रचनाकार परिचय:-


प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं।
आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' - दो काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।


क्यों न घोलें कानों में रस मदभरी पुरवाईयाँ
बज रही हैं घर सजन के सुबह से शहनाईयाँ

छू नहीं पाया अभी आकाश की ऊंचाइयां
ख़ाक छूएगा कोई पाताल की गहराइयां

इतना भी नादाँ किसीको समझिये मत साहिबो
हर किसी में होती हैं थोड़ी-बहुत चतुराइयां

खुद से करके देखिएगा प्यार से बातें कभी
आपको प्यारी लगेंगी आपकी तन्हाइयां

हर घड़ी आँखें बिछाने वाले सबकी राहों में
क्यों न भाएँगी सभी को आपकी पहुनाइयां
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झूमती हैं डालियाँ पुरवाईयों में
क्यों न कूकें कोयलें अमराईयों में

जिंदगानी को बिताएं सादगी से
क्या रखा है दोस्तो चतुराईयों में

जी में आता है कि सुनता ही रहूँ मैं
डूबा हूँ कुछ इस तरह शहनाईयों में

इम्तिहान उनका न लो ऐ दोस्तो तुम
जी रहे हैं लोग जो कठिनाईयों में

ढूँढ लाते हैं वहां से भी बहुत कुछ
जाते हैं जो झील की गहराईयों में
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19 comments:

  1. आदरणीय प्राण जी की लाजवाब ग़ज़लें ने आज महका दिया है साहित्य शिल्पी को .........
    हम अदना बस इतना ही कह सकते हैं की हर शेर पढने के बाद बस "वाह वाह, कमाल और क्या बात है" ही निकल रहा है...... उनकी तो ग़ज़लें पढ़ कर ही बहूत कुछ सीखने को मिल रहा है .............. प्रणाम है हमारा

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  2. सच शर्मा जी, कभी कभी तन्हाइयां भी बहुत प्यारी लगती हैं.

    बहुत खूब गज़लें-

    बधाई,

    चन्देल

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  3. प्राण शर्मा जी की दोनों ग़ज़लें सहेजने के योग्य हैं. शर्मा जी एक उच्च कोटि के गज़लकार हैं ग़ज़लों में सरल शब्दों में गहरी बातें समझा देते हैं. रोचकता, प्रवाह और भावाभिव्यक्ति तो देखते ही बनती हैं.

    खुद से करके देखिएगा प्यार से बातें कभी
    आपको प्यारी लगेंगी आपकी तन्हाइयां

    इम्तिहान उनका न लो ऐ दोस्तो तुम
    जी रहे हैं लोग जो कठिनाईयों में

    बहुत ही सुन्दर आला दर्जे के आशा'र हैं.
    प्राण जी को इन ग़ज़लों के लिए बधाई और साहित्य शिल्पी को ऎसी सुन्दर ग़ज़लों के पढ़वाने के लिए धन्यवाद.

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  4. साहित्य शिल्पी से शिकायत है कि इस बार प्राण जी को प्रस्तुत करने में बहुत देर की गयी है।एसी नायाब गज़लें कि हर शेर पर वाह कर उठी।

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  5. खूबसूरत गजलें।बहुत खूब सर ,क्या बात है!!!आपतो लगातार श्रेष्ठता का सोपान कर रहे हैं,मेरी हार्दिक बधाईयाँ!

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  6. खुद से करके देखिएगा प्यार से बातें कभी
    आपको प्यारी लगेंगी आपकी तन्हाइयां
    ****
    इम्तिहान उनका न लो ऐ दोस्तो तुम
    जी रहे हैं लोग जो कठिनाईयों में

    बेहद सादा ज़बान में कमाल के गहरे शेर....ये ही तो वो शायरी है जिसे उस्तादों की शायरी कहते हैं...देखन में छोटे लगें...घाव करें गंभीर...वाह...गुरुदेव की शान में क्या कहूँ...मैं इस लायक कहाँ की प्राण साहेब की शायरी पर कुछ कह सकूँ ,मैं खुशकिस्मत हूँ की मुझे उन्हें पढने का मौका मिलता रहता है...
    नीरज

