ब्ळॉगिंग का आकर्षण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। जहाँ वेबसाइट में सामान्यतया एकतरफा सम्प्रेषण होता है, वहीं ब्ळॉगिंग में यह लेखकीय-पाठकीय दोनों स्तर पर होता है। ब्ळॉग सिर्फ जानकारी देने का साधन नहीं बल्कि संवाद का भी सशक्त माध्यम है। ब्ळॉगिंग को कुछ लोग खुले संवाद का तरीका मानते हैं तो कुछेक लोग इसे निजी डायरी मात्र। ब्ळॉग को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में कुछ इस प्रकार परिभाषित किया गया है-‘‘एक इंटरनेट वेबसाइट जिसमें किसी की लचीली अभिव्यक्ति का चयन संकलित होता है और जो हमेशा अपडेट होती रहती है।‘‘

रचनाकार परिचय:-

आकांक्षा यादव अनेक पुरस्कारों से सम्मानित और एक सुपरिचित रचनाकार हैं।

राजकीय बालिका इंटर कालेज, कानपुर में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत आकांक्षा जी की कवितायें कई प्रतिष्ठित काव्य-संकलनों में सम्मिलित हैं।

आपने "क्रांति यज्ञ: 1857 - 1947 की गाथा" पुस्तक में संपादन सहयोग भी किया है।

वर्ष 1999 में आरम्भ हुआ ब्ळॉग वर्ष 2009 में 10 साल का सफर पूरा कर चुका है। गौरतलब है कि पीटर महोर्त्ज ने 1999 में ‘वी ब्ळॉग‘ नाम की निजी वेबसाइट आरम्भ की थी, जिसमें से कालान्तर में ‘वी‘ शब्द हटकर मात्र ‘ब्ळॉग‘ रह गया। 1999 में अमेरिका में सैनफ्रांसिस्को में इण्टरनेट में ऐसी अनुपम व्यवस्था का इजाद किया गया, जिसमें कई लोग अपनी अभिव्यक्तियाँ न सिर्फ लिख सकें बल्कि उन्हें नियमित रूप से अपडेट भी कर सकें। यद्यपि कुछ लोग ब्ळॉग का आरम्भ 1994 से मानते हैं जब एक युवा अमेरिकी ने अपनी अभिव्यक्तियाँ नियमित रूप से अपनी वेबसाइट में लिखना आरम्भ किया तो कुछ लोग इसका श्रेय 1997 में जान बारजन द्वारा आरम्भ की गई वेबलाग यानी इण्टरनेट डायरी को भी देते हैं। ब्ळॉग की शुरुआत में किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन ब्ळॉग इतनी बड़ी व्यवस्था बन जायेगा कि दुनिया की नामचीन हस्तियाँ भी अपनी दिल की बात इसके माध्यम से ही कहने लगेंगी। आज पूरी दुनिया में 13.3 करोड़ से ज्यादा ब्ळॉगर्स हैं तो भारत में लगभग 32 लाख लोग ब्ळॉगिंग से जुड़े हुए हैं। इनमें करीब 12 हजार हिन्दी ब्लागर हैं।


