वाक्य

सामान्य परिभाषा का दावा है कि वाक्य एक पूर्ण सोच है। हालांकि, वाक्य को परिभाषित करने के लिए आवाज़ का उतार-चढ़ाव या अभिव्यक्ति का संतोषजनक होना पूरे रूप में अधिक यथार्थवादी है: जो है, एक पूर्ण उक्ति।

प्रमुख वाक्य और लघु वाक्य

प्रमुख वाक्य शब्दों के व्याकरण की दृष्टि से स्वतंत्र समूह है जो कि कम से कम दो आवश्यक संरचनात्मक तत्वों को शामिल करता है: विषय और परिमित क्रिया।

लघु वाक्य अभिव्यक्ति का एक स्वीकार्य रूप है जो कि एक विषय या एक परिमित क्रिया, या दोनों का अभाव है।

1. विस्मयादिबोधक:
ओह! खैर, मैं कभी नहीं! वाह! महान! अविश्वसनीय!

2. प्रश्न या प्रश्नों के उत्तर:
कब? कल।
कितने? सात।
क्यों? किस लिए? कैसे? और क्या? सच में?

3. आम लौकिक या मुहावरेदार अभिव्यक्ति:
आराम से आना, आसानी से जाना।
अभी या कभी नहीं।

4. लघु वाक्य लेखकों के द्वारा आलंकारिक या शैलीगत प्रभाव के लिए प्रयोग किए जाते हैं जो जानते हैं कि उन्हें कैसे संभालना है।

विषय, क्रिया और उपवाक्य

सरलतम रूप में, अंग्रेजी वाक्य के दो भाग हैं : विषय और क्रिया जोकि एक पूरा विचार व्यक्त करते हैं जब वे एक साथ होते हैं।

विषय से पता चलता है कि कौन या क्या कार्रवाई हो रही है। यह हमेशा संज्ञा या सर्वनाम का कुछ रूप है। क्रिया से कार्रवाई की या होने की स्थिति का पता चलता है। यह एक कार्रवाई क्रिया हो सकती है, जैसे , "दौड़ना", या स्थिर क्रिया, जैसे "लगना"।

उदाहरण:

वह सो गया है।
कुत्ते भौंकते हैं।

वास्तविक वाक्य शायद ही कभी इतने छोटे होते हैं। हम आमतौर पर बहुत अधिक जानकारी देना चाहते हैं, इसलिए हम मुख्य विषय और क्रिया को दूसरे शब्दों और वाक्यांशों के साथ संशोधित करते हैं, जैसे कि नीचे दिए गए वाक्य के रूप में :

दुर्भाग्य से, वह आराम से सो गया।
आधी रात के बाद कुत्ते ज़ोर से भौंकते हैं।

अतिरिक्त जानकारी के बावजूद, इन वाक्यों में एक विषय और एक क्रिया है, इसलिए यह अभी भी सिर्फ एक उपवाक्य है।

उपवाक्य विषय और क्रिया का संयोजन है। जब आपके पास एक विषय और क्रिया है, तो आपके पास एक उपवाक्य है।

स्वतंत्र उपवाक्य : एक विषय और क्रिया जोकि एक पूरा विचार बनाते हैं। स्वतंत्र उपवाक्य स्वतंत्र कहे जाते हैं क्योंकि वे अपने बल पर खड़े हो सकते हैं और अर्थ बना सकते हैं।

आश्रित उपवाक्य : एक विषय और क्रिया जोकि एक पूरा विचार नहीं बनाते हैं। आश्रित उपवाक्यों को हमेशा एक स्वतंत्र उपवाक्य से जुड़े होने की आवश्यकता है।

प्रमुख वाक्य के रूप- साधारण, मिश्रित, जटिल, और मिश्रित-जटिल।

1. साधारण: वह काम करता है।

2. मिश्रित:इसमें दो या दो से अधिक साधारण वाक्य होते हैं। (समन्वयीकरण संयोजकों के साथ स्वतंत्र उपवाक्य)
वह हवाई जहाज से जाना चाहता था लेकिन वह रेल से गया।

3. जटिल:वाक्य में एक स्वतंत्र उपवाक्य और एक से अधिक गौण उपवाक्य होते हैं।

वह दावा करता है कि वह शांत है।. (प्रत्यक्ष कर्म के रूप में संज्ञा उपवाक्य)
पार्टी समाप्त होने से पहले ही वह चली गई। (क्रिया-विशेषणात्मक उपवाक्य)

योजक हमेशा आश्रित उपवाक्य की शुरुआत में रहते हैं। वे बताते हैं कि कैसे आश्रित उपवाक्य स्वतंत्र उपवाक्य से संबंधित है।

कारण/प्रभाव : क्योंकि, पहले, इसलिए कि
तुलना/व्यतिरेक: यद्यपि, हालांकि, जबकि, यदि, जब तक
स्थान/शैली: कैसे, तथापि, जहाँ
संभावना/शर्त: यदि, जब तक, चाहे
संबंध: जो, किस, कौन, किसका
समय: के रूप में, पहले, के बाद से, जब, जब तक, जब भी, जबकि

उदाहरण:

औरंगजेब ने खुलदाबाद को अपना अंतिम विरामस्थल चुना क्योंकि सैय्यद जैनुद्दीन, एक मुस्लिम संत का मकबरा, पड़ोस में ही है।

ड्रेगन आभूषण, यद्यपि इसके विषय में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है, सिक्किम कुछ अति सुंदर आभूषण उत्पन्न करता है।

4. मिश्रित-जटिल: वाक्य में दो स्वतंत्र उपवाक्य और दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं और एक या एक से अधिक गौण उपवाक्य होते हैं।

उदाहरण:

क्योंकि वह जानता था कि नौकरी महत्वपूर्ण थी, उसने बहुत ध्यान से शुरू किया, लेकिन जैसे जैसे समय बीता वह अधीर हो गया और इसलिए वह परिणाम प्राप्त करने में असफल रहा जिसकी उसने आशा की थी।

वहाँ सामान्य कमरे उपलब्ध हैं पर अगर यह एक पारिवारिक छुट्टी है तो दूब के मैदानों के बीच में स्थित, हर एक के अपने निजी बरामदे वाले, गृह कुटीर का चयन करें।

कुछ और मूलभूत वाक्य रूप

क. कर्मवाच्य
जहर आदमी को मारता है। (कर्तृवाचक)
वह जहर द्वारा मारा गया। (कर्मवाच्य)

ख. पूरक के साथ जोड़ने वाली क्रिया
विषय विधेय कर्तृउपवाक्यीय पूरक
(संज्ञा या सर्वनाम) (जोड़ने वाली क्रिया) (विधेय विशेषण)
वह है गरीब

ग. क्रियाएँ प्रत्यक्ष कर्म और उद्देश्य पूरक द्वारा साथ होती हैं
विषय विधेय
(संज्ञा या सर्वनाम) सकर्मक क्रिया प्रत्यक्ष कर्म उद्देश्य पूरक (विशेषण) उन्होंने बनाया स्वयं को सहज

घ. अनुपूरक रूप
विषय विधेय
कोई भी समाधान नहीं मौजूद है

अनुपूरक जोड़ने वाली क्रिया पूरक विषय
वहाँ थे कोई भी समाधान नहीं

--------------------
डॉ. काजल बाजपेयी
संगणकीय भाषावैज्ञानिक
सी-डैक, पुणे

4 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget