रचनाकार परिचय:-
आगरा में जन्मी डॉ. रोली तिवारी मिश्रा पत्रकारिता एवं हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। आपने “लोक रंगमंच" पर शोधकिया है। बचपन से आपका कविता लेखन के साथ-साथ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुडाव रहा है। दैनिक जागरण में पत्रकार के तौर पर करियर की शुरुआत करने के बाद कुछ समय आकाशवाणी पर उदघोषिका रहीं। महाविद्यालय में पत्रकारिता विभाग में प्रवक्ता के तौर पर कुछ समय कार्य करने के बाद सैन्याधिकारी पति के साथ भारत के दूरदराज़ हिस्सों का सिंहावलोकन किया। स्वान्तः सुखाय लेखन भी साथ-साथ चलता रहा। वर्तमान में आप एक विद्यालय की प्रशासिका हैं।

तुम्हारे बिखरे से बाल,
जिन को अनायास सवांरते समय
तुम देख लेते थे, कनखियों से मुझे...
और शरारत से होंठों पर आई मुस्कान को दबा
सहजता का आवरण ओढ लेते...

तुम्हारे बिखरे से बाल,
जिन पर जब कभी फेरी मैंने अपनी उँगलियाँ
तो सिहर उठता तुम्हारा पूरा बदन
तुम्हारा मन् अकुला जाता,
एक छोटे बच्चे की तरह
मेरे सीने में छुप जाने को,
पर तभी, तुम भावनाओं को,
विवेक के पाश में बांध
हो जाते मौन, असहज होते हुए भी
सहजता का आवरण ओढ लेते ...

मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

53 comments:

  1. मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

    मधुर अहसास भरी कविता।

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  2. मनमोहक श्रंगारिक कविता। बहुत खूब रोली जी।

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  3. manmohak,dil ko loobhane wali, ek ek shabd aarth se paripoorn aur man ko goodgudane wala he.it is beautiful, soothig, full of meaning and appealing.this society willremain grateful of u for writing this doctor sahiba. in nutshell it is as cute as u r.harpal , happy khushi & harsh

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  4. ek bahut khoobsurat ahsaas,dil ke kareeb sa lagta hai,
    pyar ka anchhuaa ahsaas,,jahan bar bar sahaj hona padta hai...........
    bahut khoob.........badhai

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  5. तुम्हारे बिखरे से बाल,
    जिन पर जब कभी फेरी मैंने अपनी उँगलियाँ
    तो सिहर उठता तुम्हारा पूरा बदन
    तुम्हारा मन् अकुला जाता,
    एक छोटे बच्चे की तरह
    मेरे सीने में छुप जाने को,
    पर तभी, तुम भावनाओं को,
    विवेक के पाश में बांध
    हो जाते मौन, असहज होते हुए भी
    सहजता का आवरण ओढ लेते ...

    मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

    वाह बहुत खूब।

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  6. हिन्दी साहित्य मे़ प्रेमिका के केश पर इत्ना लिखा गया है कि नया कुछ भी लिख दो, नया पहले लिखे का आवर्तन प्रतीत होता है. यहा़ इस अह्सास को विस्तार मिला है प्रेमी के विखरे-विखरे केश, उन्हे़ स़वारने के बहाने प्रेमिका को निहारना और फिर मन मे़ आये सुखद अहसास से होठो़ पे आयी मुस्कान को काबू मे़ करना एक अवर्णनीय, अनुपम और अविस्मरणीय अनुभूति है. बहुत कम शब्दो मे़ विद्वान लेखिका डा.रोली तिवारी जी ने इसका सजीव चित्र खीचा है.

    दूसरे अन्तरे मे़ जिस स़यम का परिचय प्रेमी ने दिया है वो कवित को पवित्रता की नयी ऊचाई पर ले जाती है.
    एक वेहतरीन कविता के लिये बधाई. आप ऐसे ही लिख्ती रहे़.

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  7. shringaar aur prem ras pe purnatayaa dubi huyi ye rachanaa bahot hi samvedanshil.... wakai kesh ke baare me jitani baar likhi jayee har baar wo nayaa hi lagta hai bahot bahot badhaayee


    arsh

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  8. मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

    सुंदर कल्पना के माध्यम से रची बेजोड़ रचना है.....

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  9. मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल .....
    just great.......

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  10. aapki poem shandar he.....me pehle bhi apka bahut naam sun chuka hu..

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  11. Don’t limit yourself. Many people limit themselves to what they think they can do. You can go as far as your mind lets you. What you believe, remember, you can achieve.
    -- Mary Kay Ash....................................
    AND THAT'S WHAT YOU HAVE DONE...YOU ACHIEVED IT.....