ब्ळॉगिंग का क्रेज पूरे विश्व में छाया हुआ है। अमेरिका में सवा तीन करोड़ से ज्यादा लोग नियमित ब्ळॉगिंग से जुड़े हुए हैं, जो कि वहाँ के मतदाताओं का कुल 20 फीसदी हैं। इसकी महत्ता का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2008 में सम्पन्न अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान इस हेतु 1494 नये ब्ळॉग आरम्भ किये गये। तमाम देखों के प्रमुख ब्ळॉगिंग के माध्यम से लोगों से रुबरु होते रहते हैं। इनमें फ्रांस के राष्ट्र्पति सरकोजी और उनकी पत्नी कार्ला ब्रूनी से लेकर इरान के राष्ट्र्पति अहमदीनेजाद तक शामिल हैं। भारत में राजनेताओं में लालू प्रसाद यादव, लाकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला तो फिल्म इण्डस्ट्री में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान, मनोज बाजपेई, प्रकाश झा, शिल्पा शेट्टी, सेलिना जेटली, विक्रम भट्ट, अक्षय कुमार, अरबाज खान इत्यादि के ब्ळॉग मशहूर हैं। साहित्य व पत्रकारिता से जुडे तमाम नाम- उदय प्रकाश, गिरिराज किशोर, विष्णु नागर, पुण्य प्रसून वाजपेई, रवीश कुमार, आलोक पुराणिक, अशोक चक्रधर, सुरेन्द्र किशोर, गीत चतुर्वेदी, कुमार अम्बुज, पंकज चतुर्वेदी, गिरीश कुमार मौर्य, मनीषा, प्रत्यक्षा, प्रतिभा कटियार, सूरज प्रकाश, लाल्टू, प्रियदर्शन, अखिलेश कुमार मिश्र ‘बोधिसत्व‘, योगेन्द्र मौद्गिल इत्यादि अपने ब्ळॉग के माध्यम से पाठकों से नित्य रुबरु हो रहे हैं। प्रशासन के साथ-साथ साहित्य में दिलचस्पी रखने वाले प्रशासनिक अधिकारी भी ब्ळॉगिंग में जौहर दिखा रहे हैं। इनमे विभूति नारायण राय, कृष्ण कुमार यादव; शब्द सृजन की ओर, कमलेश भट्ट कमल; शंख सीपी रेत पानी, अरविंद कुमार जैसे नाम चर्चा में लिये जा सकते हैं। सेलिब्रिटी के लिए ब्ळॉग तो बड़ी काम की चीज है। परम्परागत मीडिया उनकी बातों को नमक-मिर्च लगाकर पेश करता रहा है पर ब्ळॉगिंग के माध्यम से वे अपनी वास्तुस्थिति से लोगों को अवगत करा सकते हैं।

ब्ळॉगिंग का दायरा परदे की ओट से भी बाहर निकल रहा है। कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ गृहिणियाँ भी इसमें खूब हाथ आजमा रही हैं। चोखेरबाली एवं नारी जैसे ब्लागों पर नारियों से जुड़े मुद्दों पर जमकर बहस हो रही है। तमाम कम्युनिटी ब्लाग लोगों की बातों को समाज के समक्ष रखने के माध्यम बन चुके हैं- मोहल्ला, भड़ास, युवा, नुक्कड़, चिट्ठा चर्चा, हिन्दोस्तान की आवाज इत्यादि। रचनाकार, साहित्यशिल्पी, सार्थक सृजन, हिन्दी साहित्य मंच, नई कलम-उभरते हस्ताक्षर जैसे ब्ळॉग साहित्यिक रचनाधर्मिता को बखूबी बढ़ावा दे रहे हैं। ‘‘हिन्दी ब्ळॉग टिप्स‘‘ पर तमाम नुस्खे हैं तो ‘‘माँ‘‘ ब्ळॉग माँ से जुड़ी रचनाओं को प्रस्तुत कर रहा है। जब मम्मी-पापा ब्लागिंग कर रहे हों तो बच्चे भला कैसे पीछे रहें। अब बच्चों के लिए भी तमाम ब्ळॉग सुन्दर रचनायें प्रस्तुत कर रहे हैं- बाल-मन, बाल सजग, नन्हा मन, नन्हे मुन्हें, फुलबगिया इत्यादि। स्वयं बच्चे भी ब्ळॉगिंग में कूद पड़े हैं, देखिये न- पाखी की दुनिया, आदित्य इत्यादि। आइ0टी0 वालों की तो छोड़िए, यहाँ प्राइमरी का मास्टर और डाकिया बाबू भी ब्लागिंग कर रहे हैं। खेती-बाड़ी भी ब्लाग पर है। यदुवंशियों से जुड़ा यदुकुल ब्लाग और दलितों से जुड़ा दलित मत ब्लाग भी चर्चित है। यानी कि नेता, अभिनेता, प्रशासक, सैनिक, खिलाड़ी, पत्रकार, बिजनेसमैन, डाक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, साहित्यकार, कलाकार, विद्यार्थी से लेकर बच्चे, युवा, वृद्ध, नारी-पुरुष व किन्नर तक ब्लागिंग में हाथ आजमा रहे हैं। ‘‘युवा‘‘ ब्लाग ने तो बकायदा ऐसे ब्लागर्स की सूची ही साइड में दे रखी है।

