वह अपने घर का तमाम ज़रूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया।

एक ने ट्रक के सामान पर नज़र डालते हुए कहा, "देखो यार! किस मज़े से इतना माल अकेला उड़ाए चला जा रहा है।"

सामान के मालिक ने कहा, "जनाब! माल मेरा है।"

दो तीन आदमी हँसे, "हम सब जानते हैं।"

एक आदमी चिल्लाया, "लूट लो! यह अमीर आदमी है, ट्रक लेकर चोरियाँ करता है।"

----------

मंटो की कहानियाँ इतिहास के दस्तखत हैं। वे वर्तमान को भी आईना दिखाने में सक्षम हैं। - साहित्य शिल्पी।

3 comments:

  1. सही कहा गया है |

    साहित्य शिल्पी को इसे बांटने के लिए धन्यवाद ! ऐसे और शुरुवात की जरुरत है |

    सस्नेह
    Avanaeesh

    उत्तर देंहटाएं
  2. Samaj ke vidrohi ang ki disha darshati yeh laghukatha apna safar poora kar rahi
    Sahityashilpi ke manadl ko dhnaywaad ise padwane ke liye

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज भी बारीकी से देखो तो कम्युनिज्म का यही चेहरा है इसके आगे कुछ नहीं।

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget