वैसे वह काफी पढ़ा-लिखा और खुले विचारों वाला युवक था। एक कॉलेज मे साहित्य पढ़ाता था, लेकिन शहर मे आए दिन होने वाले दंगो से उसे बहुत डर लगता था। ये दंगे कभी भी भड़क उठते थे। वजह कोई भी हो, उनका अंत सांप्रादायिक दंगा के रूप में होता था।

पूरा शहर दो हिस्सों मे बँटा हुआ था। एक में उसके सम्प्रदाय के लोग रहते थे और शहर का दूसरा हिस्सा दूसरे सम्प्रदाय के लोगों द्वारा आबाद था। वह शहर के उस हिस्से में रहता था, जहाँ उसके सम्प्रदाय के लोग रहते थे। जब भी कोई दंगा होता, दूसरे सम्प्रदाय के लोग उनकी इलाके मे आकर लूट-पाट और आगजनी कर जाते। बदले में उसके सम्प्रदाय के लोग दूसरी तरफ आकर अपना हिसाब-किताब बराबर क आते। वह खुद कई बार इन दंगों का शिकार हो चुका था और काफी मानसिक यंत्रणा और नुक्सान झेलने पड़े थे।

वैसे जब शहर शांत होता होता तो दोनों सम्प्रदायों के लोग आपस में मिल-जुलकर भाइयों की तरह रहते थे। एक-दूसरे के बिना उनका गुज़ारा भी नहीं था। दूसरे सम्प्रदाय के उसके कई दोस्तों ने, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में रहते थे, उसे समझाया था कि दंगे मूलत: इसी वजह से होते हओं कि हम एक-सूसरे पर भरोसा नहीं करते। अपने-अपने इलाके बाँटकर रहते हैं। यदि दोनों सम्प्रदायों के लोग मिल-जुलकर एक ही मुहल्ले-कॉलॉनी नें रहें तो दंगो की आशंका बहुत कम हो जाती है। भाईचारा बढ़ता है। उसे बताया गया था कि आखिर पड़ोसी धर्म जैसी कोई चीज़ भी होती है दुनिया में। दोस्तों के बहुत जोर देने पर वह उनके मुहल्ले में रहने आ गया था। सबने उसे सर-आँखो पर बिठाया था और उसकी और उसके परिवार की पूरी सुरक्षा का अश्वासन दिया था।

शहर मे फिर दंगे भड़क उठे थे। दोनो तरफ मार-काट मच गई थी। गुंडे, लुटेरों के झुंड अपने-अपने काम पर निकल पड़े थे। उसके दोस्तों की मदद किसी काम नहीं आई थी और उसका घर एक बार फिर लूट लिया गया था।

इस बार लुटेरे उसके पुराने मुहल्ले के उसके अपने सम्प्रदाय के लोग थे।

1 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget