जो मर गये या मार दिये गये
वे तराजू के पलड़ों की तरह हैं
जिन्हें तौला जाता रहा है
बारी-बारी
कम और ज्यादा की तरह ।

फर्क सिर्फ इतना है कि
कुछ भुला दिये गये थे मरने से पहले
और कुछ भुला दिये जायेंगे मरने के बाद
हमेशा के लिये ।

रहेगी तो बस गिनती
उन सभी जमा सरकारी कागजों में
जो धूल चाटते हैं
बंद किसी कोने में ।

बावजूद इसके
भूख और नंगेपन के साथ
फिर से जमा हो जायेंगे
हाथ में बन्दूक लिए
मर गये या मार दिये गये
श्रेणी के लिए
अनगिनत उम्मीदवार

तुम बस खुश रहना
क्योंकि
फिलहाल तुम उनमें से कोई नहीं

4 comments:

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