ब्ळॉगिंग का एक बहुत बड़ा फायदा प्रिंट मीडिया को हुआ है। अब उन्हें किसी के पत्रों एवं विचारों की दरकार महसूस नहीं होती। ब्लाग के माध्यम से वे पाठकों को समसामयिक एवं चर्चित विषयों पर जानकारी परोस रहे हैं। तमाम पत्र-पत्रिकाएं तो कट-पेस्ट तकनीक का उपयोग भी बखूबी कर रही हैं। फिलहाल, इस मुद्दे पर तो सभी सहमत होंगे कि प्रिंट मीडिया ब्लागरों की महत्ता को समझने लगा है और ब्लागों की चर्चा प्रिंट मीडिया में जमकर होने लगी है। हिन्दुस्तान, अमर उजाला, आई नेक्स्ट, राष्ट्रीय सहारा, दस्तक, हरिभूमि, गजरौला टाइम्स, आज समाज इत्यादि जैसे अखबारों और तमाम प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं ने भी नियमित रूप ब्लागों की चर्चा आरम्भ कर दी है। इसी क्रम में ‘‘प्रिंट मीडिया पर ब्लाग चर्चा‘‘ नाम से एक ब्लाग ने इन सब को सहेजना भी आरंभ कर दिया है। हर पत्र-पत्रिका हमारी निगाहों से गुजर तो नहीं सकती पर इस ब्लाग के चलते इतनी आसानी अवश्य हो गई है कि बैठे-बैठे पता लग जाता है कि अपने ब्लाग और अन्य ब्लागों की चर्चा कहाँ-कहाँ हो रही है। सबसे खुशी की बात तो यह है कि ब्लागरों के सुख-दु:ख को बाँटने वाले ब्लाग भी अस्तित्व में आ चुके हैं। ‘‘हिन्दी ब्लागरों के जन्मदिन‘‘ पर लोगों के जन्मदिन व सालगिरह की खूब चर्चायें हो रही हैं। पत्र-पत्रिकाओं के नये अंकों की चर्चा ‘‘कथाचक्र‘‘ में देखी जा सकती है तो पर्व-त्यौहार ‘‘उत्सव के रंग‘‘ में रंग बिखेर रहे हैं। शब्दों का सफर, शब्द शिखर, शब्द सृजन की ओर, उड़न तश्तरी, मल्हार, मेरी भावनाएं, नीरज, लावण्यम्-अन्तर्मन, शब्दकार, नवसृजन, हारमोनियम इत्यादि तमाम ब्लाग शब्दों के रंग बिखेर रहे हैं। ब्लाग के माध्यम से समाज का सुख-दु:ख भी बाँटा जा सकता है। कई बार प्राकृतिक आपदाओं इत्यादि के समय सहायता के लिए ब्लाग का इस्तेमाल किया जाता है। कोइ ब्लागर ‘‘ज्योतिष की सार्थकता‘‘ और ‘‘गत्यात्मक ज्योतिष‘‘ की बात कर रहा है तो साइंस ब्लार्गस एसोसिएशन विज्ञान को बढ़ावा दे रहा है। कार्टून से लेकर पेटिंग तक ब्लाग पर दिख रही हैं। पर जो भी हो ब्लागिंग की दुनिया ने लोगों को एक ऐसा मंच मुहैया कराया है जहाँ वे बिना किसी खर्च और बंदिश के अपनी बात कह सकते हैं। ऐसे ही तमाम भाव हैं जो ब्लागिंग की दुनिया में देखे-सुने जा सकते हैं। पर इसी की आड़ में तमाम नकारात्मक लोग भी ब्लागिंग से जुड़ रहे हैं। ऐसे में अपनी किसी निजी बात या निजी जानकारी मसलन इ-मेल, पता, फोन नम्बर को शेयर करना खतरनाक भी हो सकता है। ब्लाग सिर्फ राजनैतिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक-कला-सामाजिक गतिविधियों के लिए ही नहीं जाना जाता बल्कि, तमाम कारपोरेट ग्रुप इसके माध्यम से अपने उत्पादों के संबंध में सर्वे भी करा रहे हैं। वास्तव में देखा जाय तो ब्लाग एक प्रकार की समालोचना है, जहाँ पाठक आपके गुण-दोष दोनों को अभिव्यक्त करते हैं।

