साहित्य शिल्पी बहु-आयामी मंच है तथा विभिन्न विधाओं को गुलदस्ते के रूप में प्रस्तुत करने को सर्वदा तत्पर रहा है। इस कडी में पहली बार हम ले कर प्रस्तुत हैं एक पेंटिंग और उस पर आधारित एक कविता। रचनाकार हैं - राजाभाई कौशिक।


साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-

सालासर में ६ नवम्बर, १९७३ को जन्मे राजाभाई कौशिक अजमेर के डी.ए.वी. कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत आयुर्वेद की ओर उन्मुख हुये और इस क्षेत्र में सुयश प्राप्त किया।
वर्तमान में राजस्थान के चुरू में निवास कर रहे राजाभाई ने अनेक कविताएं, लेख, व्यंग्य आदि लिखें हैं और कई सम्मान प्राप्त किये हैं। आप एक अच्छे चित्रकार भी हैं।

पिया मिलन की आस!
सपनों के दीये जला
जिन्दगी रोशन किये हूँ।
तन्हा विरानियों को
आबाद यादों के सहारे
छोड क्या गये?
मानो युग बीत गये सारे
दिल तो यही पुकारे
आ....रे, आ रे, आजा रे
जीवन उदास भी
हृदय में आस भी
मन में प्यास भी
खण्डित श्वास भी
फिर भी
साँसो की कडियाँ जोडे हुये हूँ।


नोट: हम न केवल इस प्रारंभ पर अपने पाठकों का प्रोत्साहन चाहते हैं अपितु, साथ ही अनुरोध करते हैं उन चित्रकारों से भी जो अपकी कला के प्रस्तुतिकरण का माध्यम अंतर्जाल को बनाना चाहते हैं।
- साहित्य शिल्पी

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर पेंटिंग, बधाई।

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  4. आदरणीय श्री राजीव रंजन जी, यह आपका बड़ा सुन्दर और सराहनीय प्रयास है ‘साहित्यशिल्पी’ के लिये। इससे न सिर्फ़ हिंदी में सृजनात्मकता को नया आयाम मिलेगा बल्कि एक साथ लोग रचना और पेटिंग का भी आनंद ले सकेंगे। आप इस पर प्रतियोगिता भी शुरु कर सकते हैं और किसी उदार साहित्य जन जो पुरस्कार के तौर पर पुस्तकें वगैरह दे सकतें हैं का सहयोग प्राप्त कर इसको और भी ऊंचाई दे सकते हैं। हृदय से बधाई स्वाकारें इस चित्र-कवितावली प्रस्तुति पहल के लिये।

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  5. सुशील जी का प्रस्ताव स्वागत योग्य है। इस दिशा में पहल की जानी चाहिये। राजाभाई का धन्यवाद। बधाई भी स्वीकार करें।

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  6. चित्र नें बहुत प्रभावित किया। रंग और भाव बिलकुल नपे तुले।

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  7. कौशिक जी,
    आपकी कविता 'पिया मिलन की आस' की नायिका का सजीव चित्र बड़ा ही मनोहारी है.प्रतीक्षारत आँखों में लज्जा के भाव तथा मधुर स्मृतियों के कारण होठों पर स्मित मुस्कान खिला कर आपके अन्दर के चित्रकार ने अपनी विलक्षण क्षमता का परिचय दिया है.बहुत कम शब्दों में मिलन की आस व्यक्त करने का सुन्दर प्रयास.साहित्य - शिल्पी की इस अनुपम प्रस्तुति के लिए हम आभारी हैं.
    किरण सिन्धु.

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  8. कौशिक जी,
    आपकी कविता 'पिया मिलन की आस' की नायिका का सजीव चित्र बड़ा ही मनोहारी है.प्रतीक्षारत आँखों में लज्जा के भाव तथा मधुर स्मृतियों के कारण होठों पर स्मित मुस्कान खिला कर आपके अन्दर के चित्रकार ने अपनी विलक्षण क्षमता का परिचय दिया है.बहुत कम शब्दों में मिलन की आस व्यक्त करने का सुन्दर प्रयास.साहित्य - शिल्पी की इस अनुपम प्रस्तुति के लिए हम आभारी हैं.
    किरण सिन्धु.

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  9. चित्र और कविता दोनों सराहनीय हैं

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  10. यह प्रयास निरंतर जारी रखने की कोशिश करें।

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  11. सुन्दर चित्र व मनोभावों से सजी कविता के लिये राजाभाई कौशिक बधाई के पात्र हैं.

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