करते है लोग बगावत इक यहाँ हमारे आने से  [ग़ज़ल] - दीपक 'बेदिल'

अच्छा तो हम चलते है तेरे इस शहर दीवाने से करते है लोग बगावत इक यहाँ हमारे आने से गुमनाम ओ पोशीदा इंसान जो जो हुए है यहाँ वो मारे डर के नही...

मन तुम हरी दूब रहना [गीता पंडित के काव्य संग्रह पर चर्चा] – राजीव रंजन प्रसाद

“मन तुम हरी दूब रहना” किसी काव्य संग्रह का ही शीर्षक हो सकता है। कवियित्री गीता पंडित के भावुकता भरे शब्दों में किसी भी मन-दूब को हरी भरी रख...

जितेन्द्र ‘जौहर’ को मिला वर्ष-२०१० का ‘सृजन-सम्मान’ [साहित्य समाचार] - विजय कुमार ‘तन्हा’

रॉबर्ट्‍सगंज (सोनभद्र, उप्र, भारत)२३ दिसम्बर,२०१० को स्थानीय विवेकानन्द प्रेक्षागृह में हिन्दी दैनिक ‘बहुजन परिवार’ के स्थापना-दिवस एवं अंग्...

किसी का मख़मली अहसास मुझको गुदगुदाता है [ग़ज़ल] - मोईन शम्सी

किसी का मख़मली अहसास मुझको गुदगुदाता है ख़यालों में दुपट्टा रेशमी इक सरसराता है ठिठुरती सर्द रातों में मेरे कानों को छूकर जब हवा करती है सर...

धरोहर में भवानीप्रसाद मिश्र [बाल शिल्पी अंक -6] - डॉ. मो.अरशद खान

प्यारे बच्चों, "बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आप के लिये पहले तो नये वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें ले कर आये हैं। स...

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भू-तकनीक के क्षेत्र में देश की एकमात्र राष्ट्रीय संस्था इन्डियन जिओटेक्नीकल सोसायटी का जबलपुर चैप्टरदिनांक ८-९ जनवरी को एक राष्ट्रीय संगोष्ठ...

आचार्य श्यामल उपाध्याय की कुछ कवितायेँ

१. कवि-मनीषी साधना संकल्प करने को उजागर औ' प्रसारण मनुजता के भाव विश्व-कायाकल्प का बन सजग प्रहरी हरण को शिव से इतर संताप मैं कवि-मनीषी...

सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै एक [आलेख] - प्रो. अश्विनी केशरवानी

महानदी के तटवर्ती ग्राम्यांचलों में केवल राजा, जमींदार या किसान ही नहीं बल्कि समाज सुधारक, पथ प्रदर्शक, अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने में ...

क्या बात है [कविता] - श्यामल सुमन

अपनों के आस पास है तो क्या बात है यदि कोई उसमें खास है तो क्या बात है मजबूरियों से जिन्दगी का वास्ता बहुत, दिल में अगर विश्वास है तो क्या बा...

जाने ऐसा क्यों होता है? [गीत] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

* जाने ऐसा क्यों होता है? जानें ऐसा यों होता है... * गत है नीव, इमारत है अब, आसमान आगत की छाया. कोई इसको सत्य बताता, कोई कहता है यह माया. ...

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[मिमियाती ज़िन्दगी दहाडते परिवेश संग्रह से आज प्रस्तुत है लाला जगदलपुरी की तीन ग़ज़लें - संपादक, साहित्य शिल्पी] त्रासदी के गुरगो संभलो तुम...

वायदों पर जीते बरसों बीत गये {रिपोर्ताज} [बस्तर बोल रहा है, अंक-2] - हरिहर वैष्णव

बस्तर बोल रहा है के दूसरे अंक में आज हरिहर वैष्णव एक रिपोर्ताज प्रस्तुत कर रहे हैं। बस्तर का एक एक गाँव आज भी 'कारसिंग' ही है और दे...

ईश्वर पुत्र- यीशु मसीह [क्रिसमस पर विशेष प्रस्तुति] – अजय कुमार

जगत की सृष्टि - आदि मे परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। [बाइबल मे उत्पति 1:1] सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न ह...

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