श्रीमदभागवत गीता पर आधारित स्थायी स्तंभ - अजय कुमार

गतांक से आगे... अवाच्यवादांश्च बहूंवदिष्यंति तवाहिता:। निन्दंतस्तव सामर्थ्य ततो दु:खतरं नु किम्॥36॥ अनुवाद:- और तेरे शत्रु, तेरे प्रराक्र...

पं. श्रीधर पाठक {हमारी धरोहर} [बाल शिल्पी अंक - 4] - डॉ. मो. अरशद खान

प्यारे बच्चों, "बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको अपनी धरोहर से परिचित करायेंगे। आज आप जानेंगे रचनाकार पं श्रीधर ...

एक देश हैं एक वतन हैं  [बाल-गीत] - प्रभुदयाल श्रीवास्तव

मिले हाथ से हाथ तो मिलकर द्दढ़‌ ताकत बन जाते बड़े बड़े दुश्मन तक इसके आगे ठहर न ...

मिमियाती ज़िन्दगी, दहाडते परिवेश [ग़ज़ल संग्रह से रचनायें -1] - लाला जगदलपुरी

साहित्य शिल्पी नें 25 नवम्बर 2010 को ‘लाला जगदलपुरी’ का साक्षात्कार प्रस्तुत किया था जिस पर एक लम्बी परिचर्चा/ विमर्श भी हुआ था। लाला जगदलपु...

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स्थानीय अपोलो चिकित्सालय में आज देर रात्रि विख्यात अर्थशास्त्री प्रो. सत्य सहाय का लम्बी बीमारी के पश्चात् देहावसान हो गया. छत्तीसगढ़ राज्...

कमाल है [कविता] - नीरज पाल

बासी रोटी के कुछ टुकड़े हाथो में एल्मुनियम का गन्दा कटोरा तरकारी के कुछ रसीले आलू जिन पर कुछ मक्खियाँ भिनभिना रही हैं और बोल रही हों पहले हम...

दो साल [कविता] - अवनीश तिवारी

दो साल से वे (विधवाएं)रो रहीं हैं, दो साल से उनकी (अनाथ) मुस्कान सो रही है, और बढ़ रही उसकी (कसाब) उम्र दो साल से| दो...

वाक्य रूप [आलेख] - डॉ. काजल बाजपेयी

वाक्य सामान्य परिभाषा का दावा है कि वाक्य एक पूर्ण सोच है। हालांकि, वाक्य को परिभाषित करने के लिए आवाज़ का उतार-चढ़ाव या अभिव्यक्ति का संतो...

''हिन्दी चेतना'' के मुख्य संपादक श्याम त्रिपाठी सम्मानित [साहित्य समाचार] - सुधा ओम ढींगरा

दिवाली के उपलक्ष्य में विश्व्व ब्राह्मण फेडरेशन ऑफ कनाडा द्वारा १४ नवम्बर २०१० को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया| जिसमें अपनी भाषा, संस्कृति...

सरखों में विराजे श्री मुरगुन स्वामी [आलेख] - प्रो. अश्विनी केशरवानी

छत्तीसगढ़ आदि काल से अपनी परम्परा, समर्पण की भावना, सरलता और उत्सवप्रियता के कारण पूरे देश में आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां के लोगों का ...

मुम्बई हमले के दो वर्ष उपरांत ... [आलेख एवं वीडिओ] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त’

[....... यथार्थ में आतंकवाद का दोषी कौन ... क्या वो हाथ जिन्हें जन्म लेते ही बंदूक थमा दी गयी हैं अथवा वो मस्तिष्क जो अपने स्वार्थ के लिये आ...

बस्तर के वरिष्ठतम साहित्यकार लाला जगदलपुरी से बातचीत [बस्तर शिल्पी अंक-2]  - राजीव रंजन प्रसाद

रात के लगभग नौ बजने पर थे; मुझे इस बार डोकरीघाट पारा की वह गली अपरिचित सी लगी। उन दिनों वह खपरैल का मकान हुआ करता था जिसकी दीवारे पक्की थीं।...

सेलिब्रेटी हत्यारा [कविता] - सुशील कुमार

नरसंहार-अपहरण करता रहा वह और धीरे-धीरे सेलिब्रेटी बन गया तो क्या अनाथालय के उदघाटन में फीता काटने के योग्य हो गया ? चुनाव में कातिलों की फ...

सूचना का अधिकार (RTI) वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ [आलेख] -- गोपाल प्रसाद

सरकार, सरकारी योजनाएँ और तमाम सरकारी गतिविधियाँ हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आम आदमी से जुड़े कई मामले प्रशासन में ...

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