फूल ही फूल हों
बहारों का साथ हो
नजारे हों साथ
कोई साथ न सही..

स्थल हो मनोरम निश्चल,
जलधार हो कल कल
जैसे पायल की झनकार हो
कोई साथ न सही..

हिम से ढ़्का शिखर हो
बादल का गहन नगर हो
नीरवता करती हो बातें
कोई साथ न सही..

हरी-भरी बगिया हो
पक्षियों का कलरव हो
जैसे बजता सितार
कोई साथ न सही..

खो जाना चाहता हूँ
सो जाना चाहता हूँ
आँचल हो प्रकृति का
कोई साथ न सही..
***** 

16 comments:

  1. प्रकृति विषयक अच्छी कविता है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सून्दर सार्थक प्रयास। बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. ........
    पक्षियों का कलरव हो
    जैसे बजता सितार
    कोई साथ न सही..

    खो जाना चाहता हूँ
    सो जाना चाहता हूँ
    आँचल हो प्रकृति का
    कोई साथ न सही..

    ...........पृकति की ओर मानव का अद्वैत तो नैसर्गिक है ... सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  4. हिम से ढ़्का शिखर हो
    बादल का गहन नगर हो
    नीरवता करती हो बातें
    कोई साथ न सही..

    हरी-भरी बगिया हो
    पक्षियों का कलरव हो
    जैसे बजता सितार
    कोई साथ न सही..
    इतना कुछ तो माँग लिया और क्या चाहिए ? ः)

    उत्तर देंहटाएं
  5. खो जाना चाहता हूँ
    सो जाना चाहता हूँ
    आँचल हो प्रकृति का
    कोई साथ न सही..

    वाह अच्छा है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. हरी-भरी बगिया हो
    पक्षियों का कलरव हो
    जैसे बजता सितार
    कोई साथ न सही..

    सुन्दर रचना.........प्रकृति से खेलती हुयी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  7. ajay ji ...

    bahut khoobsorat kaha hai...
    prakriti ke saath yu anubhav hota hai ki man ko ek khmosh man ka saath mil gaya ho....

    खो जाना चाहता हूँ
    सो जाना चाहता हूँ
    आँचल हो प्रकृति का
    कोई साथ न सही

    उत्तर देंहटाएं
  8. excellent Ajay Jee,This is the start,long way to go.....AWADH

    उत्तर देंहटाएं
  9. Hi Ajay ji,

    Thats really great....

    Heep it up.

    Amit.

    उत्तर देंहटाएं
  10. Ooooppsssssss.....Sorry for spamming........

    Thats not "Heep it up"

    Its "KEEP IT UP"

    Amit.

    उत्तर देंहटाएं
  11. अजय की कविता प्रकृति प्रेम से ओ़त प्रोत है| शायद अजय को प्रकृति को अकेले निहारना ज्यादा पसंद है, इसी लिए 'कोई साथ नहीं' उनकी कविता का शीर्षक और प्राण है|
    कविता (poetry) की एक व्याख्या मुझे बहुत याद आती है, जो विलियम कार्लोस विलियम्स ने दी थी...
    A poem is a small (or large) machine made of words. When I say there’s nothing sentimental about a poem I mean that there can be no part, as in any other machine, that is redundant.

    कविता लिखना मुझे भी बहुत भाता है, मेरी कुछ रचनाएँ यहाँ मौजूद है|

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget