काले मेघ [कविता] - किरन सिन्धु
रचनाकार परिचय:- किरण सिन्धु, उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हैं। आपकी शिक्षा झारखण्ड में तथा विवाह बिहार में हुआ। वर्तमान में आप मुंबई में अवस्थित हैं। आपको परिवार और परिवेश में बचपन से ही साहित्य प्रेम का भरपूर अवसर प्राप्त हुआ। श्रधेय गुरुजनों की कृपा से जो भी ज्ञानार्जन हुआ उसके सहारे अध्यापन के क्षेत्र में २५ वर्षों तक सुदृढ़ रूप से खड़ी रही। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति किशोरावस्था से ही प्रेम रहा है.तपती धरती खोज रही है
सीने में दरार लिए,
बाट देख रहे सभी किसान
आँखों में इक आस लिए;
कहाँ गए तुम काले मेघ?
सूखी खेती देख - देख कर
नयनों में जल भरने लगा है,
कैसे जलेगा घर का चूल्हा
सोंच - सोंच मन डरने लगा है;
कब आओगे काले मेघ?
नदी - नहर सब थम से गए हैं
वृक्ष सभी कुम्हलाये हुए,
कैसे चैन पड़े प्राणी को
बिना तुम्हारे आये हुए;
तरस भी खाओ काले मेघ!
अब जो देर हुई आने में
यम के दूत डराने लगेंगे,
पशुओं के बाडों के ऊपर
गिद्ध चील मंडराने लगेंगे
सुनो गुहार हे काले मेघ!

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आरे बादल काले बादल.........
मॉनसून के इंतजार में बादल को मनाने की कोशिश अच्छी लगी..........
tellmeyourdreams says
ek baar fir badhai ho aunty!
बेनामी says
अति सुन्दर !
-नितिन
राजीव तनेजा says
लगता है आपकी पुकार ऊपरवाले ने सुन ली है...यहाँ दिल्ली में तो बरखा ने आने के संकेत दे दिए हैँ....
सुन्दर कविता
sanju says
सुन्दर कविता
राजाभाई कौशिक says
बधाई !सुन्दर ।
आपकी गुहार ही शायद
तानसेन ने मल्हार के रूप मे
गाई होगी तब
सिन्धु पर किरण के प्रभाव ने
मेघ को जन्म दिया था
अर्चना तिवारी says
बादलों ने आपकी पुकार सुन ली...वो आ रहे हैं...इतनी सुन्दर कविता जो उन्हें पुकार रही है
Udan Tashtari says
सुन्दर रचना!!
नंदन says
यहाँ अरुणाचल में तो अब मेघ ही मेघ हैं :)
रितु रंजन says
आज तो किरण जी आपकी फरियाद सुन ली गयी है फरीदाबाद में भी सुबह से बारिश हो रही है।
दिगम्बर नासवा says
काले मेघों की प्रतीक्षा तो सभी को है.............
अच्छे भाव से सजी कविता
अभिषेक सागर says
बहुत अच्छी कविता, बधाई।