आज भी जब कभी अपने अतीत
के पन्नो को टटोलता हूँ,
तो कुछ पन्नो को मैं
बड़े प्यार से खोलता हूँ
इन पन्नो से मेरी साँसे जुडी हैं
इन्ही पे मेरी शरारते लिखी हैं !

सुबह हुई नहीं कि दिमाग़ मे
शरारत का मीटर भागना शुरू!
शरारत मे मैं अपने
मोहल्ले का था गुरु!

घर हो या बाहर
स्कूल हो या बाजार
मैं शैतानी के मौके तलाशता
किसी के कपड़ो पे स्याही गिराता
तो चोरी से किसे का नाश्ता खा जाता !

भाई-बहन की कापियाँ
बड़ी चालाकी से छुपा देता
वो ढूँढ़ कर परेशन होते
मैं मन ही मन हँसता
बाद मे उन्हे जब लाकर देता
बदले मे उनकी पेंसिल ले लेता !

छुटकी के जन्म दिन पर
माँ बड़ा सा केक लाई थी
बड़े चाकू से काटने को उसने
आस लगाई थी,
केक काटने के वक़्त उसका मुँह
खुला रह गया था,
क्योंकि आधा केक मैं पहले ही
चट कर गया था!

स्कूल मे एक अकडू बच्चे के
बस्ते मे रख दिया था साँप नकली
हो गयी हालत उसकी पतली
साँप-साँप चिल्लाकर भागा
उस दिन से वो हो गया सीधा!

और वो पड़ोस के नंदू को
एक दिन बरफी खिलाई थी
दो बरफी के बीच मे
मैंने मिर्ची की परत लगाई थी
जैसे ही उसने एक टुकड़ा
अपने मुँह मे डाला था ,
थू-थू कर के वो चिल्लाया
झट से उसे निकाला था!

मेरी बच्चपन की शरारते
मेरी अनमोल धरोहर है
जब कभी मैं अकेला महसूस करता हूँ
अपनी यादो की किताब खोल
इनही पन्नो को पढ़ लेता हूँ!

9 comments:

  1. आपकी बचपन की शरारते बहुत मजेदार थीं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. kua natkhat bachpan tha .
    achchhi kavita badhai

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut achchi kavita thi.. badhai

    उत्तर देंहटाएं
  4. Superb well done ... I think you should right more its just awesome

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 14 नवम्बर 2015 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 14 नवम्बर 2015 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget