रचनाकार परिचय:-

मोहिन्दर कुमार का जन्म 14 मार्च, 1956 को पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में हुआ। आप राजस्थान यूनिवर्सिटी से पब्लिक-एडमिन्सट्रेशन में स्नातकोत्तर हैं।

आपकी रचनायें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं साथ ही साथ आप अंतर्जाल पर भी सक्रिय हैं। आप साहित्य शिल्पी के संचालक सदस्यों में एक हैं। वर्तमान में इन्डियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड में आप उपप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।
बात लच्छों में लपेट कर कहनी मुझे आई नहीं
और इस दुनिया को मेरी साफ़गोई भाई नही
मैं यूहीं चलता रहा जमाने से कुछ अलग हट कर
मुझे खुशी है बजूद से अपने, मैं कोई परछांई नही

महलों में घूमने से कब किसे यहां खुशी है मिली
बहार आने पर तो जंगल में भी हर कली है खिली
जो आराम थक कर खुली जमीन पर पसर जाने से है
वो लज्जत किसी ने मखमली बिस्तर मे भी पाई नहीं

मन के हालात तय करते हैं खुशी व गम का पैमाना
बांटने से और बढता है मुस्कराहटों का यह खजाना
एक बार गिरने से कोई मायूस होता उम्र भर के लिये
क्या बहुतेरों ने यहां बिना बैसाखी लाचारी निभाई नहीं

अंधेरों को देखना हो तो देखना उजालों का सपना ले कर
मिल जाये रोशनी तो चलना अंधेरों की यादें साथ ले कर
मुफ़लिसी हजार दर्जे बेहतर है किसी बहकी हुई अमीरी से
जमीर को हमेशा आग समझना महज एक दियासलाई नही

5 comments:

  1. महलों में घूमने से कब किसे यहां खुशी है मिली
    बहार आने पर तो जंगल में भी हर कली है खिली
    जो आराम थक कर खुली जमीन पर पसर जाने से है
    वो लज्जत किसी ने मखमली बिस्तर मे भी पाई नहीं

    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  2. bnjare ki trh jindgi din 2 bhtki meri
    subh khin thi rat khin thi khin duphri meri
    yh schchai thi jivn ki chlna mujh ko tha hi
    kaise hl krta apni me jivn kthin pheli


    spno kimn me koi tsvir bnai hogi
    duniya ki tsviren us se khoob milai hongi
    pr kitna mushkil hota hai us moort ka milna jis ne spno me aa kr kr nind udi hogi
    bhai mahendr ji ko bhut 2 bdhai
    dr.vedvyathit@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खूब मोहिन्दर कुमार जी
    अंधेरों को देखना हो तो देखना उजालों का सपना ले कर
    मिल जाये रोशनी तो चलना अंधेरों की यादें साथ ले कर
    बढ़िया- बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. अंधेरों को देखना हो तो देखना उजालों का सपना ले कर
    मिल जाये रोशनी तो चलना अंधेरों की यादें साथ ले कर


    मोहिन्दर जी !
    बहुत खूब.....

    उत्तर देंहटाएं

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