रचनाकार परिचय:-


दीपक गुप्ता [का जन्म 15 मार्च 1972 को दिल्ली में हुआ। आप दिल्ली विश्वविद्यालय से कला में स्नातक हैं। आपकी प्रकाशित कृति हैं:- सीपियों में बंद मोती (कविता संग्रह) – 1995; आप की रचनायें देश के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व टेलीविजन कार्यक्रमों में प्रसारित होती रही हैं।
लापता लोग भी मंजिल का पता देते हैं
डूबने वाले ही साहिल का पता देते हैं

ऐसे - ऐसे भी यहाँ कितने ही कातिल है कि,
जो कत्ल करते हैं औ बिस्मिल का पता देते है

कोई जब पूछता है हमसे कहाँ रहते हो
पूछने वाले को हम दिल का पता देते हैं

आपके हंसने - हंसाने के अजब ये तेवर
आने वाली किसी मुश्किल का पता देते हैं

आईने झांकते हैं जब भी मेरी आंखों में
मेरे भीतर छुपे कातिल का पता देते हैं

20 comments:

  1. आपके हंसने - हंसाने के अजब ये तेवर
    आने वाली किसी मुश्किल का पता देते हैं

    वाह.....लाजवाब शेर हैं..........उम्दा

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  2. पंकज सक्सेना1 जून 2009 को 2:28 pm

    आईने झांकते हैं जब भी मेरी आंखों में
    मेरे भीतर छुपे कातिल का पता देते हैं
    बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  3. लापता लोग भी मंजिल का पता देते हैं
    डूबने वाले ही साहिल का पता देते हैं

    आपके हंसने - हंसाने के अजब ये तेवर
    आने वाली किसी मुश्किल का पता देते हैं
    कमाल कमाल के शेर हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. ग़ज़ल बहुत अच्छी बन पडी है। हर शेर बेहतरीन है। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. लाजवाब अद्भुत खूब्सूरत गज़ल के लिये बधाइ आभार्

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपके हंसने - हंसाने के अजब ये तेवर
    आने वाली किसी मुश्किल का पता देते हैं

    बहुत बढिया

    उत्तर देंहटाएं
  7. दीपक जी, आपसे पहली मुलाकात ईटीवी के प्रोग्राम में हुई थी... उस दिन मैंने आपको टीवी पर आने वाली बिकाऊ कॉमेडी के लिए बुलाया था... लेकिन आपकी इन सशक्त रचनाओं को पढ़कर लगता है कि मीडिया में बिकाऊ शब्द को लेकर हम पाठक की समझ को अंडर अस्टीमेट करते हैं... बहुत ही उम्दा... बहुत ही उम्दा...

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  8. दिलकश गजल के लिये बधाई दीपक जी

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. Deepak saHeb! namaste!

    ek achchhee ghazal ke liye daad qabool keejiye. sher:-
    ऐसे - ऐसे भी यहाँ कितने ही कातिल है कि,
    जो कत्ल करते हैं औ बिस्मिल का पता देते है
    doosare misre par nazr e saanee kar leejiyegaa. wazn se khaarij hai!

    कोई जब पूछता है हमसे कहाँ रहते हो
    पूछने वाले को हम दिल का पता देते हैं
    doosaraa misra mubham rah gayaa hai. shaayad behtaree kee gunjaaish hai. kiske "dil" kaa pataa ... yeh zaahir naheeN hai.
    ek tajweez zehn meN aaye hai, so aapkee ijaazat se likh rahaa huN.

    poochhtaa hai jo koee ham se, "kahaaN rahte hoN?"
    fak'r se ham bhee tere dil kaa pataa dete haiN!

    ek baar phir se daad haazir hai!

    khairandesh
    -Dheeraj Ameta "Dheer"

    उत्तर देंहटाएं
  11. kavi tumhe padh kar pyaar aata hai jindgi se aur tadap hoti hai iska matlab janne ka
    sandeep mishra 9953222177

    उत्तर देंहटाएं

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