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  12. this one's fantastic....i like it.....would like to see some more from you

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  13. Ek antar dil ki bhavana ko lekhni se shabdo ko khoobsurat roop dena kabile tareef hai. Shayad har dil ki avaj hai jisko lekhika ne saheja hai.

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  14. bahut badiya poem he....aap poets k dimag me itna sab kaise aa jata he!!

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  15. kaafi accha likha hai bahut saaf aur sahi sabdon mein ek ehsaas

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  16. मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल
    bhut hi sundar bhav liye kavita shabdo ki jitni saralta par aap ne dhyan diya hai utna hi kavita saras aur madhur ho gayi hai
    meri badhayi swikaar kare
    saadar
    praveen pathik
    9971969084

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  17. dr roli,ek bahut pratibhavaan lekhika hain,,jiss sahjta se ye apni baat kah jaati hain,wo apne aap main anoothhi hai............na to ye bhaari bharkam shabdon ke jaal main khoti hain,,na hi pathhkon ke dimag ki kasrat karvaati hain,,,,,bas sarlta aur sahjta se kuch kah jaati hain jo tapti dhoop main barish ki boondon jisa lagta hai,,,asha hai sahityashilpi main hum unhen aur padh paayenge.....badhai

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  18. abhinav kavita.........
    uttam kavita........

    kavita k sampoorna saundrya aur vaibhav se paripoorna komalkaant kavita...

    badhaai !

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  19. kitna sach kaha hai aapne..........
    kishoravastha main panpa pahla pahla pyaar,jahan kisi ko dekhne bhar se dil ki dhadkane badh jaati hain,phir uska muskarana...........aur jab kabhi kareeb aane ka mauka mile to """bhavnaon ko vivek ke paash main baandh maun ho jana"""sach main yahi to hai pyaar ki sachchi abhivyakti.......bahut sundar rachna .......bilkul aap ki hi tarah......

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  20. मुक्‍त-छंद या नई कविता के इस दौर में जो भी रचनायें आती हैं, आ रही हैं- इन तमाम रचनाओं में जो सबसे अच्छी बात मुझे लगती है वो इन रचनाओं का क्लाइमेक्स या सडेन-ट्विस्ट कहूँ या पंच-लाइन...रचनाकार जब अचानक से बात कह कर पाठक को भौंचक्का कर देता है और रचना सीधे दिल की गहराइयों तक उतरती चली जाती है।

    एक जबरदस्त और अनूठी प्रेम-कविता, मैम! आपको पहली बार पढ़ा है और आगे प्रतिक्षा रहेगी अपकी अन्य कविताओं की। पहली ही रचना पढ़कर आपसे अपेक्षा बहुत ज्यादा बढ़ गयी है, मैम....

    बधाई और समस्त शुभकामनायें।

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  21. सावन के मास में श्रींगार रस की कविता बहुत ही सार्थक ओर समयानुकूल लगी,बात सिर्फ जुल्फों के सजने सवरने की नहीं, न ही प्रेमी प्रेमिका के मध्य उपजे रूमानी भावों की है ,बात तो विवेक से भावों को बाँध कर असहज होते हुए भी सहज हो जाने में है ,जिस मर्यादा ओर अस्मिता का परिचय दिया गया है वह कविता के पात्रों के माध्यम से कवियित्री ने अपनी संस्कृति को नई परिभाषा देते हुए उसकी पवित्रता का निर्वाह किया है ओर भी ज्यादा पढने की इच्छा बलवती हो उठी है.बड़े ही स्वाभाविक शब्दों के माध्यम से अस्वाभाविक संयम का परिचय देती ये पंक्तिया कविता का श्रींगार बन गई है

    तुम भावनाओं को,
    विवेक के पाश में बांध
    हो जाते मौन, असहज होते हुए भी
    सहजता का आवरण ओढ लेते ...

    मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

    उत्तर देंहटाएं
  22. kya khoob kaha hai aapne.
    aisa prateet hota hai ki aap main kala va hunar koot koot kar bhara hua hai.itne saalon se thi kaha aap.hum to yehi dua karte hai ki aap yun hi likhtee rahe aur logon ki wawahi prapt kartee rahe.
    aap jaldee se apnee aur kavita prakashit karvayei jisse ki hame aur accha sahitya padne ko mile.

