आज सवेरे सवेरे जंगल अचानक मर्मभेदी चीत्कार से दहल उठा. पास ही हरिणों के झुण्ड प्राय: आते रहने से ध्यान सहज ही उधर गया. दृश्य अविस्वसनीय होने के साथ साथ विस्मयकारी भी प्रतीत हुआ.

एक हिरण दो कुत्तों के बीच फंसा हुआ गगनभेदी चीत्कार से सारे जंगल को हिला रहा था कौतूहल एवं उसे बचाने के विचार से मैं अपने कुछ मित्रों को आवाज देते हुये उसी ओर दौड़ पड़ा

स्थल आंखो के सामने होने के बाद भी पर्याप्त दूर था. तब तक अचानक जंगल से चारो ओर से बहुत सारे हिरण उसी ओर दौड़ पड़े. सम्भवत: वह दो झुण्ड हैं क्योंकि उनमें अलग अलग दो नर हिरणों को मैं प्राय: अलग अलग झुण्ड के साथ देखा करता हूं.

अस्तु उन सबके सम्मिलित आ जाने से उनकी एकता का अनुभव कुत्तों को अवश्य हुआ किन्तु वह शायद अब शिकार करना सीख चुके हैं अत: उन्होंने सभी हिरणों को खदेड़ने में भी सफलता पा ली. शिकार हिरण के पिछले पैर में घाव काफी गहरा था और बाद में हम सबने कुत्तों को भगाकर उसकी जान बचाकर जंगल में भगा दिया. किन्तु घायल अवस्था के कारण हो सकता है वह लम्बे समय तक न बच सके

पालतू कुत्तों के स्वभाव में यह बदलाव चिन्ताजनक है. विगत में कुत्तों द्वारा शिशु तथा छोटे बच्चों पर कई बार शिकार की दृष्टि से आक्रमण करने के समाचार आ चुके हैं. पशु व्यवहार विज्ञानी इस पर अवश्य विचार कर रहे होंगे.

हम सब भी जंगलों के साथ साथ अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अन्धाधुंध दोहन से जैव-सामाजिक संतुलन भंग करने के लिये कम दोषी नहीं हैं

गणतन्त्र दिवस की झांकियां देखते हुये वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को लेकर मेरे संज्ञान मे निरन्तर यही पृश्न कौंध रहा है क्या हम सब जनगण हरिणों को इस अनुभूति कथा के मर्म पर किसी चर्चा की आवश्यकता है

शुभ गणतन्त्र दिवस

5 comments:

  1. गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें.

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  2. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !
    http://hamarbilaspur.blogspot.com/2011/01/blog-post_5712.html

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  3. सही कहा आपने इस पपर जरूर रिसर्च होनी चाहिये। आपको गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें |

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  4. " हम सब भी जंगलों के साथ साथ अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अन्धाधुंध दोहन से जैव-सामाजिक संतुलन भंग करने के लिये कम दोषी नहीं हैं "

    ठीक कह रहे हैं आप...
    सभी को नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है..


    आभार आपका..
    शुभ कामनाएँ
    गीता

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