बोतलों से जिन्न निकाले जाएँगे
आज फिर मुद्दे उछाले जाएँगे.

रचनाकार परिचय:-


सतपाल ख्याल ग़ज़ल विधा को समर्पित हैं। आप निरंतर पत्र-पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं।

आप सहित्य शिल्पी पर ग़ज़ल शिल्प और संरचना स्तंभ से भी जुडे हुए हैं तथा ग़ज़ल पर केन्द्रित एक ब्लाग aajkeeghazal.blogspot.com/ का संचालन भी कर रहे हैं।

आपका एक ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन है। अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।

वक्त की काई जिन्हें ढकती रही
ताल वो फिर से खँगाले जाएँगे.

इस तरफ मस्जिद गिरी तो उस तरफ़
राम मंदिर से निकाले जाएँगे.

मुफ़लिसी मे बाप का साया गया
अब से बच्चों के निवाले जाएँगे.

आज संसद मे हमारे सब सवाल
गेंद के जैसे उछाले जाएँगे

तेज़ तूफ़ां मे दरख्तों से भला
कैसे ये पत्ते सँभाले जाएँगे.

वो रहे लशकर अँधेरों के "ख्याल"
ज़िंदगी से अब उजाले जाएँगे.

29 comments:

  1. इस तरफ मस्जिद गिरी तो उस तरफ़
    राम मंदिर से निकाले जाएँगे.

    मुफ़लिसी मे बाप का साया गया
    अब से बच्चों के निवाले जाएँगे.

    आज संसद मे हमारे सब सवाल
    गेंद के जैसे उछाले जाएँगे

    ग़ज़ल लाजवाब है, एक एक शेर बेहतरीन।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह वाह .....सतपाल जी की ग़ज़ल..............कमाल का लिखा है..........यथार्त को, सत्य को ग़ज़ल में शीशे कीतरह उतार दिया.......लाजवाब
    किसी भी एक शेर को चुनु ये मेरे बस में नहीं है

    उत्तर देंहटाएं
  3. कमाल लिखा है आपनें। हर शेर में दुष्यंत वाला तेवर।

    उत्तर देंहटाएं
  4. तेज़ तूफ़ां मे दरख्तों से भला
    कैसे ये पत्ते सँभाले जाएँगे.
    बहुत अच्छी ग़ज़ल है। तीखे तेकर के साथ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. TEJ TOOFAAN ...YE SHE'R SATPAAL JI KHAASA BADHIYAAA LIKHAA HAI AAPNE.. BAHOT HI KAMAAL KE SHE'R KAHE HAI AAPNE GAZAL ME ... DHERO BADHAAYEE


    ARSH

    उत्तर देंहटाएं
  6. SATPAL JEE,ACHCHHEE GAZAL KE LIYE
    BADHAEE AUR SHUBH KAMNYEN.

    उत्तर देंहटाएं
  7. SATPAL JEE,ACHCHHEE GAZAL KE LIYE
    BADHAAEE AUR SHUBH KAMNAYEN.

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह ! वाह ! वाह ! लाजवाब ग़ज़ल !

    सच को खूबसूरती से बयां करता हर शेर कबीले दाद...वाह !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह सतपाल जी वाह... क्या खूब कहा है... बधाई स्वीकारें..

    उत्तर देंहटाएं
  10. उदाहरण बन जाने वाली गज़ल है।

    अनुज कुमार सिन्हा
    भागलपुर

    उत्तर देंहटाएं
  11. इस तरफ मस्जिद गिरी तो उस तरफ़
    राम मंदिर से निकाले जाएँगे.


    सुन्दर गजल
    सभी शेर एक से बढ़ कर एक
    वीनस केसरी

    उत्तर देंहटाएं
  12. सतपाल जी को सलाम बजाता हूँ इस बेमिसाल ग़ज़ल पर...मतले पर ही पहले तो कितनी देर तक ठिठका रहा...अहा!
    हर शेर नायाब
    वक्त की काई जिन्हें ढकती रही- वाला हो या फिर राम मंदिर से निकाले जाएँगे- वाला

    करो़ड़ों बधाईयां !!

    उत्तर देंहटाएं
  13. सतपाल बहुत बढ़िया ग़ज़ल -बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  14. मुझे ब्लागिंग की कामेंट महिफ़िलों से अब डर सा लगने लगा है और इसी डर को लेकर मेरा ये एक शे’र सब के लिए:
    सताइश भी नहीं सच्ची
    हैं नुक्ताचीं भी सब झूठे.
    मैं महिफ़िल मे तो आता हूँ
    मगर डरता हूँ दोनों से.

    सादर
    ख्याल

    उत्तर देंहटाएं
  15. मेरे शे’र को अन्यथा न लें मैं सब का आभारी हूँ
    अनन्या का,digambar ka,anil ka,nandan ka,ashabd ka,arsh ka,Pran ji ka, ranjana ji ka aur sudha ji ka...

    aur ranjan ji ka ki mere ghazal publish karne ka.
    Thanks to all

    उत्तर देंहटाएं
  16. Hai bahut umdah ghazal Satpal ki
    Pesh karta hoon mubarakbaad main

    Is mein asri aagahi ki hai jhalak
    jisko psdh kar hoon nehayat shaad main

    Qabil e taareef hain unke vichaar
    De raha hoon jiski unko daad main

    Ahmad Ali Barqi Azmi
    New Delhi-110025

    उत्तर देंहटाएं
  17. shandaar bahut sundar vyangaatmak abhivyakti ke saath sundar ghazal

    उत्तर देंहटाएं
  18. बोतलों से जिन्न निकाले जाएँगे
    आज फिर मुद्दे उछाले जाएँगे.

    वो रहे लशकर अँधेरों के "ख्याल"
    ज़िंदगी से अब उजाले जाएँगे.

    Great!

    RC

    उत्तर देंहटाएं
  19. ताज़ातरीन विष्य पर लिखी गई गज़ल बहुत पसन्द आई...


    बधाई स्वीकार करें

    उत्तर देंहटाएं
  20. aadarniya satpaal ji

    aapoke gazal lekhan ka to mainkaayal hoon sir ji

    aap bahut hi behatreen dhang se apni baat kahte hai ...

    ye lines to hamne kuch sochane par mazboor karti hai .

    इस तरफ मस्जिद गिरी तो उस तरफ़
    राम मंदिर से निकाले जाएँगे.

    मुफ़लिसी मे बाप का साया गया
    अब से बच्चों के निवाले जाएँगे.

    meri dil se badhai sweekar kariyenga pls.

    dhanyawad

    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  21. आपकी गजल तो प्यारी है ही... शेर भी बहुत उम्दा है... जो आपने टिप्पणी में लिखा है..

    सताइश भी नहीं सच्ची
    हैं नुक्ताचीं भी सब झूठे.
    मैं महिफ़िल मे तो आता हूँ
    मगर डरता हूँ दोनों से.

    मेरे शब्दों में

    यकीं न भी आये तो
    यकीं करना पडता है
    जमाना है और जमाने में
    उसी की रीत चलती है

    उत्तर देंहटाएं
  22. इस गज़ल की तारीफ में सिर्फ इतना कहूंगा- इस गज़ल के कई शेर मेरी स्क्रिप्ट को वजन देने के काम आएंगे...

    बेहतरीन

    सादर,
    खबरी
    http://deveshkhabri.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत अछ्छे शेर ...........बधाई.......

    कवि दीपक गुप्ता
    www.kavideepakgupta.com

    उत्तर देंहटाएं
  24. ग़ज़ल के शायर ने अपने ख्याल में
    आज के सिआसी समाजी और सकाफती
    इक्दार की मंज़रकशी की है
    कायम रहो दायम रहो
    शुभ कामनाएं

    चाँद शुक्ला हदियाबादी
    डेनमार्क

    उत्तर देंहटाएं
  25. मुफ़लिसी मे बाप का साया गया
    अब से बच्चों के निवाले जाएँगे

    तेज़ तूफ़ां मे दरख्तों से भला
    कैसे ये पत्ते सँभाले जाएँगे.

    ye do sher kuch jyada hi acche lage ..

    उत्तर देंहटाएं
  26. Bhai Satpal ji,
    achchhi ghazal kahi hai, badhai.
    tej toofan men darakhton se bhalaaa,
    kaise ye patte sanbhale jayenge.
    sunder sher hai.punah badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  27. वक्त की काई जिन्हें ढ्कती रही, ताल वो फिर से खंगाले जायेंगे। उम्दा शे'र , अच्छी ग़ज़ल्।

    उत्तर देंहटाएं

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