दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते

इज्ज़त के सामने भला दौलत का क्या वकार
मर जाते हैं हजारों ही इज्ज़त के वास्ते

रचनाकार परिचय:-


प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं।
आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' - दो काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।


बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते

माना कि "प्राण" इसकी जरूरत सही मगर
क्यों भूलें रिश्तों -नातों को दौलत के वास्ते

26 comments:

  1. दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
    जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते

    जय हो।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर गजल.. आपकी गजल पढ कर अचानक एक शेर मन में आ गया.. लिख ही दिया..
    क्षमा कीजियेगा

    साथ चलने का बनाया मन बहुत मगर
    मिलते नहीं उनके मेरे सफ़र के रास्ते

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहूत ही लाजवाब ग़ज़ल है प्राण शर्मा जी की...........उस्ताद लोग अक्सर जीवन के अनुभव को खूबसूरती से उआरते है अपनी कलम से ...........देखिये इस शेर को .........

    बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

    इस शेर में कितना गहरा दर्शन छिपा है .............

    हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते
    लाजवाब ..........

    उत्तर देंहटाएं
  4. Nice Gazal. Nice Touught on Environment-
    हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते

    Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  5. बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

    --बहुत उम्दा गजल!! आनन्द आ गया.

    उत्तर देंहटाएं
  6. माना कि "प्राण" इसकी जरूरत सही मगर
    क्यों भूलें रिश्तों -नातों को दौलत के वास्ते
    समय के अनुरूप ग़ज़ल है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरणीय प्राण जी की इस मंच पर उपस्थिति इस प्रयास को आशीर्वाद स्वरूप होती है। आपसे इस मंच नें बहुत कुछ सीखा और बहुत कुछ पाया है। आपकी प्रस्तुत ग़ज़ल भी आपके विस्तृत अनुभवाकाश से निकल कर आयी है। धन्यवाद आपका।

    उत्तर देंहटाएं
  8. दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
    जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते
    lambe intezaar ke baad ghazal aayee hai Pran ji ki.sh. Pran ji ka aur Ranjan ji ka shukria..
    saadar
    khyaal

    उत्तर देंहटाएं
  9. ग़ज़ल पितामह के अब गज़ल्गोई के बारे में क्या कोई कहे ... कितनी सिद्दत से उन्होंने अपने अनुभव को ग़ज़ल के रस्ते कहा है बहोत ही करीने कही गयी ग़ज़ल...ढेरो बधाई

    अर्श

    उत्तर देंहटाएं
  10. 'संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते’ क्या बात है प्राण जी. हिन्दी साहित्य में भी यही स्थिति है. शोहरत के लिए संघर्ष के साथ और भी बहुत कुछ करना पड़ रहा है लोगों को---- बधाई.

    चन्देल

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्राण शर्मा जी की ग़ज़ल के सभी शे'र उम्दा हैं--
    बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

    हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते

    हर बार कुछ सीखना को ही मिलता है.
    बहुत -बहुत बधाई!
    सुधा

    उत्तर देंहटाएं
  12. दिल में गहरे उतर आने वाली यह बहुत ही बेहतरीन
    गजल है।
    हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते
    आप तो इस फ़न के उस्ताद हैं कहना ही क्या !!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

    बहुत बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  14. हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते
    बहुत अच्छी ग़ज़ल।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

    bahut hi khoobsurat sher kaha hai aapne

    zindgi mein bahut sachhi baat

    उत्तर देंहटाएं
  16. दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
    जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते -छेकानुप्रास, अंत्यानुप्रास

    इज्ज़त के सामने भला दौलत का क्या वकार -छेकानुप्रास
    मर जाते हैं हजारों ही इज्ज़त के वास्ते -व्रंत्यानुप्रास

    बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
    संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते --छेकानुप्रास

    हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो --व्रंत्यानुप्रास
    काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते ---व्रंत्यानुप्रास

