उपरांत [लघु कथा] - सुधा ओम ढींगरा

होली का हुड़दंग समाप्त हुआ। सड़कों, बगीचों --वातावरण में रंग ही रंग बिखरे पड़े थे। रंगों से विभोर भावनाएं भी दिनचर्या की ओर मुड़ गई थीं।...

मीनाकुमारी : अभिनेत्री और शायरा [पुण्यतिथि पर विशेष] - अजय यादव

मीनाकुमारी का नाम किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। इस हसीन अदाकारा ने अपनी बेमिसाल अदायगी के दम पर लोगों के दिल में जो जगह बनायी, वो बहुत...

स्टेच्यु [कविता] - उपासना अरोरा

मेरे ज़हन में कई पोशीदा से पल रहते हैं, यहाँ न दिन होता है न रात. वक्त अपनी नाव को खूंटे से साहिल पे बाँध के भूल जाता है. लहरें आती तो ...

तकतीअ और बहर [ग़ज़ल : शिल्प और संरचना] - सतपाल 'ख्याल'

बहर की यदि बात करें तो फ़ारसी के ये भारी भरकम शब्द जैसे फ़ाइलातुन, मसतफ़ाइलुन या तमाम बहरों के नाम आप को याद करने की ज़रूरत नही है। ये ...

हम और तालिबान [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

रचनाकार परिचय:- अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों...

वह बक बक पंडित बिहारी था [कहानी] - विश्वदीपक 'तनहा'

४ सितम्बर १९८७ सीकर राजस्थान -पिताजी! सारा सामान मैने रख दिया है। -अच्छा! और हाँ, वो भगवान महावीर की तस्वीर भी रख लेना साथ में। रास्त...

उपर वाला फल देगा [ग़ज़ल] - दीपक गुप्ता

रचनाकार परिचय:- दीपक गुप्ता का जन्म 15 मार्च 1972 को दिल्ली में हुआ। आप दिल्ली विश्वविद्यालय से कला में स्नातक हैं। आपकी प्रक...

कामरेड की शादी और प्यार [व्यंग्य] - आलोक पुराणिक

कामरेड नाराज थे, नान-कामरेड साथी को बोल दिया-अब हनीमून खत्म। नान-कामरेड साथी का जवाब था-हू केयर्स, गेट लौस्ट। कामरेड को इस जवाब की उम्मीद ...

कोई साथ न सही [कविता] - अजय कुमार

फूल ही फूल हों बहारों का साथ हो नजारे हों साथ कोई साथ न सही.. स्थल हो मनोरम निश्चल, जलधार हो कल कल जैसे पायल की झनकार हो कोई साथ न...

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