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  23. sahitya shilpi par aapki rachna pahli baar dekhne ko mili,bahut achchha laga,,,SADGI AUR SAYAM KE LIBAS MAIN LIPTA EK KHOOBSURAT AHSAAS''
    asha hai jaldi hi aapki aur rachnaon se roobaru honge ....shubhkamnaaye

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  24. सहज शब्दों को असहज गंभीर रूप दे कर सुन्दर रचना का निर्माण किया है आपने ... बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  25. sach kahooon kuch baat to the jo dil chho gayi,,jaise jaise pankti dar pankti aapko pada ek sahjta ka ahsaas hua,,
    hum sab ki zindgi main naa jaane kitne aise pal aate hain jinko hum mahsoos to karte hain ,,par kah nahin paate...........aapne kaha hai aur wo bhi bahut khoobsurti se,,bahut aanand aaya rachna padh kar...........badhai

    उत्तर देंहटाएं
  26. dr roli ji ,,aaj tak na jane kitne kaviyon ne premika ki zulfon,lat,keshon par na jaane kya kya kah dala hai...........par premi ke baalon ko lekar kiya gaya ye chitan sachmuch adhbhut hai...........ek baat aur lampt,kaami,lobhi jaise naam bhi purshon ko diye gaye hai.........par aapne purush ki ek nayi chhavi prastut ki hai jo """asahaj hote huye bhi sahjta ka aavran odh leta hai""" yahi iss kavita ki aatma hai...........bas aapki anya rachnaon ki besabri se pratiksha hai.............

    उत्तर देंहटाएं
  27. AB KYA LIKHOON MADAM SABHI KUCH TO LOGON NE LIKH DIYA HAI.............KUCH BACHA HEE NAHIN............
    BAS ITNA HEE, BAHUT ACHCHHA LAGA AAPKO PADH KAR,AGLI BAAR KOSHISH KAROONGA KI AAPKI RACHNA PAR JALDI SE JALDI KUCH KAHOON...........VARNA KUCH KAHNE KO NAHIN BACHEGA............THANKS FOR A GOOD POEM

    उत्तर देंहटाएं
  28. मुझे अच्छा लगता है यूँ तुम्हारा सहज होना
    और अच्छे लगते हैं तुम्हारे बिखरे से बाल

    good one

    उत्तर देंहटाएं
  29. Although I am not a big follower of the Literature, even than I liked your Poem very much...

    Keep writing such poems and keep entertaining us...

    उत्तर देंहटाएं
  30. kya baat hai maam ,bahut khoob,chha gayin aap to.......bahut khoobsurat hai ye ahsaas....

    उत्तर देंहटाएं
  31. OH MA'AM KYA LIKH DIYA AAPNE.............""NARI VIMARSH"" KE ZAMANE MAIN ""PURUSH VIMARSH""...PHIR TO SAARE PURSHON KA KHUSH HONA LAZMI HI HAI...BAHUT BADIYA....

    उत्तर देंहटाएं
  32. sab se pehle meri duaayien qubool karein.aaj aapko padha aur be-saakhta mooh se nikla waaa...h..
    aapke liye...ek sher
    Hum ek baat kahenge, agar bura na lage
    Khuda kare, tujhe is daur ki hawa na lage...
    AAMEEN.DR.ROSHAN BHARTI

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  33. WA WA KYA KHOOB KEH GAYI AAP.
    BAS AAPKI AUR RACHNAO KA INTZAAR HAI.
    ALL THE BEST.

    उत्तर देंहटाएं
  34. मैं हरि शर्मा जी टिप्पणी से सहमत हूँ। अब मुझे भी ऐसी ही कवितायें लिखनी चाहिये। तभी अपनी और पत्रिका की भी टी आर पी बढ़ेगी और साहित्य के नई दिशा में जाने को उद्धत होगा,साहित्य के नये आयाम का दिग्दर्शन भी होगा।

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  35. kal yunhi sahitya shilpi par pada aapko..............aur logon ki pratikriyayen bhi dekhi..........itni pratikriya dekhkar dobara pada............sirf ye jaanne ke liye ki kya khas hai iss kavita main jo itne logon ka dil lubha gayi...........bas itna hi paaya ""BAHUT SAHJATA SE AAP KUCH AISA KAH GAYIN JO DIL MAIN UTAR GAYA""

    उत्तर देंहटाएं
  36. PURUSH KE ISS SUNDARTAM ROOP KI PARIKALPNA KARNE KI LIYE HARDIK AABHAR............AAPKE LEKHAN KE UTTROTTAR VIKAS KI KAMNA KE SAATH.......PERM NARAYAN

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  37. bahut achchhi rachna badhai............

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  38. VERY NICE ROMANTIC POEM,,,,,,,,,,,,LIKED IT.......DO KEEP WRITING..........WAITING FOR THE NEXT ONE...............

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  39. ROLI JI,MAI KAVITAON KA BAHUT BADA PRASHANSHAK HOON,,APKI ISS RACHNA KO TEEN CHAR DINON MAIN KAI BAAR PADA,PARANTU APNI RAY KAISE DETE HAI NAHIN PATA THA............AAJ EK MITR SE POONCHHKAR LIKH RAHA HOON.....MAZA AA GAYA AAPKO PADKAR

    उत्तर देंहटाएं

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