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  7. आदरणीय प्राण शर्मा जी की ग़ज़ले साहित्य शिल्पी पर हमेशा ही महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ रही हैं। उनकी रचनायें उनके अपार अनुभव समुद्र से निकलती हैं और पाठक को तिरोहित कर देती हैं। मुझे ये शेर खास पसंद आये:-


    इतना भी नादाँ किसीको समझिये मत साहिबो
    हर किसी में होती हैं थोड़ी-बहुत चतुराइयां

    खुद से करके देखिएगा प्यार से बातें कभी
    आपको प्यारी लगेंगी आपकी तन्हाइयां

    इम्तिहान उनका न लो ऐ दोस्तो तुम
    जी रहे हैं लोग जो कठिनाईयों में

    ढूँढ लाते हैं वहां से भी बहुत कुछ
    जाते हैं जो झील की गहराईयों में

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  8. बेहद खूबसूरत गज़लें. क्या बात है.

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  9. साहित्य शिल्पी के मंच पर पधारे सभी ने मुक्त कंठ से प्राण भाई साहब की रचना को सराहा है शहनाईयों का स्वर मुखरित हो गया ऐसी मधुरता बिखरी है अत: इन को प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
    स स्नेह, सादर,
    - लावण्या

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  10. MAIN ANANYA JEE,ARSHIA ALI JEE,
    AADARNIY MAHAVIR JEE,ROOP SINGH
    CHANDEL JEE,SUSHEEL KUMAR JEE,KAVI
    KULWANT JEE,RAJIV RANJANPRASHAD JEE,NEERAJ GOSWAMIJEE AMITAABH MEET
    JEE AUR ANYA SUDHEE SPATHKON KAA HRIDAY
    SE AABHAAREE HOON KI INHONNE APNAA-
    AAPNA KEEMTEE SAMAY MEREE GAZALON KO PADHNE MEIN DIYAA HAI.SABHEE
    KHUSH RAHEN,MEREE SHUBH KAMNA HAI.

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  11. ABOVE AAL,MEREE BAHAN SHRESHT
    KAVYITRI LAVANYA JEE KAA AABHAAREE
    HOON.

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  12. हैँ यह कविताऐँ नेहायत दिलनशीन
    प्राण शर्मा आफरीँ सद आफरीन

    इन मेँ असरी आगही की है झलक
    इनका है रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल बेहतरीन

    अहमद अली बर्क़ी आज़मी

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  13. ये दोनों ही ग़ज़लें नये सीखने वालों के लिये बहुत काम की हैं । एक ही प्रकार के काफिये को केवल मात्रा लगा कर प्रयोग करना ये एक अनूठा काम है । जो उस्‍ताद शायरों के ही बस का है । मेरे विचार से पहुनाइयां वाला काफिया और उसका शेर दानों ही जबरदस्‍त हैं । पहुनाइयां और चतुराइयां काफियों का प्रयोग नये लिखने वालों के लिये एक उदाहरण है कि काफियों की तलाश करने के लिये उर्दू के शब्‍दकोश के स्‍थान पर भाषा के प्रचलित शब्‍दों में तलाश करने से कितना आनंद बरसता है । साहित्‍य शिल्‍पी का आभार दो सुंदर रचनाएं पढ़वाने के लिये । प्राण जी के लिये क्‍या बोलूं उनकी बात करने के लिये मेरे पास शब्‍दों का टोटा होता है । हिमालय की चर्चा सामान्‍य पहाडि़यां नहीं कर सकतीं ह।

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  14. PANKAJ SUBEER JEE,Dr.AHMAD ALI
    BARQEE AAZMEE JEE,MOHINDER KUMAR JEE AUR DIGAMBAR NASWA JEE KAA BHEE
    AABHAAREE HOON MAIN.SABKEE TIPPANIYON NE MUN KO MOH LIYA HAI.

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  15. प्राण जी !
    देर आयद दुरुस्त आयद.. कभी नहीं से देर भली...आज ५ स्थानों पर झंडा वन्दन के बाद साहित्य शिल्पी से जुड़ पाया हूँ. आपकी गज़लों को पढ़कर मन तरोताजा हो गया. आपकी कलम का कमाल है. हम नौसिखियों के लिए ये गजलें पाठ्य पुस्तक के अभ्यास की तरह मार्ग दर्शक हैं.

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