आज ब्लाग परम्परागत मीडिया का एक विकल्प बन चुका है। ब्लागर |www.blogger.com), वर्डप्रेस (www.wordpress.com) तथा माइस्पेस, (www.myspace.com) ब्लागिंग की दुनिया में चर्चित नाम हैं। ब्लाग.कॉम, बिगअड्डा, माई वेब दुनिया, याहू ;याहू 360 , रेडिफ ;आईलैण्ड, माइक्रोसाफ्ट ;स्पेसेजद्ध, टाइपपैड, पिटास, रेडियो यूजरलैंड इत्यादि भी ब्लागिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। आज ट्विटर द्वारा 140 शब्दों तक माइक्रो-ब्लागिंग भी की जा रही है। ऐसे में कोइ भी नेट-यूजर आसानी से ब्लागिंग आरम्भ कर सकता है और अपनी अभिव्यक्तियों को सूचना-संजाल के इस दौर में हर किसी तक पहुँचा सकता है।

18 comments:

  1. ब्लॉगिंग पर एक विस्तृत आलेख. पढ़कर अच्छा लगा.

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  2. सुन्दर! विस्तार से लिखा लेख।

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  3. आलेख सारगर्भित एवं सूचना परक है
    शुक्रिया

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  4. 'ळ' को 'ल' करिए।
    कुछ जगहों पर स्खलन बर्दाश्त नहीं होता, यह उनमें से एक जगह है।

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  5. हिन्दी ब्ळॉगिंग पर सम्पूर्ण आलेख।

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  6. बलागिन्ग पर बहुत बडिया जानकारी के लिये आभार्

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  7. आकांक्षा जी,
    इस आलेख के माध्यम से आपने अच्छी व सटीक जानकारी उपलब्ध करायी, धन्यवाद |
    अम्बरीष श्रीवास्तव
    ambarishji@gmail.com
    दूरभाष: ०९४१५०४७०२०

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  8. हिन्दी ब्ळोगिंग के लगभग सभी हिस्सों को आपने छुआ है। आलेख के लिये बधाई।

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  9. आकांक्षा जी आपने एक कुशल पत्रकार वाली दक्षता दिखायी है और संक्षेप में सारी बाते कह दी हैं।

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  10. ब्लागिंग के आरंभ तथा हिन्दी भाषा में उसकी वर्तमान स्थिति पर एक अच्छा आलेख!

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  11. अच्छी और बहुत विस्तृत जानकारी मिली..ब्लोगिंग के हर पहलू को बहुत अच्छी तरह समेटा है..शुक्रिया

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  12. akanksha ji aapka yaha aalekha "ब्ळॉगिंग का बढता आकर्षण [आलेख] pasand aaya, accha laga, ise ratlam, jhabua(M.P.) ayr dahid (gujarat) se prakashit Dainik Prasaran me praskashit kar rahoo hoo....

    just aapki jankari ke liyen

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  13. ब्लॉग, ब्लोगिंग और हिंदी ब्लोगरी के सम्बन्ध में सूचनाप्रद आलेख के लिए आभार

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