मेरे सपने मुझे सोने नहीं देते
कभी रात की चादर पर पड़ी
सलवटों से चुभते हैं
तो कभी दिन के आसमां से
जलती धूप से बरसते हैं

मैं अकसर रातों में उठकर
उन सलवटों को हटाता हूँ
और भरी दोपहर
काला चश्मा पहनकर निकलता हूँ।
यदि रात एक करवट में निकाल भी लूँ
तो पीठ का दर्द बनकर दिनभर सताते हैं
चश्मे से आँखें तो बचा ली
लेकिन बालों में चाँदी से चमचमाते हैं।

एक छोटी कैंची से
बालों में उग आए सपनों को काटता हूँ
और आइने के सामने फिर जवाँ हो जाता हूँ
पीठ का दर्द तो किसी को दिखाई नहीं देता
सो अकेले ही सहन कर जाता हूँ

मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
नींद की गोलियों से उन्हें भगाता हूँ
वो जब तक चले नहीं जाते
तब तक सोने का स्वाँग रचाता हूँ

वो जाते भी कहाँ हैं
कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
और जब दुनिया से दूर
खुद को तन्हा पाता हूँ
तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।

रचनाकार परिचय:-


शैफाली 'नायिका' माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक हैं। आपनें वेबदुनिया डॉट कॉम में तीन वर्षों तक उप-सम्पादक के पद पर कार्य किया है।

आपने आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के विभिन्न कार्यक्रमों में संचालन भी किया है।

23 comments:

  1. यदि रात एक करवट में निकाल भी लूँ
    तो पीठ का दर्द बनकर दिनभर सताते हैं
    चश्मे से आँखें तो बचा ली
    लेकिन बालों में चाँदी से चमचमाते हैं।

    आपके उपमान नये व अनूठे हैं। आपको पहली बार पढा। आपकी अन्य रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पंकज सक्सेना6 फ़रवरी 2009 को 1:44 pm

    वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।

    सुन्दर अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. vo jaate bhi kahan hain kabhi draj me purane khat ki tarah fadfadate hain--bahut badiya abhivyakti hai

    उत्तर देंहटाएं
  4. वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।
    .....Sundar Abhivyakti !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. shefali ji

    most expressive style of words for emotions of heart.

    वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।

    I must say .. that aapki rachana me bahut behtreen ehsaas hai .
    badhai

    उत्तर देंहटाएं
  6. After sucha long time i read a poem that actually touched me in some way.

    I really could't stop my self from giving comment after such a long time.

    Keep It up
    -----------------Anupama

    उत्तर देंहटाएं
  7. एक छोटी कैंची से
    बालों में उग आए सपनों को काटता हूँ
    और आइने के सामने फिर जवाँ हो जाता हूँ
    पीठ का दर्द तो किसी को दिखाई नहीं देता
    सो अकेले ही सहन कर जाता हूँ



    सुन्दर अभिव्यक्ति.....

    बधाई....

    उत्तर देंहटाएं
  8. शेफाली जी,

    आपकी कविता आपके बिम्बों के कारण उत्कृष्ट कोटि की बन पडी है। नयी कविता में काव्यात्मकता केवल सटीक बिम्बों से ही संभव है और यह शर्त आपने पूरी की है। आपको बधाई।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सारे नये बिंब देखने को मिले। आपको पढना सुखद रहा। आपकी अगली रचनाओं का इंतज़ार रहेगा।

    -विश्व दीपक

    उत्तर देंहटाएं
  10. वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।

    खूब कहा है आपने। मेरी बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  11. अच्छा लगा पढ़कर, अभिव्यक्ति और प्रस्तुति दोनों सुंदर है !

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह ! लाजवाब.....क्या बात कही आपने !!! सुंदर कविता.....

    उत्तर देंहटाएं
  13. लाजवाब कविता उतनीही बढ़िया भवभिब्यक्ति ... आपको ढेरो बधाई ..


    अर्श

    उत्तर देंहटाएं
  14. वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।
    sunder kavita
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  15. वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं


    bahut bahut ghare bhaav

    उत्तर देंहटाएं
  16. वो जाते भी कहाँ हैं
    कभी दराज़ में पुराने ख़त की तरह फड़फड़ाते हैं
    तो कभी तकिए को गीला कर जाते हैं
    और जब दुनिया से दूर
    खुद को तन्हा पाता हूँ
    तो मेरे सपने जो मुझे सोने नहीं देते
    उन्हें अपने सिरहाने रखकर सो जाता हूँ।

    बढिया.....बहुत ही बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  17. ये ब्‍लॉग मुझे सोने नहीं देते
    लिखने नहीं देते
    सिर्फ पढ़ता रहता हूं
    टिप्‍पणियां करता रहता हूं
    ये ब्‍लॉग मुझे होने नहीं देते
    कि मैं सब से जुड़ सकूं
    नेट से कटूं और लिखने से जुडूं
    सपना नहीं सच है यह
    ये ब्‍लॉग मुझे सोने नहीं देते।

    उत्तर देंहटाएं
  18. ati sundar,jo bhaw/dard/udgaaro ko aapane apani lekhani k madhyam se kagaj mai utara hai,usake liye aapako hardik dhanywad, ma sarswati aapake lekhani ko aur bhi shakti de,taki aapaki kalam logo k dard ko kam karane mai sahayak siddh ho, iti ....ek baar punah aapko mera naman

    उत्तर देंहटाएं
  19. bahut sundar bhavpoorn kavita. sapne dard bhee ban jaate hai aur kabhi aansoo. khoob kaha. badhai.

    उत्तर देंहटाएं

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