रचनाकार परिचय:-


डॉ॰ कुँअर बेचैन का मूल नाम कुँअर बहादुर सक्सेना है।

आप की प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं- गीत-संग्रह: पिन बहुत सारे, भीतर साँकलः बाहर साँकल, उर्वशी हो तुम, झुलसो मत मोरपंख, एक दीप चौमुखी, नदी पसीने की, दिन दिवंगत हुए, ग़ज़ल-संग्रह: शामियाने काँच के, महावर इंतज़ारों का, रस्सियाँ पानी की, पत्थर की बाँसुरी, दीवारों पर दस्तक, नाव बनता हुआ काग़ज़, आग पर कंदील, आँधियों में पेड़, आठ सुरों की बाँसुरी, आँगन की अलगनी, तो सुबह हो, कोई आवाज़ देता है; कविता-संग्रह: नदी तुम रुक क्यों गई, शब्दः एक लालटेन, पाँचाली (महाकाव्य)

सबकी बात न माना कर
खुद को भी पहचाना कर

दुनिया से लडना है तो
अपनी ओर निशाना कर

या तो मुझसे आकर मिल
या मुझको दीवाना कर

बारिश में औरों पर भी
अपनी छतरी ताना कर

बाहर दिल की बात न ला
दिल को भी तहखाना कर

शहरों में हलचल ही रख
मत इनको वीराना कर

14 comments:

  1. "बारिश में औरों पर भी
    अपनी छतरी ताना कर "
    उम्दा .... छोटे बेहर की ग़ज़लों को इतना गहरा और प्रभावी बनाने के लिए जीवन दर्शन और आत्म-अनुभव चाहिए होता है ... काफी कुछ सिखाती हुई एक अनुपम कृति ... बेचैन साहब को नमन ..

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  2. या तो मुझसे आकर मिल
    या मुझको दीवाना कर
    महान कलम का लेखन।

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  3. दुनिया से लडना है तो
    अपनी ओर निशाना कर
    कमाल के शेर गहरी गहरी बात भरे। कुँअर बेचैन जी की शायरी पढना अनुभूति है। वे आज के रचनाकारों में अग्रणी स्थान रखते हैं।

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  4. बाहर दिल की बात न ला
    दिल को भी तहखाना कर

    उम्दा शेर। मज़ा आ गया।

    -विश्व दीपक

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  5. या तो मुझसे आकर मिल
    या मुझको दीवाना कर

    बारिश में औरों पर भी
    अपनी छतरी ताना कर

    बहुत खूब।

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  6. छोटी बहर में खूबसूरत ग़ज़ल...वाह.
    नीरज

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  7. मन को भा गयी यह रचना. छोटे लयखंड में बड़ी बात कहने के लिए महारथ चाहिए. कुँवर बेचैन जी इस युग के शिखर हस्ताक्षर हैं नमन.

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  8. सबकी बात न माना कर
    खुद को भी पहचाना कर

    दुनिया से लडना है तो
    अपनी ओर निशाना कर
    ....Lajwab prastuti !!

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  9. या तो मुझसे आकर मिल
    या मुझको दीवाना कर

    gagar me sagr...........hai ye pankti

    bahut khubbbbbbbbb

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