घटा से घिर गयी बदली, नज़र नहीं आती
बहा ले नीर तू उजली, नज़र नहीं आती

हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है
कहीं पे गिर गयी बिजली नज़र नहीं आती

है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

चमन में खार ने पहने, गुलों के चेहरे हैं
कली कोई कहाँ, कुचली नज़र नही आती

पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती
------

कवि परिचय:-
श्रद्धा जैन अंतर्जाल पर सक्रिय हैं तथा ग़ज़ल विधा में महत्वपूर्ण दख़ल रखती हैं।

आप शायर फैमिली डॉट् क़ॉम का संचालन भी कर रहीं हैं व इस माध्यम से देश-विदेश के स्थापित व नवीन शायरों एवं कवियों को आपने मंच प्रदान किया है। वर्तमान में आप सिंगापुर में अवस्थित हैं व एक अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय में हिन्दी सेवा में रत हैं। 

40 comments:

  1. पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती

    -वाह वाह!! बहुत सुन्दर गज़ल. हर शेर पूरी बात कह रहा है. बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  2. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    बहुत अच्छी ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  3. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती

    सभी शेर अच्छे हैं। श्रद्धा जी बधाई आपको।

    उत्तर देंहटाएं
  4. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    ज़माने की सच्चाईयों को उजागर करती आपकी गज़ल बहुत पसन्द आई...


    बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  5. श्रधा जी नमस्कार,
    आपकी गज़लें तो मेरी पसंदीदा रही है हमेशा से जब से मैं ब्लॉग पे आया हूँ ,आपको पढ़ना हमेशा से मुझे अच्छा लगता है ,बहोत ही उम्दा ग़ज़ल लिखी है आपने ,.. एक शंका है मिस्र सानी में उजली किसको संबोधित किया है आपने कहीं आंसू को तो नही .... .. बहोत ही खुबसूरत ग़ज़ल है ... ढेरो बधाई आपको ..

    अर्श

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह वाह बहुत खूब!

    हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है
    कहीं पे गिर गयी बिजली नज़र नहीं आती

    बहुत उम्दा गजल के लिये बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  7. sharddha ji ,namaskar ..
    aapki gazal ki kya tareef karun..

    है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती..

    kya likha hai .. wah ji wah..
    badhai .

    aap yun ki likhte rahe .. aur hamne padhate rahe..

    badhai

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह बहुत खूब लिखी है गज़ल। हर शेर अच्छा है।

    पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती
    बहुत उम्दा।
    बस एक कमी महसूस होती है कि आप जल्दी जल्दी अपनी गज़ल लेकर नही आती।

    उत्तर देंहटाएं
  9. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    आपने बहुत सुंदर लिखा है , दिखावे की दुनिया में खरा कैसे मिले ?

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत खूब दीदी ......
    सारे शेर बेहतरीन हैं,विशेषकर
    है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    बधाई स्वीकारें।

    -विश्व दीपक

    उत्तर देंहटाएं
  11. SHRDDHA JEE,DUA KO ASLEE KARKE
    DIKHAAEEYE.AAPSE BAHUT AASHAAYEN
    HAIN.BAHUT KHOOB KAHTEE AAP ASHAAR.
    BADHAAEE.

    उत्तर देंहटाएं
  12. पंकज सक्सेना3 फ़रवरी 2009 को 4:39 pm

    वाह, हर शेर पर दाद.....

    उत्तर देंहटाएं
  13. चमन में खार ने पहने, गुलों के चेहरे हैं
    कली कोई कहाँ, कुचली नज़र नही आती

    पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती
    बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  14. पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती

    बहुत गहरे ले गयीं आप।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति...........
    पूरी की पूरी ग़ज़ल और एक एक शेर खिला हुवा है

    उत्तर देंहटाएं
  16. VAH .... KAMMAL KAA LEKHAN HAI AAPKAA SHRADDHA JI ....... SHUBHKAMANAYEN....

    उत्तर देंहटाएं
  17. पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती

    ye sher khas pasand aaya .

    उत्तर देंहटाएं
  18. श्रध्धा दीदी जी
    हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है.....
    कहीं पे गिर गयी बिजली नज़र नहीं आती
    बहुत ही उम्दा पंक्तियाँ आभार
    आपका भाई .

    उत्तर देंहटाएं
  19. पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती


    बहुत सुन्दर ....

    सभी अच्छे शेर....

