साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-
मूलतः फरीदाबाद, हरियाणा के निवासी दिगंबर नासवा को स्कूल, कौलेज के ज़माने से लिखने का शौक है जे अब तक बना हुआ है।

आप पेशे से चार्टेड एकाउंटेंट हैं और वर्तमान में दुबई स्थित एक कंपनी में C.F.O. के पद पर विगत ७ वर्षों से कार्यरत हैं।

पिछले कुछ वर्षों से अपने ब्लॉग "स्वप्न मेरे" पर लिखते आ रहे हैं।

झूठ की मुस्कान होठों पर सज़ा लें
सच के आँसू आँख में अपनी दबा लें

चाहते हैं पूजना जो देवता को
जो गये हैं रूठ वो बच्चे मना लें

छेद कोई हो गया है चाँद में
चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें

रौशनी को फैलने दें दूर तलक
आप चेहरे से ज़रा पर्दा हटा लें

रेत पर लिखा हुवा है नाम उनका
आँधियों से उन के शहर का पता लें

कृष्ण आयेंगे तुम्हारे सखा बन कर
पार्थ इस गांडीव को फिर से सजा लें

आत्मा मिल जायेगी परमात्मा से
बांसुरी की तान को मन में बसा लें

नेवला और सांप मिल कर रह सकें
इस तरह से आज घर अपना बना लें

है उसी की भैंस फिर जिसकी है लाठी
चल रही है आज तो अपनी चला लें

17 comments:

  1. वाह वाह!! दिगम्बर, आप तो छा गये:

    छेद कोई हो गया है चाँद में
    चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें

    -क्या कहने!! बहुत खूब!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सिन्दर ग़ज़ल है..

    कृष्ण आयेंगे तुम्हारे सखा बन कर
    पार्थ इस गांडीव को फिर से सजा लें

    आत्मा मिल जायेगी परमात्मा से
    बांसुरी की तान को मन में बसा लें

    उत्तर देंहटाएं
  3. चाहते हैं पूजना जो देवता को
    जो गये हैं रूठ वो बच्चे मना लें
    वाह वाह

    उत्तर देंहटाएं
  4. चाहते हैं पूजना जो देवता को
    जो गये हैं रूठ वो बच्चे मना लें
    sach me bachcho me bhagvaan hota hai , bahut hi sundar bhaav... seema sachdev

    उत्तर देंहटाएं
  5. छेद कोई हो गया है चाँद में
    चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें

    बहुत बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  6. गजब लिखा है ... बहुत बहुत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. चाहते हैं पूजना जो देवता को
    जो गये हैं रूठ वो बच्चे मना लें

    भई वाह्! दिगम्बर जी, आज तो आपने कमाल ही कर दिया......बहुत ही सुन्दर भाव

    उत्तर देंहटाएं
  8. नेवला और सांप मिल कर रह सकें
    इस तरह से आज घर अपना बना लें

    है उसी की भैंस फिर जिसकी है लाठी
    चल रही है आज तो अपनी चला लें

    वाह दिगम्बर नासवा जी अति सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  9. आकर्षक उपमान लिए कविता..

    छेद कोई हो गया है चाँद में
    चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें
    नेवला और सांप मिल कर रह सकें
    इस तरह से आज घर अपना बना लें

    उत्तर देंहटाएं
  10. रेत पर लिखा हुवा है नाम उनका
    आँधियों से उन के शहर का पता लें

    बहुत खूब ...बहुत सुन्दर बढ़िया लगी आपकी यह गजल

    उत्तर देंहटाएं
  11. आकर्षक उपमान लिए कविता..

    छेद कोई हो गया है चाँद में
    चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें
    नेवला और सांप मिल कर रह सकें
    इस तरह से आज घर अपना बना लें

    उत्तर देंहटाएं
  12. नेवला और सांप मिल कर रह सकें
    इस तरह से आज घर अपना बना लें...
    अतीव सुंदर .

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत खूबसूरत रचना! एक-दो शेर छाँटना शायद बाकियों को कमतर साबित करेगा जो उचित न होगा।
    दिगम्बर जी! आपने और भी पढ़ने की तमन्ना जगा दी है :)

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  14. digambar ji namaste!
    aapkee koshish achchhee hai. meree badhaayee!
    is manch par maine kabhee sher dar sher ghazal par tabsara naheeN dekhaa! meraa khayaal hai is se hameshaa nayee raahe khultee hai! aaj iskee himaaqat kar rahaa huN. koee baat naagavaar guzre to muafi chaahtaa huN.

    झूठ की मुस्कान होठों पर सज़ा लें
    सच के आँसू आँख में अपनी दबा लें
    aaNsoo dabaaye naheeN chhipaaye jaate haiN. jooTh kee muskaan aur jooThee muskaan donoN meN farq hai. jooThee muskaan yaane ke gham hote hue bhee haNsnaa. jooTh kee muskaan yaane jooTh kee tarafdaaree meN haNsanaa.
    aapke sher meN "jooThee muskaan waalaa bhaav hai magar lafz uskaa saath naheeN de rahe.

    चाहते हैं पूजना जो देवता को
    जो गये हैं रूठ वो बच्चे मना लें
    doosare misre meN grammatical (vyakran) mistake hai. "Woh bachche manaale" aur "un bachchhoN ko manaale" meN farq saaf dikhtaa hai. misre ko phir se baandhne kee gunjaaish hai.

    छेद कोई हो गया है चाँद में
    चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें
    doosaraa misra khaarij e beh'r hai! maiN khayaal ko samajh naheeN sakaa.

    रेत पर लिखा हुवा है नाम उनका
    आँधियों से उन के शहर का पता लें
    doosara misra khaarij e behr hai!

    कृष्ण आयेंगे तुम्हारे सखा बन कर
    पार्थ इस गांडीव को फिर से सजा लें
    pehla misra khaarij e behr hai!

    है उसी की भैंस फिर जिसकी है लाठी
    चल रही है आज तो अपनी चला लें
    sher nah chaahte hue bhee bhaav ko posetive strength de rahaa hai. is meN tanj "vyang" waalee baat naheeN aa paa rahee!

    ===================================
    rasmi waah waah to aap sabhee kee looT hee chuke hai. maine us se thoRaa aur aagey jaane kee koshish sirf aur sirf isliye kee hai taake is se mere, aapke aur tamaam dostoN ke ilm meN kuchh izaafaa hoN. shaairee meN tabaadalaa e khayaal ne fikr o fan ko sadaa hee bulandiyoN ppar pahuchaayaa hai.

    shukriyaa!
    dheer

    उत्तर देंहटाएं
  15. धीर जी
    आपने बहुत ही सुन्दर तरीके से इस ग़ज़ल की बारीकियों को समझाया है........मुझे बहुत ही अच्छा लगा और कोशिश करूँगा की आगे और अच्छी रचनाएं, ग़ज़ल के रूप के अनुसार ही दे सकूं

    बाकी सब का भी धन्यवाद है जिन्होंने इस ग़ज़ल को सराहा है

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  16. वाह दिगम्बर साब..वाह
    क्या शेर कहे हैं आपने "रेत पर लिखा हुवा है नाम उनका/आँधियों से उन के शहर का पता लें"
    सुभानल्लाह सर...सुभानल्लाह
    और इस शेर पे तो हम बिछ गये हैं "छेद कोई हो गया है चाँद में/चाँदनी का उबटन मल कर नहा लें"
    गुलज़ार साब की झलक...
    बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं

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