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रचनाकार परिचय:-


नीरज गोस्वामी का जन्म 14 अगस्त 1950 को जम्मू में हुआ। इंजिनियरिंग स्नातक नीरज जी लगभग 30 वर्षों के कार्यानुभव के साथ वर्तमान में भूषण स्टील मुम्बई में असिसटैंट वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
बचपन से ही साहित्य पठन में इनकी रुचि रही है। अनेक जालघरों में इनकी रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त इन्होंने अनेक नाटकों में काम किया और पुरुस्कार जीते हैं।

मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं
वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं

मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं

यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं

पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

मिलेगी ही नही थोड़ी जगह, दिल में कभी उनके
तिजोरी है भरी जिनकी, जो झूटी शान रखते हैं

उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया
जो भारी भीड़ में अपनी, अलग पहचान रखते हैं

गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं

बहारों के ही हम आशिक नहीं, ये जान लो 'नीरज'
खिजाओं के लिये दिल में, बहुत सम्मान रखते हैं

36 comments:

  1. मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं
    वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं

    पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
    जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

    गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
    चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं

    ग़ज़ल सीधी दिल में उतर गयी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं
    वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं ....
    ग़ज़ल के आगाज़-ओ-उनवान काफी उम्दा रहे .. कुछ शे'रों में एक सन्देश भी है जो शायर के जीवन दर्शन को उजागर करता है |कुल मिला कर एक हल्की फुल्की , सराहनीय ग़ज़ल |

    उत्तर देंहटाएं
  3. मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं

    यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
    जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं
    neeraj ji bahut hi umda ashaar hain ye, behtareen ghazal naye shabdon ke anoothe pryog, daad ke saath
    khyaal

    उत्तर देंहटाएं
  4. खूब कही आपनें।
    गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
    चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  5. यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
    जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं
    is hse'r ne dil jeet liya. bahut hi anutha , sundar aur naveen

    उत्तर देंहटाएं
  6. पंकज सक्सेना4 मार्च 2009 को 1:34 pm

    हर शेर पर वाह निकलती है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. भाई जवाब नहीं है नीरज साहब का. हर शेर लाजवाब.

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  8. Bhai Rajiv

    Jab pehli baar aap ke ghar mein baith kar aapki ghazleiN suni theeN, ussee din mehsoos ho gaya thaa ki ek ustaad shayar se mukhatib hain. Ye achha hai ki aap hamara dhyan nahin rakhtey hain, Iss liye hamara nishaana chook jaata hai (Yani ki Mumbai aa kar bhee mulaqaat nahin kar paatey hain).

    Badhaai

    Tejendra Sharma

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह जी वाह हर शेर लाजवाब। बहुत उम्दा नीरज जी।

    उत्तर देंहटाएं
  10. आदरणीय नीरज भाई साहब

    बहुत ही कामयाब और ख़ूबरसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत-बहुत बधाई

    और हाँ यह य़ह फ़क़ीराना अंदाज़ तो ... सुभान-अल्लाह...

    मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं

    सारी ग़ज़ल ही पवित्र दिल से निकली हुई
    पवित्र दुआ जैसी है

    उत्तर देंहटाएं
  11. नीरज जी,
    सुन्दर सहज शब्दों में गहरी बातें कह गये आप अपनी इस गजल के माध्यम से... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. बेहद खूबसूरत ग़ज़ल...

    नीरज जी की इस ग़ज़ल से किसी एक शेर को चुनना गुस्ताखी होगी क्योंकि सभी शेर लाजवाब हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह्! बहुत ही उम्दा........हर शेर लाजवाब

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  14. Neeraj Goswami ek ubharte hue
    gazalkaar hain.Unhone bahut saaree
    achchhee gazalen kahee hai jinmein
    ek gazal yah bhee hai.Behtreen
    gazal ke liye Neeraj Sahib ko
    naanaa badhaaeeyan

    उत्तर देंहटाएं
  15. यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
    जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं
    नीरज जी आपने हमें अपना कायल बना लिया।

    उत्तर देंहटाएं
  16. आदरणीय नीरज जी,


    आपकी अनेकों गज़लें पढने का सौभाग्य प्राप्त है, अंतर्जाल पर आपकी सक्रियता व स्तरीय साहित्य से इस माध्यम को संपन्न करने का कार्य स्तुत्य है।..। इस गज़ल की बात ही अलग है। हर शेर डुबो जाता है, हर शेर का अपना ही अंदाज है।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    उत्तर देंहटाएं
  17. हर शेर पढ़ने के बाद बस यही मुंह से निकला- वाह, वाह ,वाह ।

    उत्तर देंहटाएं
  18. नीरजजी,
    आपकी गज़ल बहुत ही शानदार है।
    बधाई।

    मधु

    उत्तर देंहटाएं
  19. नीरज जी के गज़ल्गोई के क्या कहने ...मुरीद हूँ जब से पढ़ रहा हूँ उनको... सबसे बड़ी बात के वो आम्बोल्चाल के भाषा में लिखते है जो आम जनता तक सरलता से पहुँच जाती है ... सलाम इनकी लेखनी को...