    श्रद्धा जी,
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  20. Ati sundar...

    Peer hai jo basi dil ke bheetar insaan,
    Pighlegi kaise bata zara tu to hame,

    Cheer kaleja bah jaayegi wo jis din,
    Dil ban dariya fat jaayega us din...

    उत्तर देंहटाएं
  21. हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है
    कहीं पे गिर गयी बिजली नज़र नहीं आती

    बहुत ही उम्दा.. बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  22. आपकी इस बेहद खूबसूरत ग़ज़ल ले लिये दाद क़ुबूल करें।
    बेशक , आपकी आमद जल्दी जल्दी हो ,तो अच्छा।
    प्रवीण पंडित

    उत्तर देंहटाएं
  23. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    bahut badhiya likha hai aapne.....

    उत्तर देंहटाएं
  24. बेहतरीन शेरों से सजी गजल के लिये श्रद्धा जी बधाई की पात्र हैं

    उत्तर देंहटाएं
  25. पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती
    " what a touching expressions....specially these lines...liked it"

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  27. घटा से घिर गयी बदली, नज़र नहीं आती
    बहा ले नीर तू उजली, नज़र नहीं आती
    Kya matla hai bahut khoob

    हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है
    कहीं पे गिर गयी बिजली नज़र नहीं आती
    hmmm achcha tabsara hai

    है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती
    hmmmm kya baat hai kya jayeza hai asliyat ka

    चमन में खार ने पहने, गुलों के चेहरे हैं
    कली कोई कहाँ, कुचली नज़र नही आती
    ahhhaa sabse umda sher hai

    पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
    ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नही आती
    Hmmmm achcha hai sare sher hi kamaal kahe hain ji

    Khush rahiye....


    http://nadeemahmedkavish.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  28. Vyatha man ki nazar aaye wo fir kaisee vyatha...
    Pighal jatee jamin par daag jalne ka nazar aata kahan...
    kabhee takraye badlee kaundhtee jab aag aasman men....
    Jala kya kya bacha ye kisko kab pata hai...

    उत्तर देंहटाएं
  29. Namskaar Arsh ji
    Ujli shabad badli ke liye use kiya gaya hai
    wahi ghata mein ghirne ke baad kali kali nazar aati hai.


    aapka senh bhaut housla badhata hai
    isi tarah senh banaye rakhe

    उत्तर देंहटाएं
  30. Aadarney pran ji
    charan sparsh,
    Meri koshish hai aapki umeedon par khari utun aur aapke vishwas ko banaye rakhun

    aap saya bargad ke samaan hai jiske neeche meri sari shankaye aur takleefen panaah paati hai

    bahut bahut aabhari
    Shrddha

    उत्तर देंहटाएं
  31. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

    bhut khoob SHARDA JI. bhut hi achi kavita haI yeh aapki... har line meaningful..
    aur ajkl really mai man se dua nhi karta.. sab dikahwa karte hai..
    AAPKO BADHAI............... NEER

    उत्तर देंहटाएं
  32. Namskaar praveen ji aur sushil ji,

    koshish karungi ki jaldi jaldi aa sakun
    kabhi busy ho jane ke karan kabhi khyaalon ko shabd na milne ke karan der ho jaati hai

    aapka senh hamesha pane ka bhrosa hai
    krpiya saath banaye rakhe

    उत्तर देंहटाएं
  33. namaste shraddha ji
    wah maan gaye ustad
    bahut khoob aap to bahut pahunchi huyi nikli ji .
    aap aise hi tarakki karti rahe dinodin aap unnati ke shikhar ko chuyain yahi dil se kamna he !!!!!
    bahut umda gajal he thnx bharat ka nam roshan karne ke liye ham dil se aapke shukragujar hain

    उत्तर देंहटाएं
  34. wqah sridha ji
    .......duniya mai fail rehe dikhave per aapne acha vyang kiya hai......aur sabdo ki visvasniyta ke liye aapki chinta muje aakarshit kar gayi.....bahut pahle ajeyaji ne ye abhiyaan cheda tha.....aaj uska parinaaam gali mohalla mai...desh videsh mai dikhai de raha hai.....aapki gazal prabhavit kar gayi.,......rakesh

    उत्तर देंहटाएं
  35. है चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारों
    दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती


    bahut hi achhi rachna

    sahitya ke yagya me sarthak ahuti
    sughadit bhav kese hote hain apki rachan batati hain

    उत्तर देंहटाएं

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