इन निगाहों में कोई मंज़र नहीं तो क्या करें
अपने ही शहर में अपना घर नहीं तो क्या करें

मैंने रिज्क चुगा,कतरे पिए चहका भी बहुत
उड़ने के लिए मगर पर नहीं तो क्या करें

खस्ता हाल हुए अब जवानी भी गयी यारो
ज़िन्दगी तो बाकी है सफ़र नहीं तो क्या करें

बात मुड जाती है या सबको तरीके आते हैं
बात पूरी अब भी कह कर नहीं तो क्या करें

हैफ करें क्या खुद पे क्या खुद पे करें मलाल
किया तो बहुत कुछ मुकद्दर नहीं तो क्या करें

<span title=साहित्य शिल्पी" width="130" align="left" border="0">रचनाकार परिचय:-


धीरेन्द्र सिंह का जन्म १० जुलाई १९८७ को छतरपुर जिले के चंदला नाम के गाँव में हुआ था | आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चंदला में ही पूरी की। वर्तमान में आप इंदौर में अभियन्त्रिकी में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं| कविताएँ लिखने का शौक आपको अल्पायु से ही था, किन्तु पन्नो में लिखना कक्षा नवीं से प्रारंभ किया | आप हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में रचनाएं लिखते हैं। आपका 'काफ़िर' तखल्लुस है |

29 comments:

  1. जिन्दगी की तल्खियों को आपने अपनी गजल में बखुबी ढाला है..
    इन निगाहों में कोई मंज़र नहीं तो क्या करें
    अपने ही शहर में अपना घर नहीं तो क्या करें
    मैंने रिज्क चुगा,कतरे पिए चहका भी बहुत
    उड़ने के लिए मगर पर नहीं तो क्या करें

    बधाई

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. nice poetic expression. Very true that fate has main role to play in life...Nevertheless .. show must go on.

    Alok Katariya

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  4. बात मुड जाती है या सबको तरीके आते हैं
    बात पूरी अब भी कह कर नहीं तो क्या करें
    wah!!

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  5. wah gajal ...bhot hi sundar hai..bhai ji..sach me...ham bhi kya kare.........................

    उत्तर देंहटाएं
  6. bahut hi acchi gazal hai dheerendra ji
    खस्ता हाल हुए अब जवानी भी गयी यारो
    ज़िन्दगी तो बाकी है सफ़र नहीं तो क्या करें

    kya khoob kaha hai boss, maan gaye .. dil se badhai sweekar karen ..

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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  7. काफिर साहिब को इस खुबसूरत ग़ज़ल के लिए ढेरो बधाई.. हलाकि मतला ही इतना खुबसूरत है के अब क्या कही जाए..
    इन निगाहों में कोई मंज़र नहीं तो क्या करें
    अपने ही शहर में अपना घर नहीं तो क्या करें

    अर्श

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  8. किया तो बहुत कुछ मुकद्दर नहीं तो क्या करें


    बहुत अच्छी गज़ल.

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  9. वाह ! वाह ! वाह ! लाजवाब ग़ज़ल !! हर शेर तराशे हुए हीरे सा...वाह !!

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  10. dheerendra ji!
    namaste!
    aapkee koshish qaabil e taariif hai! 2-1 baateiN arz kar rahaa huN. ise tanqeed nah samjhiyegaa!
    1.agar aapkaa ghazal kee or rujhaan hai to ghazal kee buniyaadee baatoN par ghaur karnaa hogaa. sahitya shilpi par hee Dher saare sthaayi stambh hai jis se aap yeh jaankaaree HaaSil kar sakte haiN.
    2. sher kahte waqt yeh dhyaan rakhe keh khayaal ulajh nah jaaye. jo baat aap kahnaa chaahte hai, alfaaz pooree tarah uskaa saath de to behtar hai.
    3. qafiye par pakaR zarooree hai. jaise keh 'manzar' kaa qafiya kabhee 'safar' naheeN ho saktaa.
    4. aapke beshtar misre khaarij e beh'r hai. so wazn aur behr kaa dhayaan rakhnaa hogaa!
    yeh sab baateiN dheere dheere aur mashq se hee khultee hai , so koee baat naheeN. koshish jaaree rakhiye.
    agar koee baat naagavaar guzree ho to mazaarat_khwaah huN.
    shukriyaa
    Dheeraj Ameta "Dheer"

    उत्तर देंहटाएं
  11. aap sabhi ko sahriday dhanywaad..........

    priy dheeraj ji main ghazal ke har nushkhe se waquif hun aur sab janta hu ki kaafiya radeef kya hai.aur mainne bhr me kayi ghazalen likhi bhi hain.........
    par logo ko bhi maza de saku so itna jaroori nahi samajhta yah sab aajke bade se bade shaayar bhi bhr ka itna dhyan nahi rakhte hain agar bhr me likhta to manzar ke saath safar katayi nahi daalta main jaanta hu ki manzar 22 wazn ka hai aur safar 12 wazn ka
    dhanywaad.......

    उत्तर देंहटाएं
  12. इन निगाहों में कोई मंज़र नहीं तो क्या करें
    अपने ही शहर में अपना घर नहीं तो क्या करें

    हर शेर बेमिसाल है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. dhhrendra bhai ne bade maze mai ye gazal likhee hai aur iske liye ham log hee unhe tokte rahte hai ki yaar kuchh aisa likho jise mere jaisa aadmee bhee samajh sake. vaise dheerendra hindi kavya aur urdu shaayree ke uddeyamaan sitaare hai.

    उत्तर देंहटाएं
  14. namaste Dhirendra saHeb!
    maine aaj tak ek bhee baRe shaair ko naheeN paRhaa jo be-wazn ghazal kahtaa ho. shaaid aapkee nazar se guzre hoN.
    yeh mere liye baai'c e masarrat hai keh aap ghazal ke tamaam mayaaroN se do chaar haiN. maiN apnee kahee waapas letaa huN. yeh shaair kaa haq hai keh woh apne kalaam kee kisee bhee soorat se mutmayin ho aur apne lutf ke liye kalam uThaaye. so aapkaa bhee hai.
    dua go
    Dheeraj Ameta "Dheer"

    उत्तर देंहटाएं
  15. मैंने रिज्क चुगा,कतरे पिए चहका भी बहुत
    उड़ने के लिए मगर पर नहीं तो क्या करें

    यह शेर पसंद आया।
    बधाई स्वीकारें।

    -विश्व दीपक

    उत्तर देंहटाएं
  16. मैंने रिज्क चुगा,कतरे पिए चहका भी बहुत
    उड़ने के लिए मगर पर नहीं तो क्या करें

    बहुत...बहुत ही बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  17. DHEERENDRA JEE,AAP BHALE HEE APNEE
    GAZAL KO GAZAL KAHKAR KHUSH HO LEN
    LEKIN YE GAZAL NAHIN HAI.JANAAB
    DHEER SAHIB NE AAPKE BHALE KE LIYE
    FARMAAYAA HAI.AGAR AAP UNKEE NEK
    SALAAH PAR DHYAAN NAHIN DETE HAIN
    TO HAANI UNKEE NAHIN ,AAPKEE HAI.
    SHRI RAJIV RANJAN JEE NE KAUSHISHON
    SE SAHITYA SHILPI PAR JO GAZAL
    SAMBANDHI LEKH JUTAAYE HAIN,VE
    SABHEE AAP JAESE NAYE GAZALKAARON
    KE LIYE HAIN.ABHYAAS KARENGE TO
    AAGE BADH PAAYENGE. AAP APNEE GALTI
    KO SUDHAREN.ASHA HAI KI AAP MEREE
    KAHEE BAAT KAA BURAA NAHIN MAANEGE.

    उत्तर देंहटाएं
  18. katai nahi gurudev main aapke kahe ka katai bura nahi maanunga na hi dhiraj ji ki baat ka bura maana hai main agli baar se dhyan doonga.......

    उत्तर देंहटाएं
  19. खस्ता हाल हुए अब जवानी भी गयी यारो
    ज़िन्दगी तो बाकी है सफ़र नहीं तो क्या करें.....

    धीरेन्द्र जी

    यह पंक्तियां और आपकी विनम्रता अच्छी लगी - शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं
  20. शिल्प पर प्राण जी से सहमत हूँ, कथ्य लाजवाब है।

    उत्तर देंहटाएं
  21. मैंने रिज्क चुगा,कतरे पिए चहका भी बहुत
    उड़ने के लिए मगर पर नहीं तो क्या करें
    कमाल की बात..

    उत्तर देंहटाएं
  22. खस्ता हाल हुए अब जवानी भी गयी यारो
    ज़िन्दगी तो बाकी है सफ़र नहीं तो क्या करें

    बहुत लाजवाब ग़ज़ल है.............सब शेर............अपने आप ही वाह वाह निकलता है

    उत्तर देंहटाएं
  23. aap sab ne itna pyar diya meri rachna ko padha atew bahut-bahut dhanyqwaad......
    dhiraj bhaiya aur pran ji ko sahriday dhanywaad jinhone nispaksh hokar ghazal se sambandhit baaten ujagar ki......

    उत्तर देंहटाएं

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