रचनाकार परिचय:-
वर्तमान में फरीदाबाद में निवास कर रहे अजय अक़्स एक उभरते हुए गज़लकार हैं। अब्दुल रहमान "मन्सूर" जैसे उस्ताद शायर से गज़ल की बारीकियाँ समझने वाले अक़्स विशेष रूप से छोटी बहर की गज़लें कहने में सिद्धहस्त हैं।

नशा अब तक भी मुझ पे तारी है
खूब चश्म-ए-अदा तुम्हारी है

दफ़न चुपके से कर दिया मुझको
उसने सर से बला उतारी है

ज़िन्दगी देख आईना फिर से
ज़ुल्फ हमने तेरी सँवारी है

उन से कह दो कहीं भी जायें अब
हमने उनकी नज़र उतारी है

मक़तब-ए-दाग के हैं हम तालिब
और उर्दू ज़ुबाँ हमारी है

ज़िन्दगी दाँव मत लगा उस पे
’अक़्स’ हारा हुआ जुआरी है

14 comments:

  1. दफ़न चुपके से कर दिया मुझको
    उसने सर से बला उतारी है

    ज़िन्दगी देख आईना फिर से
    ज़ुल्फ हमने तेरी सँवारी है

    माशाअल्लाह!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह बडी गहरी पंक्तिया हैं

    ज़िन्दगी देख आईना फिर से
    ज़ुल्फ हमने तेरी सँवारी है

    उत्तर देंहटाएं
  3. आहा.........
    शानदार ग़ज़ल......

    दफ़न चुपके से कर दिया मुझको
    उसने सर से बला उतारी है

    क्या कहने !

    अभिनन्दन !

    उत्तर देंहटाएं
  4. ज़िन्दगी दाँव मत लगा उस पे
    ’अक़्स’ हारा हुआ जुआरी है

    हर शेर नपा तुला और नायाब।

    उत्तर देंहटाएं
  5. खूबसूरत अशआरों से सजी ग़ज़ल ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. nvodit rchnakaron ko protsahn milna hi chahiye achchha hai
    aks ydi urdu juban ye hi ho jaye to kitan achchha ho ydi is urdu ko isi lipi men likh diya jaye to kitna achchha ho jo aap ne kha hai use ydi aap sahs se kh sken to thhik hai vrna pta nhi aap kyon hindi ko urdu bta rhe hai smj nhi aaya aap ki kya mjboori hai aakhir urdu hai kya phle yh to btao tbhi to aap ki jban urdu mani jayegi ya aap ke ustad kule dil ke insan mere dos rhmaan bhai kh den esa pryas phle bhi ho chuka hai sije kuch logon ne nkar diya thha aap is ke liye pryas kren ya to devnagri lipi ko hindi mane ya urdu ki lipi btaye is ke liye aachary ramchndr shukl ka bhasha smbndhi lekh drshtvy hai
    tumhara shubh ho
    dr. ved vyathit

    उत्तर देंहटाएं
  7. ज़िन्दगी देख आईना फिर से
    ज़ुल्फ हमने तेरी सँवारी है

    BAHOOT HI ACHHE SHER HAIN ... KHOOBSOORAT HAI GAZAL ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. अजय अक्स को पहली बार पढा और पहली ही प्रस्तुति नें प्रभावित किया

    उत्तर देंहटाएं
  9. अजय जी,
    कोशिश काबिलेतारीफ़ है.आपकी ग़ज़ल में एक हारे हुए इंसान का दर्द और जिन्दगी से उम्मीद दोनों है.
    ---किरण सिन्धु.

    उत्तर देंहटाएं
  10. कितने सुंदर भाव पिरोए आपने..बेहतरीन ग़ज़ल अजय जी बहुत बढ़िया लिखते है..अच्छा लगा पढ़ कर...धन्यवाद!!!

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  11. Ghazal Hai isme, Bahut dino baad Sahitya Shilpi par vakai Koi Ghazal mili, Thanks.

    Shakti

    उत्तर देंहटाएं
  12. उन से कह दो कहीं भी जायें अब
    हमने उनकी नज़र उतारी है

    बहुत खूब..भाई वाह...बहुत पसंद आयी आपकी ग़ज़ल...
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं

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