महज़ अलफाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता
कोई पेशा, कोई व्यवसाय नही है कविता।

कविता शौक से भी लिखने का नहीं
इतनी सस्ती भी नहीं, इतनी बेदाम नहीं।

कविता इंसान के ह्रदय का उच्छ्वास है,
मन की भीनी उमंग, मानवीय अहसास है।

कभी भी कविता विषय की मोहताज़ नहीं
नयन नीर है कविता, राग -साज़ भी नहीं।

कभी कविता किसी अल्हड योवन का नाज़ है
कभी दुःख से भरी ह्रदय की आवाज है|

कभी धड़कन तो कभी लहू की रवानी है
कभी रोटी की , कभी भूख की कहानी है|

मुफलिस ज़िस्म का उघडा हुआ बदन है कभी
बेकफन लाश पर चदता हुआ कफ़न हैं कभी।

बेबस इंसान का भीगा हुआ नयन है कभी,
सर्दीली रात में ठिठुरता हुआ तन है कभी।

कविता बहती हुई आंखों में चिपका पीप है,
कविता दूर नहीं कहीं, इंसान के समीप है।

महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं ही कविता,
कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कविता॥

7 comments:

  1. Kavita ke mahatv ko aapne jis dhang se samjhaya hai wakayi sarahniy hai..

    kavita ki mahanata khud me ek sundar kavita ban gayi..

    badhayi..

    उत्तर देंहटाएं
  2. मेरे मन की बात लिखी है आपने |
    यही मै भी मानता हूँ - हर रचना काव्य नहीं है | इस विषय पर चर्चा छेड़ने के लिए बधाई |

    २ बरस पहले किसी ख्याल से मैंने काव्य के उद्भव के विषय में कुछ ऐसा सोचा था -



    कविता कब बनती है ?

    जब मन पवित्र बनता है,
    विवेक शुद्ध होता है,

    हाथों मे हलचल होती है,
    चिंतन की धड़कन बढ़ती है,

    जब आशीर्वाद देती है सरस्वती,
    तब कविता कोई है बनती |


    आपको बधाई |

    अवनीश तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  3. कविता बहती हुई आंखों में चिपका पीप है,
    कविता दूर नहीं कहीं, इंसान के समीप है।

    महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं ही कविता,
    कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कविता॥

    कविता की सटीक और सशक्त व्याख्या है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. महज़ अल्फाज़ से खिलवाड़ नहीं ही कविता,
    कोई पेशा, कोई व्यवसाय नहीं है कविता॥
    दीपक जी बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कविता पर बहुत प्रभावी पंक्तिया गढी है। आपके विचारो पर चर्चा होनी चाहिये।

    उत्तर देंहटाएं
  6. कविता बहती हुई आंखों में चिपका पीप है,
    कविता दूर नहीं कहीं, इंसान के समीप है।

    LAJAWAAB, KHOOBSOORAT RACHNA HAI....... SACH MEIN KAVITA KOI MAZAAK NAHI HAI.....

    उत्तर देंहटाएं

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