    अर्श

    उत्तर देंहटाएं
  20. क्या बात है... नीरज जी, मज़ा आ गया... बेहतरीन शेर निकालें हैं आपने... बधाई.. बहुत बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  21. खूबसूरत गज़ल!

    यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
    जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं

    उपरोक्त शेर में "लोबान" का प्रयोग अनूठा एवं प्रशंसनीय है।
    बधाई स्वीकारें।
    -विश्व दीपक

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  22. नीरज जी,

    हर शेर बहुत उम्दा....

    बधाई स्वीकारें...

    उत्तर देंहटाएं
  23. वाह ! ग़ज़ल का एक-एक शे'र दिल में उतरता चला गया। नीरर भाई बहुत खूब ग़ज़ल लिखी है आपने। बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  24. पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
    जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

    मिलेगी ही नही थोड़ी जगह, दिल में कभी उनके
    तिजोरी है भरी जिनकी, जो झूटी शान रखते हैं
    wah bahut sundar likha hai.

    उत्तर देंहटाएं
  25. नीरज जी
    एक निहायत ख़ूबसूरत ग़ज़ल दी है आपने। हर शे'र में भाव, शब्द नगीनों की तरह जड़े हुए हैं।

    उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया
    जो भारी भीड़ में अपनी, अलग पहचान रखते हैं

    मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं
    बहुत प्रभावशाली सशक्त ग़ज़ल है।
    महावीर शर्मा

    उत्तर देंहटाएं
  26. नीरज भाई की गज़लेँ
    सदा चाव से पढी हैँ
    और उनकी विनम्रता
    और साफ दिल की झलक ना
    सिर्फ उनके लेखन मेँ देखी
    परँतु व्यवहार मेँ भी
    अन्य साथीयोँ के साथ
    देखने मेँ आई है -
    बहुत शुभकामनाओँ के साथ,
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  27. उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया
    जो भारी भीड़ में अपनी, अलग पहचान रखते हैं
    bahut sahii kehaa

    achcha to aap hamesha hii likhtey haen

    उत्तर देंहटाएं
  28. नीरज जी की किसी भी रचना पर टिप्‍पणी करना बहुत असमंजस भरा होता है कि किस शेर को अच्‍छा कहें और किसे न कहें । वो जैसे बर्मन दादा की फिल्‍मों का संगीत होता था न कि आप छांट के बताओ फिल्‍म अभिमान का एक सर्वश्रेष्‍ट गीत आप निकाल के बताओ ज्‍वैल थीफ या गाइड का सर्वश्रेष्‍ठ गीत । जैसे ही आप एक को पसंद करेंगें तो तुरंत लगेगा कि नहीं यार इससे अच्‍छा तो ये वाला है । नीरज जी और बर्मन दादा में ये ही समानता है कि बर्मन दादा अपने हर गीता को पूरी शिद्दत से बनाते थे उस पर काम करते थे । उनकी फिलम का कोई भी गीत काम चलाऊ नहीं होता था । वैसे ही नीरज जी अपने हर शेर को पूरी मेहनत से तराशते हैं वे कभी भी भर्ती के शेर नहीं रखते हैं । उनकी ग़ज़ल बर्मन दादा के संगीत की तरह होती है कोई शेर चंदा है तू मेरा सूरज है तू की तरह ममत्‍व से भरा होता है तो उसी फिलम का कोई गीत रूप तेरा मस्‍ताना की तरह सेंसुअस होता है । इसीलिये मुझे नीरज जी की ग़ज़लें बर्मन दादा की याद दिलाती हैं । व्‍यक्तिगत रूप से भी नीरज जी उतने ही अच्‍छे इंसान हैं जितनी अच्‍छी उनकी ग़ज़लें होती हैं । और इस बात से ये बात भी सिद्ध होती है कि जो अच्‍छा इंसान होता है वही अच्‍छा कवि हो सकता है । नीरज जी की ग़ज़लों में निर्मल आनंद का तत्‍व भरपूर होता है । वे जी कर ग़ज़लों को लिखते हैं । वे आनंद के लिये ग़ज़लों को लिखते हैं ।
    मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं
    ये शेर उन्‍होंने किसी और के लिये नहीं बल्कि अपने ही लिये लिखा है । इसके अलावा वे अपनी पोटली में दूसरों के लिये खुशी भी रखते हैं सांताक्‍लास की तरह । मैं तो उनकी ग़ज़लों की उसी प्रकार प्रतीक्षा करता हूं जिस प्रकार बच्‍चे क्रिसमस पर उपहारों के लिये सांताक्‍लास की करते हैं । आज मुझे सांताक्‍लास साहित्‍य शिल्‍पी के चौराहे पर मिला उसके लिये साहित्‍य शिल्‍पी का आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  29. अब इतने सारे गुरूजनों के इन मुल्यवान शब्दों के बाद नीरज जी की गज़लों पर मुझ जैसे अदनों का कुछ कहना तो सूरज पर टार्च मारने जैसा होगा...

    नीरज जी के और उनकी गज़लों के हम अनन्य भक्त हैं

    उत्तर देंहटाएं
  30. मित्रों कभी आपने पर्वत को राई की प्रशंशा करते देखा सुना है? कम से कम मैंने तो नहीं...आज यहाँ मेरे तीनो गुरु आदरणीय प्राण साहेब, पंकज सुबीर जी और द्विज जी ने मेरे और मेरी ग़ज़ल के बारे जो कुछ कहा है मेरे लिए वो भगवान् के प्रसाद से कम नहीं...ये पर्वत द्वारा राई की प्रशंशा ही है...
    मैं जो कुछ भी टूटा फूटा लिखता हूँ उसमें इन्हीं गुनी जनों का परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हाथ है...इन्होने ने ही मुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया है...इनकी मेरे लिए बजती तालियाँ वैसी हैं जैसे हर माँ बाप अपने बच्चे को पहला कदम रखते हुए देख कर बजाता है... इनका और आप सब पाठकों का आशीर्वाद मुझ पर यूँ ही बना रहे इश्वर से येही एक मात्र प्रार्थना है....

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  31. मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं
    वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं

    पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
    जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

    गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
    चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं

    बेहतरीन गजल है नीरज जी साभार आपका

    उत्तर देंहटाएं
  32. Aadarneey Neeraj ji
    sadar namskaar,
    Aapko to pata hi hai main hamesha se hi aapki fan rahi hoon tab se jab se mujhe gazal kya hai nahi pata tha

    मजे की बात है जिनका, हमेशा ध्यान रखते हैं
    वोही अपने निशाने पर, हमारी जान रखते हैं
    wah kya baat hai

    मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं
    bhaut khoob

    यही सच्ची वजह है, मेरे तन मन के महकने की
    जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं

    bahut khoob
    lobaan kya kafiya hai

    पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
    जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

    bhaut sunder
    zindgi ki sachhayi

    मिलेगी ही नही थोड़ी जगह, दिल में कभी उनके
    तिजोरी है भरी जिनकी, जो झूटी शान रखते हैं

    उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया
    जो भारी भीड़ में अपनी, अलग पहचान रखते हैं
    kya baat hai kamaal

    गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
    चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं

    बहारों के ही हम आशिक नहीं, ये जान लो 'नीरज'
    खिजाओं के लिये दिल में, बहुत सम्मान रखते हैं

    kya baat hai kya baat hai

    उत्तर देंहटाएं
  33. गुलाबों से मुहब्बत है जिसे, उसको ख़बर कर दो
    चुभा करते वो कांटे भी, बहुत अरमान रखते हैं


    BAHUT BADIYA

    उत्तर देंहटाएं
  34. aadarniya neeraj ji

    deri ke liye maafi chahta hoon ..

    ab main tareef bhi karun to kya likhu , sab to pahle hi likha ja chuka hai ..

    phir bhi ,ek baat : jai ho ,aapki gazal ki jai ho ....

    पथिक पाते वही मंजिल, भले हों खार राहों में
    जो तीखे दर्द में लब पर, मधुर मुस्कान रखते हैं

    mujhe ye sabse behtar lagi ..


    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  35. neeraj bhai sahab ki shakhsiyat ka jaadu hi unki is ghazal main sir chadh kar bola hai. bahut bahut badhai.
    मुहब्बत, फूल, खुशियाँ,पोटली भर के दुआओं की
    सदा हम साथ में अपने, यही सामान रखते हैं
    is sher ka koi kya tod ho sakta hai bhala.

    navneet sharma

    उत्तर देंहटाएं

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