    माना कि "प्राण" इसकी जरूरत सही मगर
    क्यों भूलें रिश्तों -नातों को दौलत के वास्ते --छेकानुप्रास

    उत्तर देंहटाएं
  17. JIS TARAH SE ACHARYA SALIL JEE NE
    MEREE GAZAL KE HAR SHER MEIN
    ALANKARON KO DARSHAAYAAA HAI VAH
    SARAAHINYA HAI.YASH UNKE ACHARYATAV
    KAA DYOTAK HAI.UNSE BAHUT KUCHH
    SEEKHAA JAA SAKTAA HAI.MAIN SHREE
    RAJIV RANJAN KO DHANYAVAAD DETAA
    HOON KI UNHONNE ACHARYA SANJEEV
    VERMA "SALIL" SE HAMAARAA PARICHAY
    KARVAAYAA HAI.

    उत्तर देंहटाएं
  18. साहित्य शिल्पी पर आज बहुत दिनों के बाद प्राण शर्मा जी की ग़ज़ल पढ़कर हृदय को बड़ी प्रसन्नता हुई। शर्मा जी की ग़ज़ल हो या फिर अन्य रचना हो, पढ़ने के बाद इसका ख़ुमार बहुत समय तक चढ़ा रहता है। बस, वही हालत इस ग़ज़ल की है, अभी पढ़ी है और गुनगुनाना शुरू हो गया है। बहरो-वज़न, लफ़्जों का चुनाव, लयात्मकता, प्रवाह, अर्थपूर्ण बातों का कुछ ही शब्दों में बहुत ही प्रभावी ढंग से कहने की क्षमता - यह सभी गुण इस ग़ज़ल के हर शे'र में समाये हुए हैं।
    बहुत पहले की बात है कि नवभारत टाइम्स में
    एम.जे. अकबर ने कहा था "शब्द अनुभवों की ही अभिव्यक्ति करते हैं." शर्मा जी के अनुभवों के शब्दों का जादू यहां देखा जा सकता है।
    आदरणीय आचार्य 'सलिल' जी की टिप्पणी तो सोने पर सुहागा का काम कर रही है। आचार्य जी के सामने तो स्वत: ही मस्तक नत हो जाता है।
    प्राण जी और साहित्य शिल्पी को धन्यवाद।
    महावीर शर्मा

    उत्तर देंहटाएं
  19. aadarniya pran saheb ,

    aapki gazal ki kya tareef karun , na main apne aapko is layak samjhta hooon aur na hi mere paas wo shabd hai , jo ki aapke lekhan ki tareef kar sake..

    दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
    जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते

    is akele sher ne poori duniya ke saamne ek aisi baat kahi hai ki .. jeevan ko kaise jiya jaaye..

    aapko dil se badhai ..

    विजय
    http://poemsofvijay.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  20. बड़े दिनों बाद प्राण साब की ग़ज़ल देख कर मन पुलकित हो उठा...
    "बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी/संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते"
    वाह !!!

    प्राण साब को नमन और राजीव जी का शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  21. इज्ज़त के सामने भला दौलत का क्या वकार
    मर जाते हैं हजारों ही इज्ज़त के वास्ते

    अत्मानुभूति सी प्रतीत हुयी संपूर्ण गज़ल को पढ़ते हुये - प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  22. ab aapko kya daad hu us kaabil hi nahi hu.............

    bahut hi achchhi ewam saaf suthari ghazal

    उत्तर देंहटाएं
  23. दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
    जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते

    प्राण शर्मा जी,
    बहुत सुन्दर गजल..

    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  24. शौहरत की कोई उम्र हो तो कहो
    जीने की ख्वाहिश नहीं हो तो कहो
    संघर्ष हैं कारण मात्र कि जिन्दे रहो
    तडपन हैं अमीरो की उसे शौहरत कहो।
    छगन लाल गर्ग।

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget