वरना जग से उठ जायेंगे [गज़ल]  - दीपक शर्मा

आँख बंद करके भला तमघन कैसे छट पायेंगे उठने के लिये जगना होगा , वरना जग से उठ जायेंगे सिर्फ बातों से, कलम से और बे - सिला तर्...

अयोध्या प्रकरण : कब?, क्या??, कैसे???...आपका मत? [एक बहस] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"

लगभग १२ लाख वर्ष पूर्व श्री राम का काल खंड. भूगोल के अंसार तब टैथीस महासागर समाप्त होकर ज़मीन उभर आई थी. बहुत सी ज़मीन विशाल शिलाओं के कारण ...

मशीन पठनीय शब्दकोश [तकनीकी आलेख] - डॉ. काजल बाजपेयी

सभ्यता और संस्कृति के उदय से ही मानव जान गया था कि भाव के सही संप्रेषण के लिए सही अभिव्यक्ति आवश्यक है। सही अभिव्यक्ति के लिए सही शब्द का चय...

झलख [ग़ज़ल] - श्यामल 'सुमन'

बेबस है जिन्दगी और मदहोश है ज़माना इक ओर बहते आंसू इक ओर है तराना लौ थरथरा रही है बस तेल की कमी से उसपर हवा के झोंके है दीप को बचाना म...

पत्रकारिता को ग्लैमर की चकाचौंध से बचाएं [साहित्य समाचार] - चित्रसेन सिंह

शचींद्र त्रिपाठी भाषा, भाव और विचार से समृद्ध उच्चकोटि के पत्रकार है। मूल्यों के प्रति समर्पित शचींद्र त्रिपाठी के पास अपना नज़रिया और अपना ...

27 सितम्बर भगतसिंह के जन्मदिन पर [विशेष आलेख] - शरद कोकास

क्रांतिकारियों को सम्मान देने की परम्परा में जिस तरह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के अन्य सेनानियों का सम्मान किया जाता है एवं उनका स्मरण किया ...

भीगे विश्वास का दर्द [कहानी] - रचना श्रीवास्तव

वो चल रही थी पर उसका मन भाग रहा था .धीरे धीरे उसने गति बढा दी वो लगभग दौड़ने लगी थी शायद वो अपने मन से आगे निकल जाना चाहती थी उसकी साँस फूल...

ज़िंदगी जी का जंजाल हो चली है [कविता] - विश्वदीपक 'तनहा'

ज़िंदगी जी का जंजाल हो चली है, मौत भी ससुरी मुहाल हो चली है.. न राशन रसद में, न ईंधन रसद में, न महफ़िल हीं जद में, न मंज़िल हीं जद म...

कन्हैयालाल नंदन-एक जीवंत नौकुचिया ताल  [कन्हैय्या लाल नंदन जी को विनम्र श्रद्धांजलि सहित] - डॉ. प्रेम जन्मेजय

अत्यंत दु:ख के साथ सूचित करना पड रहा है कि आज दिनांक २५ सितम्बर २०१० को सु-प्रसिद्ध साहित्यकार डा. कन्हैया लाल नंदन का निधन हो गया। हिन्दी ज...

सुना उन से कोई प्यासा नहीं है [ग़ज़ल] - शहरयार

जो कहते हैं कहीं दरिया नहीं है सुना उन से कोई प्यासा नहीं है। दिया लेकर वहाँ हम जा रहे हैं जहाँ सूरज कभी ढलता नहीं है। न जाने क्यों हमें ...

एक नवगीतिका -डॉ. वेद व्यथित

ओस की बूंदों में भीगे हैं पत्ते कलियाँ फूल सभी प्यार के छींटे मार गया है जैसे कोई अभी अभी अलसाये से नयन अभी भी ख्वाबों में खोये से हैं...

तुलसी दर्शन के रचनाकार बल्देवप्रसाद मिश्र [आलेख] - प्रो. अश्विनी केशरवानी

छतीसगढ़ का पूर्वी सीमान्त आदिवासी बाहुल्य जिला रायगढ़ केवल सांस्कृतिक ही नहीं बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी सम्पन्न रहा है। रियासत काल में यह...

प्यासी इंद्रावती [कविता] - शरद चन्द्र गौड

नीर की तलाश में नीर विहीन इंद्रावती बहती है मेरे घर के तीर कभी छूता था उसका जल मेरे घर की चौखट को बरसात में चौखट भी अब कहती मै हो गई अब नीर...

बंटवारा [बाल कहानी] -  डॉ. मोहम्मद अरशद खान

किसी गांव में एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके दो लड़के थे। एक का नाम बड़कू और दूसरे का नाम छुटकू था। दोनों हमेशा आपस में झगड़ते रहते थे। किसान...

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