाओं के इतिहास,
रच आज कोई नव शौर्यगान!
ओ समय ! धीरे धीरे चल!
सुन्दर कविता।
seema gupta says
इस पृथ्वी पट पर तू है,
भूत, भविष्य, का ज्ञाता,
सँवार रे, नये बरस को,
हो सुखमय, ये जग सारा!
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
" समय से धीरे चलने का बहुत सुंदर और भावनात्मक आह्वान ...."
Regards
अनिल कुमार says
आपकी कविता में एक ताजगी है। बहुत कम मिलती है यह आज की कविताओं में।
makrand says
इस पृथ्वी पट पर तू है,
भूत, भविष्य, का ज्ञाता,
सँवार रे, नये बरस को,
हो सुखमय, ये जग सारा!
ओ समय ! धीरे धीरे चल
bahut sunder rachana
शोभा says
तेरे लिये, जलाये आशा दीप,
राह तकें राजा रंक, यही रीत!
तज पुरानी गाथाओं के इतिहास,
रच आज कोई नव शौर्यगान!
ओ समय ! धीरे धीरे चल!
बहुत सुन्दर संदेश दिया है कविता में,किन्तु समय कहाँ रूकता है। उसकी अपनी गति है।
PRAN SHARMA says
SUNDER BHAVABHIVYAKTI HAI.
निधि अग्रवाल says
आपकी रचना पध कर जिस बात से सर्वाधिक प्रभावित होती हूँ वह है, भाषा। कहाँ खो गयी हैं एसी कवितायें। लावण्या जी आपकी कविताओं की प्रतीक्षा रहती है।
Udan Tashtari says
बहुत सुन्दर रचना है लावण्या जी की. आपका बहुत आभार इसे प्रस्तुत करने का.
संगीता पुरी says
सुदर रचना है....
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says
बहुत सुंदर रचना। लेकिन समय तो अपनी गति से चलता है। हम ही परिवर्तन की गति को तेज कर उस की गति धीमी कर सकते हैं।
महेंद्र मिश्रा says
बहुत सुंदर
महेंद्र मिश्रा says
बहुत सुंदर
श्रद्धा जैन says
ना व्यर्थ गँवाना अपने को,
शोर शराबे भरी गलियों में,
जहाँ सिर्फ,खुमारी, रंगरेली हो,
क्या उनसे ही हो बात सभी ?
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
bahut sunder kavita
राजीव तनेजा says
समय तो अपनी गति से ही चलता रहेगा...हमें ही अपने कदमों की चाल को तेज़ करना पड़ेगा....
सुन्दर कविता
Brijesh says
bahut sunder
didi ki kavitaaye kaafi dino baad padhne ko milti hai
brijesh sharma
Parul says
तेरे लिये, जलाये आशा दीप,
राह तकें राजा रंक, यही रीत!..bahut sahi baat DI
लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` says
साहित्य शिल्पी का बहुत बहुत आभार !
जो आप से सह्रदय~ स्नेही, पाठकोँ से,
इतनी सरलता से मिलना हो जाता है..
सभी को, "समय"
सुख, समृध्धि व स्वास्थ्य प्रदान करे
यही मेरी आशा है
-लावण्या
Harshad Jangla says
Very nice poem.
Liked it v much.
Thanx.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA
महावीर says
सुंदर भावाव्यक्ति है।
तेरे लिये, जलाये आशा दीप,
राह तकें राजा रंक, यही रीत!
तज पुरानी गाथाओं के इतिहास,
रच आज कोई नव शौर्यगान!
ओ समय ! धीरे धीरे चल!
अनूप शुक्ल says
सुन्दर कविता!
Vijay Kumar Sappatti says
lawanaya ji ,
bahut hi sundar kavita .. man ko chooti hui , aur ek naye ahsaas ke saath jeevan jine ke liye kahti hui kavita...
इस पृथ्वी पट पर तू है,
भूत, भविष्य, का ज्ञाता,
सँवार रे, नये बरस को,
हो सुखमय, ये जग सारा!
ओ समय ! धीरे धीरे चल !
wah ji wah .. meri dil se badhai sweekar karen ..
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन says
ओ समय! धीरे धीरे चल!
लावण्या जी की इस सुंदर कविता के लिए आपका धन्यवाद!