क्या लिखूँ.. कैसे लिखूँ...
लिखना मुझे आता नहीं...
टीवी की झकझक..
रेडियो की बकबक..
मोबाईल में एम.एम.एस..
कुछ मुझे भाता नहीं
भडास दिल की...
कब शब्द बन उबल पडती है
टीस सी दिल में..
कब उभर पडती है...
कुछ पता नहीं

रचनाकार परिचय:-


राजीव तनेजा की हास्य-व्यंग्य पढ़ने और लिखने में विशेष रुचि है। वे बी कॉम करने के बाद दिल्ली में रैडीमेड दरवाज़े और खिड़कियों का व्यवसाय करते हैं। इनकी कुछ कहानियाँ तथा व्यंग्य रचनाएँ प्रकाशित हैं। 'हँसते रहो' नाम के एक लोकप्रिय चिट्ठा भी ये चला रहे हैं।


सोने नहीं देती है ..
दिल के चौखट पे..
ज़मीर की ठक ठक
उथल-पुथल करते..
विचारों के जमघट
जब बेबस हो..तमाशाई हो..
देखता हूँ अन्याय हर कहीं
फेर के सच्चाई से मुँह..
कभी हँस भी लेता हूँ
ज़्यादा हुआ तो..
मूंद के आँखे...
ढाँप के चेहरा...
पलट भाग लेता हूँ कहीं
आफत गले में फँसी
जान पडती है मुझको
कुछ कर न पाने की बेबसी...
जब विवश कर देती मुझको..

असमंजस के ढेर पे बैठा
मैँ 'नीरो' बन बाँसुरी बजाऊँ कैसे
क्या करूँ...कैसे करूँ...
कुछ सूझे न सुझाए मुझे...
बोल मैँ सकता नहीं
विरोध कर मैँ सकता नहीं
आज मेरी हर कमी...
बरबस सताए मुझको

उहापोह त्याग...कुछ सोच ..
लौट मैँ फिर
डर से भागते कदम थाम लेता हूँ ...
उठा के कागज़-कलम...
भडास दिल की...
कागज़ पे उतार लेता हूँ
ये सोच..खुश हो
चन्द लम्हे. ..
खुशफहमी के भी कभी
जी लेता हूँ मैँ कि..
होंगे सभी जन आबाद
कोई तो करेगा आगाज़
आएगा इंकलाब यहीं..
हाँ यहीँ...हाँ यहीँ

सच..
लिखना मुझे आता नहीं...
फिर भी कुछ सोच..
भडास दिल की...
कागज़ पे उतार लेता हूँ मैँ"

6 comments:

  1. अच्छी रचना प्रक्रिया है आपकी राजीव जी। बहुत अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. राजीव जी आपकी पहली कविता पढी। व्यंग्य की तरह आप कविता भी अच्छी कर सकते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. न आने पर तो
    लिख देते हो बल्कि
    उधेड़ देते हो
    लिखना आता तो
    फिर पीस ही देते
    कर देते पीस पीस
    देता रहता ऐसा
    सदा ही गहरी टीस।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या लिखूँ.. कैसे लिखूँ...
    लिखना मुझे आता नहीं...
    टीवी की झकझक..
    रेडियो की बकबक..
    मोबाईल में एम.एम.एस..
    कुछ मुझे भाता नहीं
    भडास दिल की...
    कब शब्द बन उबल पडती है
    टीस सी दिल में..
    कब उभर पडती है...

    वैसे अपन भी एसे ही लिखते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सबका यही हाल है राजीव जी... हा कुछ भडास दूसरी भडासों से अधिक प्रसिद्धि पा जाती हैं

    उत्तर देंहटाएं

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