सडक बंद, बाजार बंद
रेल बंद, बस बंद सभी
तोड-फोड हर ओर..
बतलाओ मुझको पापा
यह कैसी दुनिया है जो
मुझे विरासत में दोगे?

रचनाकार परिचय:-


रितु रंजन का जन्म 1.071980 को भागलपुर(बिहार)में हुआ। 

लेखन आपकी अभिरुचि है। घर के साहित्यिक माहौल नें आपको लिखने के लिये प्रेरित किया। 

अब ब्ळोगजगत में सक्रिय हैं।

यह कैसी आजादी
घर से निकलो
दिल डरता है?
यह कैसी आजादी
जिसमें गली गली 
बम फँट पडता है?
कैसी यह आजादी
जिसमें, हम बच्चे भी नहीं सुरक्षित
कैसी यह आजादी
पापा जो मुझे विरासत में दोगे?

तुम गाँधी सुभाष जो कहते हो
वह दौर सुनहरा बीत गया
यह देश निठारी देख रहा
यह देश दिशा से हीन हुआ
तुम मेरी उंगली अब थामों
तुम मुझे दिशा तो दो पापा
क्यों भगत पडोसी के घर हो?
तुम आसमान तो दो पापा
तो हम फिर तेरा गर्व बनें.
फिर आजादी का पर्व मने..

18 comments:

  1. गहरे सोच की बहुत अच्छी कविता।

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  2. पापा भी बेबस हैं , एक नयी क्रांति की आवश्यकता है जो युवा ही ला सकते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. HRIDYA SE NIKLEE AAWAAZ.KOEE SUNNE
    WAALAA TO HO.

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  4. शायद कोई ऊँगली पकड़ कर इन सब से मुक्ति दिला सके?

    उत्तर देंहटाएं
  5. Bhabhi...aakhri ka jo para hai usne saari kavita me jaan daal di hai.ek taraf se shuru karte karte prabhaavi mod se mud gai kavita....

    These line sare fantastic

    तुम गाँधी सुभाष जो कहते हो
    वह दौर सुनहरा बीत गया
    यह देश निठारी देख रहा
    यह देश दिशा से हीन हुआ
    तुम मेरी उंगली अब थामों
    तुम मुझे दिशा तो दो पापा
    क्यों भगत पडोसी के घर हो?
    तुम आसमान तो दो पापा
    तो हम फिर तेरा गर्व बनें.
    फिर आजादी का पर्व मने..

    Keep writing and be our inspiration

    ------Anupama

    उत्तर देंहटाएं
  6. bhabhiji ,

    is baar aapki kavita ne hum sabko sochne par mazboor kar diya hai ki , hum after all kis tarah ka desh aur samaj aur bhavishaya apne baccho ke liye diye ja rahe hai ..

    In fact dekha jaayen to aaj se kuch samay ka jo parivesh tha ,wo ab nahi raha ..aur hum ab ek banana country me ji rahe hai , jahan har mulaya , chahe wo bautik ho , ya samajik , ya maanviya .. ab laghbhag khatam se ho gaye hai .. hamare bacche ab "dar" ke saayon me ji rahen hai ..

    kaisi azaadi , kaisa desh.... mujhe rajiv ji ki pichali kavita jhakjhor deti hai jisme unhone likha tha bhagat singh ke janmdin ke avsar par , aur kya sahi tasveer pesh kiya tha [ in fact wo rajiv ji ki ek kaaljayi rachna hai ]

    lekin aapki is rachna ne bhi hamen sochne par majboor kar diya hai ,ki papa ko kya karna chahiye ..

    main aapko badhai nahi doonga , balki , aapke lekhan ko salaam karunga ..
    Jai hind ..

    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  7. हम इस देश को सिर्फ बच्चे दिए जा रहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : अंडे बेचने का या फेंकने का काम करते है क्या
    आपकी चिठ्ठा : मेरी चिठ्ठी चर्चा में

    उत्तर देंहटाएं
  9. सोचने को मजबूर करती एक सार्थक कविता

    उत्तर देंहटाएं
  10. सडक बंद, बाजार बंद - व्रंत्यानुप्रास
    रेल बंद, बस बंद सभी - व्रंत्यानुप्रास
    बतलाओ मुझको पापा -श्रुत्यानुप्रास
    जिसमें गली गली -छेकानुप्रास
    बम फँट पडता है? --श्रुत्यानुप्रास
    जिसमें, हम बच्चे भी नहीं सुरक्षित --श्रुत्यानुप्रास
    यह देश निठारी देख रहा --श्रुत्यानुप्रास
    तुम मुझे दिशा तो दो पापा -छेकानुप्रास, श्रुत्यानुप्रास
    क्यों भगत पडोसी के घर हो? छेकानुप्रास, श्रुत्यानुप्रास
    तुम आसमान तो दो पापा छेकानुप्रास, श्रुत्यानुप्रास
    फिर आजादी का पर्व मने.. -श्रुत्यानुप्रास

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी कविता है रितु जी। सलिल जी आपका भी धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  12. रितु जी !

    बाल रचना के माध्यम से कई गंभीर विशय सामने आये हैं बड़ों को चेताने के लिये धन्यवाद - शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं
  13. सार्थक...........गहरे सोच की अभिव्यक्ति .................समय से कुछ मांगती हुयी कविता

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  14. रितु जी ने इस रचना के माध्यम से बहुत गंभीर प्रश्न खडे किये हैं जिनके उत्तर ढूंढे बिना देश का हित सम्भव नहीं है

    उत्तर देंहटाएं
  15. अच्छी अभिव्यक्त। लेकिन सोचने वाली बात है कि गंभीर सावल हमेशा पापा पर ही क्यों दागे जाते हैं। (क्षमा चाहूंगा)

    उत्तर देंहटाएं

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