समय काटते पुरुष
पान ठेले में
चाय की चुस्की लेते
दफ्तरों में।

सिरहाने दो तकिया लगाये
अखबार पढ़ते घरों में
समय मांगती औरतें
बरतन मांजती हुई
कपड़े धोती,सुखाती हुई
बस से दौड़कर उतरती हुई
मंच पर धीरे धीरे चढ़ते हुई
मन करता है पुरुषों से थोड़ा
समय छीन लूँ, झपट लूं।
और औरतों को दे दूं।

वे भी समय पा जायें
खाने,सोने, पढ़ने
और कभी-कभी हंसने का।

--------------------
रचनाकार परिचय-
--------------------
नामः श्रीमती सुषमा झा

शिक्षाः एम.एस.सी. एम.एड

संप्रतिः प्राचार्य, शा.बहु उ.उ. माध्यमिक विद्यालय जगदलपुर

आत्मकथ्यः विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविता ,लेख एवं कहानियां जैसे कादम्बनी, साक्षतात्कार, नारी का संबल, सूत्र, आहा जिंदगी

संपादनः पर्यटन भारती

पुरूस्कारः छतीसगढ़ राज्य स्तरीय सावित्री देवी फुले सम्मान, छ.ग. साहित्य समिति द्वारा सम्मानित, हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा सम्मानित.

13 comments:

  1. मन करता है पुरुषों से थोड़ा
    समय छीन लूँ, झपट लूं।
    और औरतों को दे दूं।

    वे भी समय पा जायें
    खाने,सोने, पढ़ने
    और कभी-कभी हंसने का।


    I liked the poem

    उत्तर देंहटाएं
  2. sushma ji !

    aapne atyant saral aur sundar shabdon me jis prakar ek gahri aur gambhir baat kahi hai vah badhaai ki patra hai

    aapko pranaam......kavita pasand aayi......

    -albela khatri

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सहजता के साथ स्त्री के लियें
    समय की मांग...सुषमा जी की
    रचना में मनमोहक लगी...


    आभार...शुभकामनाएं..
    गीता

    .

    उत्तर देंहटाएं
  4. "सोच" , निराली रचना है. बहुत सही कहा है सुषमा जी ने [भारतीय परिप्रेक्ष्य में, ख़ास कर ]. मगर औरते खुद कहीं 'चूक' नहीं गयी है अपना हक़ लेने में ?

    -मंसूर अली हाश्मी
    http://aatm-manthan.com

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुषमा जी संवेदना भरी कविता के लिये धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. कविता अपने आप में पूरा स्त्री विमर्श है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुषमा जी स्त्री विमर्श पर लिखी अच्छी कविता के लिये बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  8. Bahut hii sundar aur sashakt kavitaa ke liye kavyitrii ko badhaaii aur is prastuti ke liye saahity-shilpii kaa abhinandan! Shraddhey Laalaa jii kii rachnaaon ke baad Bastar ke hii ek aur shabd-shilpii ko antarjaal par padhnaa ek sukhad ahsaas hai. Abhinandan, abhinandan, abhinandan!!!

    --Harihar Vaishnav

    उत्तर देंहटाएं
  9. बस्तर के बीहड़ से नारी सशक्तिकरन की किरण

    उत्तर देंहटाएं
  10. nari vimarsh ki ek behatarin kavita.... ek naye yug ka aaranbh... prem kavya bahut padhane ko mila... ab yahan se ek nai vidha vidroh kavya ki shuruat... jo samay ki mang bhi hai .... 2010 me 33% arakshan mangana bekar, ab to chhin li jay pure adhikar... badhaiyan.... dr. suresh tiwari

    उत्तर देंहटाएं
  11. sunder rachna---stri ke haq ki baat kahi hai.unhe bhi apne liye jeene ka haq hai .Par iska ek doosra pahlu bi hai--kai saari sririyan ghanto tv ke aage baith kar serial dekh waqt kaati hai--lagta hai ki waqt hi waqt hai---Anyatha na lijiye ga ye bas ek vayang hai

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget